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ED ने बेंगलुरु में WinZO के को-फाउंडर्स सौम्या सिंह राठौर और पावन नंदा को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान गिरफ्तार किया. (Photo Source : IE and FounderHub/LinkedIn)
ED Arrests WinZO Founders in Money Laundering Case : बेंगलुरु में बुधवार देर रात एक बड़े घटनाक्रम में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म WinZO के को-फाउंडर्स सौम्या सिंह राठौर और पावन नंदा को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया. अधिकारियों के अनुसार, घंटों की पूछताछ के बाद दोनों को हिरासत में लिया गया और यह कार्रवाई असल में रियल-मनी गेमिंग इंडस्ट्री में कथित गड़बड़ियों की चल रही जांच का हिस्सा है. मामले ने उद्योग जगत और खिलाड़ियों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
एक दिन की ED कस्टडी में भेजे गए फाउंडर्स
गिरफ्तारी के तुरंत बाद दोनों फाउंडर्स को उसी रात बेंगलुरु की अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें एक दिन की कस्टडी में भेज दिया. उम्मीद है कि आगे की जांच को देखते हुए एजेंसी फिर से अदालत में पेश कर विस्तारित रिमांड की मांग कर सकती है. मामला जितना आगे बढ़ रहा है, उतने ही नए दावे और आरोप सामने आ रहे हैं.
43 करोड़ रुपये सवालों के घेरे में: ED ने क्या कहा?
ED ने सोमवार को कहा था कि WinZO के पास अभी भी करीब 43 करोड़ रुपये खिलाड़ियों के हैं, जिन्हें सरकार द्वारा रियल-मनी गेम्स पर बैन लगाए जाने के बाद वापस कर देना चाहिए था. आरोप यह भी है कि WinZO ने खिलाड़ियों को जानकारी दिए बिना उन्हें असली खिलाड़ियों के बजाय कंप्यूटर एल्गोरिदम के मुकाबले पर लगाया. इससे न सिर्फ खेल की निष्पक्षता पर सवाल उठता है, बल्कि यह मनी लॉन्ड्रिंग की शंका को भी बढ़ाता है.
एजेंसी ने यह भी दावा किया कि अगस्त 2025 में यूनियन सरकार द्वारा रियल-मनी गेम्स पर बैन लगाए जाने के बाद भी WinZO ने न सिर्फ राशि वापस नहीं की, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों—जैसे ब्राज़ील, अमेरिका और जर्मनी—में भी उसी भारतीय प्लेटफॉर्म से रियल-मनी गेम्स चलाए. जांच एजेंसी ने WinZO की 505 करोड़ रुपये की बॉन्ड्स, एफडी और म्यूचुअल फंड्स की राशि को भी फ्रीज कर दिया है.
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एल्गोरिदम के जरिए खेल और अवैध कमाई का आरोप
ED का कहना है कि WinZO ने खिलाड़ियों के वॉलेट में मौजूद पैसे निकालने पर रोक लगाई, और ऐसे गेम्स चलाए जिनमें असली खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि सॉफ्टवेयर आधारित एल्गोरिदम थे. इस तरह हारे हुए दांवों से कंपनी ने कथित तौर पर अवैध कमाई की. अधिकारियों के अनुसार, इसी मॉडल के जरिये कंपनी ने करोड़ों रुपये का राजस्व गलत तरीके से अर्जित किया.
इसके अलावा, जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि करीब 55 मिलियन डॉलर यानी लगभग 490 करोड़ रुपये एक अमेरिकी शेल कंपनी में भेजे गए, जिसकी वास्तविक गतिविधियां भारत से ही संचालित हो रही थीं. यही तरह के आरोप Gamezkraft पर भी लगाए गए हैं.
WinZO ने कहा - हम पारदर्शिता से काम करते हैं
ED के दावों के बाद WinZO की तरफ से एक बयान जारी किया गया जिसमें कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज किया. बयान में कंपनी ने कहा कि प्लेटफॉर्म “फेयरनेस और ट्रांसपेरेंसी” पर आधारित है और सभी लागू कानूनों का पालन करता है. WinZO के प्रवक्ता ने कहा, “हमारा ध्यान हमेशा यूजर्स की सुरक्षा और भरोसे पर रहता है. प्लेटफॉर्म पूरी तरह नियमों के तहत चलता है.” कंपनी का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है.
दिल्ली, गुरुग्राम और बेंगलुरु में छापेमारी
जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि ED की बड़ी कार्रवाई पिछले हफ्ते दिल्ली, गुरुग्राम और बेंगलुरु में हुई, जिसमें WinZO के साथ Gamezkraft और Pocket52 के दफ्तर भी शामिल थे. इन छापों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए और बड़े पैमाने पर डेटा बैकअप लिया गया. यह पूरी कार्रवाई रियल-मनी गेमिंग पर लगे प्रतिबंध, कथित धोखाधड़ी और एल्गोरिदम में हेरफेर की जांच का हिस्सा है.
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