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India IPO market industrial : फाइनेंशियल ईयर 2025 में इंडस्ट्रियल कंपनियों के आईपीओ 5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए. (Reuters)
Why India manufacturing sector is growing : भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक मैन्युफैक्चरिंग का जीडीपी (GDP) में योगदान करीब दोगुना हो सकता है. कोविड के बाद के समय में जहां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर भारत ने सावधानी बरती थी, अब निवेश बढ़ने के साथ भारत मजबूत इंडस्ट्रियल ग्रोथ साइकिल की ओर बढ़ रहा है. यह पिछले कई दशकों में सबसे मजबूत औद्योगिक सुधारों में से एक माना जा रहा है. इक्विरस कैपिटल की नई इंडस्ट्रियल आउटलुक रिपोर्ट में ये बात कही गई.
2030 तक मैन्युफैक्चरिंग लगभग डबल होगी
इक्विरस कैपिटल का अनुमान है कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान वित्त वर्ष 2025 में 13% से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 में 20% हो जाएगा और और यह ग्रोथ एक बहुत बड़े आधार पर होगी. यह बढ़ोतरी बढ़ती मांग, नीतिगत सुधारों और ग्लोबल सप्लाई चेन के सामान्य होने से संभव होगी.
2030 में, भारतीय GDP का 5वां हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) का होगा. इसका कारण है, भारत का ग्लोबल सप्लाई चेन से बेहतर जुड़ाव, सरकारी नीतियों का समर्थन, और चीन पर निर्भरता कम करने का ग्लोबल ट्रेंड.
रिपोर्ट के अनुसार इस सेक्टर ने स्थिर और तेज ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार किया है. अगर जियो-पॉलिटिकल समस्याओं के कारण टैरिफ या व्यापारिक बाधाएं नहीं बढ़तीं, तो आने वाले 5 साल में भारतीय कंपनियां बहुत तेज ग्रोथ देखेंगी.
मैन्युफैक्चरिंग को किन बातों से सपोर्ट
मुनीश अग्रवाल, मैनेजिंग डायरेक्टर और सेक्टर लीड (इंडस्ट्रियल्स), इक्विरस कैपिटल, का कहना है कि पीएलआई (PLI), गति शक्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने जैसी सरकारी योजनाओं ने मैन्युफैक्चरिंग को देश की विकास की मजबूत नींव बना दिया है. इन सुधारों ने लंबे समय तक चलने वाले कैपेक्स साइकिल और बड़े स्ट्रक्चरल फायदों का रास्ता तैयार किया है. उम्मीद है कि सरकार रोजगार बढ़ाने के लिए ऐसे सुधारों को और मजबूत करेगी.
कैपिटल मार्केट्स में मजबूत इंडस्ट्रियल भरोसा
यह भरोसे वाला माहौल बाजार में साफ दिखाई देता है. जुलाई 2022 से बीएसई इंडस्ट्रियल्स इंडेक्स ने सेंसेक्स और अन्य सेक्टोरल इंडेक्स (FMCG, हेल्थकेयर, आईटी, फाइनेंशियल सर्विसेज) की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है.
IPO एक्टिविटी में तेज बढ़ोतरी
इंडस्ट्रियल सेक्टर में फंड जुटाने की गतिविधि में भी बड़ी तेजी देखने को मिली है. अग्रवाल ने कहा कि फाइनेंशियल ईयर 2025 में इंडस्ट्रियल कंपनियों के आईपीओ (IPO) 5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए, जिसमें कुल 32 लिस्टिंग हुईं, जो कोविड से पहले के समय से भी काफी ज्यादा है. जुटाई गई रकम के हिसाब से भी फाइनेंशियल ईयर 2025 सबसे मजबूत साल रहा. इंडस्ट्रियल आईपीओ के जरिये 663.2 बिलियन रुपये जुटाए गए, जबकि फाइनेंशियल ईयर 2024 में यह राशि 170 बिलियन रुपये थी.
फाइनेंशियल ईयर 2026 (अब तक) में भी यह तेजी बनी हुई है. इंडस्ट्रियल कंपनियों का आईपीओ वॉल्यूम में हिस्सा पिछले साल के लगभग 30% से बढ़कर करीब 40% हो गया है. विलय और अधिग्रहण (M&A) और प्राइवेट इक्विटी (PE) निवेश भी 5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जो 1,432.8 बिलियन रुपये है. यह 2020 में 508.2 बिलियन रुपये और 2024 में 807.3 बिलियन रुपये था.
अग्रवाल के अनुसार हम उम्मीद करते हैं कि ईवी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में एमएंडए आधारित एकीकरण आने वाले ग्रोथ का बड़ा कारण बनेगा. वहीं पैकेजिंग, एयरोस्पेस और डिफेंस में प्राइवेट इक्विटी निवेश फाइनेंशियल ईयर 2030 तक मजबूत बना रहेगा. इंडस्ट्रियल सेक्टर के इन हिस्सों में कैपिटल मार्केट से जुड़ी गतिविधियां भी तेज रहने की संभावना है.
ध्यान देने लायक 3 बड़े इंडस्ट्रियल ट्रेंड
रिपोर्ट ने 3 ऐसे इंडस्ट्रियल सब-सेक्टर बताए हैं, जिनमें 2030 तक सबसे अधिक डील्स और निवेश होने की संभावना है:
एयरोस्पेस और डिफेंस : यह सबसे तेजी से बढ़ता हुआ प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल (PE/VC) थीम है, जिसकी ग्रोथ रेट लगभग 100% सालाना (CAGR) है.
रिन्यूएबल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और बैटरी : ये सेक्टर पीएम ई-ड्राइव योजना, पीएलआई (PLI) योजनाओं और क्लीन-टेक की बढ़ती मांग की वजह से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित कर रहे हैं.
ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और AI इंटीग्रेशन : इंडस्ट्रियल सेक्टर में डीप-टेक और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा, और छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में भी रोबोटिक्स अपनाया जाएगा.
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