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Infosys बायबैक में अपने शेयर ऑफर करने से पहले जान लें कुछ जरूरी बातें (File Photo : Reuters)
Infosys Share Buyback : देश की दिग्गज टेक कंपनी इंफोसिस ने 20 नवंबर को अपने अब तक के सबसे बड़े बायबैक का दरवाजा खोल दिया है. 18,000 करोड़ रुपये के इस प्रोग्राम में कंपनी प्रति शेयर 1,800 रुपये देने को तैयार है. गुरुवार को कंपनी का शेयर 1,536.30 रुपये पर बंद हुआ था. इस मुकाबले बायबैक पर मिल रहा प्रीमियम कई निवेशकों को आकर्षित कर सकता है. लेकिन सिर्फ प्रीमियम देखकर जल्दबाज़ी में शेयर टेंडर करना जोखिम भरा हो सकता है. बायबैक के नियम, टैक्स में आए बदलाव और आपकी आय के स्लैब से जुड़ी कई ऐसी बारीकियां हैं, जिन्हें समझे बिना फैसला लेना नुकसानदेह साबित हो सकता है.
रिकॉर्ड डेट और एलिजिबिलिटी को सही समझें
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इंफोसिस (Infosys) के बायबैक में हर शेयरहोल्डर हिस्सा नहीं ले सकता. सिर्फ वही निवेशक एलिजिबल हैं, जिनके पास 14 नवंबर 2025 की रिकॉर्ड डेट को Infosys के शेयर मौजूद थे. अगर आपने इसके बाद शेयर खरीदे हैं, तो आप इस ऑफर का लाभ नहीं उठा पाएंगे. साथ ही कंपनी केवल करीब 2.4% इक्विटी खरीद रही है, जिसका मतलब है कि आपके शेयरों को बायबैक में स्वीकार किए जाने की संभावना (acceptance ratios) भी सीमित है.
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नए टैक्स रूल्स आपके फैसले को बदल सकते हैं
इस शेयर बायबैक की सबसे बड़ी पेचीदगी टैक्स नियमों में हुए बदलावों से जुड़ी है. अब बायबैक से मिलने वाली रकम अन्य स्रोतों से आय (income from other sources) मानी जाएगी और उस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा. पहले कंपनी बायबैक टैक्स देकर निवेशकों को टैक्स-फ्री इनकम देती थी, लेकिन वह सुविधा अब खत्म हो चुकी है. अगर आप 30% टैक्स स्लैब में आते हैं, तो टैक्स का असर बायबैक प्रीमियम के बड़े हिस्से को हजम कर सकता है. यही वजह है कि कई लोगों के लिए यह ऑफर उतना फायदेमंद नहीं रह जाता, जितना पहली नजर में लगता है.
ओपन मार्केट में बेचने से तुलना जरूरी है
कई निवेशक यह भी सोच रहे हैं कि बायबैक बेहतर है या ओपन मार्केट में शेयर बेचना. अगर आपने शेयर 12 महीने से ज्यादा समय तक होल्ड किया है, तो लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर करीब 12.5% टैक्स लगता है. वहीं 12 महीने से कम होल्डिंग पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स 20% है. कई मामलों में यह टैक्स स्ट्रक्चर बायबैक के मुकाबले बेहतर बैठ सकता है. इस तुलना को समझे बिना फैसला लेना ठीक नहीं.
सेक्शन 87A रीबेट से घट सकता है टैक्स
नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में अगर आपकी कुल टैक्सेबल इनकम, जिसमें बायबैक से मिलने वाला "डिविडेंड" भी शामिल है, 12 लाख रुपये की सीमा में है, तो आपको सेक्शन 87A के तहत टैक्स रीबेट का लाभ मिल सकता है. इसका मतलब है कि बायबैक से मिलने वाली रकम पर आपका टैक्स बोझ काफी कम हो सकता है. ओल्ड टैक्स रिजीम में यह सीमा 5 लाख रुपये है. इसके अलावा, अगर आपके पास कैपिटल गेन है, तो बायबैक के कारण बनने वाले कैपिटल लॉस को आप उसमें एडजस्ट कर सकते हैं, जिससे कुल टैक्स देनदारी और कम हो सकती है.
सबसे बड़ा ट्विस्ट - खरीद कीमत घटाई नहीं जाएगी
कई निवेशकों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बायबैक से मिलने वाली रकम में से शेयर खरीदने पर खर्च हुई रकम घटाई नहीं जाएगी. आपकी लागत को अब "कैपिटल लॉस" माना जाएगा, जिसे आप मौजूदा या आने वाले वर्षों में कैपिटल गेन से एडजस्ट कर सकते हैं. शॉर्ट-टर्म लॉस को शॉर्ट और लॉन्ग दोनों तरह के गेन से एडजस्ट किया जा सकता है, जबकि लॉन्ग-टर्म लॉस को सिर्फ लॉन्ग-टर्म गेन में ही सेट ऑफ किया जा सकता है. यह लॉस आगे 8 साल तक कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है, बशर्ते रिटर्न समय पर फाइल किया जाए.
बायबैक पर TDS भी कटेगा
Infosys बायबैक अमाउंट पर 10% TDS भी काटेगी, अगर रकम 1,000 रुपये से अधिक हो. शेयर की कीमतों को देखते हुए अगर एक भी शेयर बायबैक में लिया, तो यह लिमिट तो पार हो ही जाएगी. कम टैक्स स्लैब वाले निवेशकों को बाद में इस टीडीएस का रिफंड मिल सकता है, लेकिन पहले तो कैश फ्लो पर असर पड़ना तय है. इसलिए निवेशकों को इसे भी ध्यान में रखना चाहिए.
प्रमोटर्स का हिस्सा न लेने का असर
इंफोसिस के प्रमोटर्स इस बायबैक में अपने शेयर नहीं दे रहे हैं. इससे आम निवेशकों के लिए स्वीकार्यता अनुपात (acceptance ratios) थोड़ा बेहतर हो सकता है, लेकिन यह गारंटी नहीं है कि आपके सभी शेयर खरीद लिए जाएंगे.
क्या आप छोटे शेयरहोल्डर की कैटेगरी में आते हैं?
अगर आपकी शेयर होल्डिंग रिकॉर्ड डेट पर 2 लाख रुपये या उससे कम थी, तो आप छोटे शेयरहोल्डर (Small Shareholder) की कैटेगरी में शामिल हैं. इस कैटेगरी के लिए बायबैक में रिजर्व्ड कोटा ज्यादा रहता है, जिससे आपके शेयर बायबैक में एक्सेप्ट होने की संभावना बेहतर हो सकती है. इसलिए अपनी होल्डिंग की वैल्यू एक बार जरूर देख लें.
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