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Tata Steel : टाटा ग्रुप स्‍टॉक दे सकता है 27% रिटर्न, मोतीलाल ओसवाल इन 5 वजहों से बुलिश

टाटा ग्रुप स्टॉक 27% तक रिजर्न दे सकता है. मोतीलाल ओसवाल ने स्टॉक बुलिश को लेकर 5 फैक्टर वजह बताई है. इसके लिए ब्रोकरेज हाउस ने टार्गेट प्राइस 210 रुपये रखा है.

टाटा ग्रुप स्टॉक 27% तक रिजर्न दे सकता है. मोतीलाल ओसवाल ने स्टॉक बुलिश को लेकर 5 फैक्टर वजह बताई है. इसके लिए ब्रोकरेज हाउस ने टार्गेट प्राइस 210 रुपये रखा है.

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Mithilesh Kumar
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Tata Steel

आखिर किन वजहों से मोतीलाल ओसवाल टाटा ग्रुप स्टॉक को लेकर इतना बुलिश है, आइए जानते हैं. (Image : IE)

स्टील सेक्टर में सुस्ती की चर्चाओं के बीच टाटा स्टील ने एक बार फिर बाजार की उम्मीदों को तेज कर दिया है. ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने टाटा ग्रुप के इस शेयर पर Buy रेटिंग जारी रखते हुए 210 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है. रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा कीमतों से इस स्टॉक में करीब 27% तक की बढ़त की संभावना है.

टाटा ग्रुप की कंपनियों में से फिलहाल निवेशकों की सबसे ज्यादा नजर टाटा स्टील पर है. ब्रोकरेज की पॉजिटिव राय कंपनी के हालिया अधिग्रहण, भारत में उसकी दीर्घकालिक रणनीति और आने वाले सालों में शुरू होने वाले बड़े विस्तार कार्यक्रम पर आधारित है. आइए जानते हैं कि आखिर किन वजहों से ब्रोकरेज फर्म इस शेयर को लेकर इतना बुलिश है.

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व्यू और वैल्यूएशन : क्यों बढ़ी उम्मीदें?

ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि टाटा स्टील की नई स्ट्रैटेजी न सिर्फ भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, बल्कि आने वाले सालों की चुनौतियों से निपटने के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है. कंपनी का हालिया अधिग्रहण, कोर सेक्टर में बड़े पैमाने पर विस्तार और कच्चे माल की सप्लाई सुनिश्चित करने वाली नीतियां इस तेजी भरे नजरिये को मजबूत बनाती हैं.

TPPL का अधिग्रहण

TPPL की खरीद से कंपनी को 4 मिलियन टन की अतिरिक्त पेलेट क्षमता और स्लरी पाइपलाइन का फायदा मिलेगा. इससे आने वाले सालों में कच्चे माल की लगातार सप्लाई सुनिश्चित रहेगी, खासकर तब जब FY30 में कुछ आयरन-ओर खदानों की लीज खत्म होने वाली है. इस लिहाज से यह सौदा कंपनी के लिए एक मज़बूत सुरक्षा कवच बन जाता है.

मल्टी-ईयर एक्सपेंशन फेज की शुरुआत

टाटा स्टील अब लम्बे और फ्लैट स्टील उत्पादों के साथ-साथ डाउनस्ट्रीम सेगमेंट में भी बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है. हालांकि कैपेक्स बढ़ेगा, लेकिन कंपनी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी जिससे कर्ज का दबाव नियंत्रण में रहेगा.

LMEL के साथ MoU

गढ़चिरौली के आयरन-ओर–स्टील क्लस्टर में कंपनी की मजबूत एंट्री से नए बिजनेस अवसर खुलेंगे. यह कदम भविष्य की स्टील क्षमता और वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा.

कच्चे माल की सुरक्षा और वैल्यू-ऐडेड पोर्टफोलियो में मजबूती

ये स्ट्रैटेजिक स्टेप कंपनी को न सिर्फ स्थिर कच्चा माल सुनिश्चित करेंगे, बल्कि उच्च मार्जिन देने वाले उत्पादों की हिस्सेदारी भी बढ़ाएंगे, जो लंबे समय में कमाई को मजबूत बनाता है.

ऑपरेटिंग एफिशियंसी बेहतर, घरेलू मांग मजबूत

टाटा स्टील भारत के सबसे बड़े स्टील उत्पादकों में शामिल है और कंपनी को बेहतर स्टील कीमतों, उच्च दक्षता और घरेलू बाजार की मजबूत मांग का सीधा फायदा मिल रहा है. वैश्विक स्तर पर टैरिफ बढ़ोतरी जैसी अनिश्चितताएं जरूर हैं, लेकिन कंपनी का भारतीय बिजनेस लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है, और यूरोपीय यूनिट में सुधार से कुल कमाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा.

मौजूदा कीमत (CMP) पर टाटा स्टील 6.5 गुना EV/EBITDA और 1.8 गुना FY27E प्राइस-टू-बुक वैल्यू पर ट्रेड कर रहा है. इसी वैल्यूएशन को देखते हुए ब्रोकरेज ने अपनी Buy रेटिंग बरकरार रखी है और सितंबर 2027 की अनुमानित कमाई (EPS) के आधार पर SOTP मॉडल से 210 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है.

Tata Steel का मार्केट कैप 23 अरब डॉलर है और इसका करेंट मार्केट प्राइस (CMP) 166 रुपये के आसपास चल रहा है. ब्रोकरेज हाउस ने इस स्टॉक पर Buy की सलाह देते हुए 210 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 27% की संभावित बढ़त दिखाता है.

TATA IN

  • Mkt Cap - USD23b
  • CMP - 166 रुपये,
  • TP - 210 रुपये,
  • 27% Upside, Buy

10 दिसंबर 2025 को टाटा स्टील ने Thriveni Pellets (TPPL) में 50.01% हिस्सेदारी खरीदने पर सहमति दी. यह हिस्सेदारी कंपनी को Thriveni Earthmovers (TEMPL) से करीब 636 करोड़ रुपये में मिलेगी. इस डील के बाद टाटा स्टील को 4 मिलियन टन सालाना क्षमता वाले पेलेट प्लांट और 212 किमी लंबी स्लरी पाइपलाइन तक सीधी पहुंच मिल जाएगी. यह पूरी सुविधा Brahmani River Pellets (BRPL) द्वारा संचालित होती है, जो TPPL की 100% सब्सिडियरी है.

यह प्लांट ओडिशा के जाजपुर में स्थित है, जो टाटा स्टील की पूर्वी भारत की ऑपरेशंस रणनीति के बिल्कुल अनुरूप है. डील पूरी होने के बाद टाटा स्टील TPPL में नियंत्रक शेयरधारक बन जाएगा, जबकि Lloyds Metals & Energy (LMEL) की 49.99% हिस्सेदारी बनी रहेगी.

टाटा स्टील का उद्देश्य इस अधिग्रहण के जरिए भारत में अपने ऑपरेशंस के लिए लंबे समय तक पेलेट की स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करना है. पेलेट, BF-BOF और DRI यूनिट्स के लिए बेहद अहम कच्चा माल है. इसलिए यह सौदा कंपनी की बैकवर्ड इंटीग्रेशन रणनीति को मजबूत करता है. यह कदम FY30 में कुछ आयरन ओर खदानों की लीज खत्म होने से पहले फीडस्टॉक सुरक्षा की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा भी है.

प्रस्तावित अधिग्रहण किसी संबंधित पार्टी के साथ नहीं है और इसे पूरा करने के लिए CCI (Competition Commission of India) की मंजूरी ज़रूरी होगी. कंपनी को उम्मीद है कि यह मंजूरी अगले 3–4 महीनों में मिल जाएगी. मंजूरी मिलने के बाद ही पूरी राशि का भुगतान होगा और टाटा स्टील TPPL के पेलेट प्लांट पर नियंत्रण हासिल कर लेगा.

भारत में स्टील क्षमता बढ़ाने की तैयारी (Domestic Steel Capacity Expansion)

टाटा स्टील लगातार अपनी भारत-केंद्रित दीर्घकालिक रणनीति को दोहरा रही है. कंपनी का फोकस उत्पादन क्षमता बढ़ाने, वैल्यू-एडेड (उच्च मूल्य वाले) स्टील उत्पादों पर, खनन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर और कम-कार्बन स्टील तकनीकों पर है. यूरोप में पुनर्गठन का काम अब काफी हद तक आगे बढ़ चुका है, और कंपनी भारत में तेज़ी से विस्तार मोड में प्रवेश कर रही है.

क्षमता विस्तार, नीलांचल इस्पात निगम (NINL)

बोर्ड ने अपने दीर्घकालिक प्लान के पहले चरण के तहत 4.8 मिलियन टन सालाना (mtpa) क्षमता बढ़ाने को मंज़ूरी दी है.
यह विस्तार टाटा स्टील के लॉन्ग प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो को और मज़बूत करेगा, जो निर्माण और रिटेल बाज़ारों में इस्तेमाल होते हैं और जहाँ घरेलू मांग लगातार तेज़ी दिखा रही है.

डाउनस्ट्रीम और फ्लैट प्रोडक्ट्स में विस्तार

Meramandali में 2.5mtpa थिन स्लैब कैस्टर और रोलिंग मिल: बोर्ड ने इस नई क्षमता के डिज़ाइन और इंजीनियरिंग का काम शुरू करने की मंज़ूरी दी है. इससे कंपनी वैल्यू-एडेड, पतले स्टील की उत्पादन क्षमता तेज़ी से बढ़ा सकेगी.

Tarapur में 0.7mtpa HRPGL लाइन (Tata Steel BlueScope – JV): यह नई लाइन मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल कंपनियों (OEMs) की ज़रूरतें पूरी करेगी, आयात पर निर्भरता कम करेगी और कोटेड स्टील के सेगमेंट में टाटा की liderança को और मजबूत बनाएगी.

गढ़चिरौली में LMEL के साथ रणनीतिक साझेदारी

टाटा स्टील ने LMEL के साथ आयरन ओरे माइनिंग, लॉजिस्टिक्स, स्लरी पाइपलाइन, पेलेट और स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी के लिए MoU साइन किया है. कंपनी इन अवसरों को तलाश रही है:

  • 6mtpa का नया ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट, दो चरणों में
  • गढ़चिरौली में खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े नए प्रोजेक्ट, ताकि आयरन ओरे का उत्पादन बढ़ सके
  • LMEL के मौजूदा इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट्स में संभावित सहयोग
  • ये सभी प्रस्ताव आगे की जांच-पड़ताल (due diligence) और मंज़ूरियों पर निर्भर करेंगे.

Hisarna – कम-कार्बन स्टील तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट

  • टाटा स्टील बोर्ड ने जमशेदपुर में 1mtpa का डेमो प्लांट लगाने के लिए इंजीनियरिंग और रेग्युलेटरी मंज़ूरियों का काम शुरू करने की अनुमति दी है.
  • Hisarna तकनीक में कोक की ज़रूरत नहीं होती और यह लो-ग्रेड ओरे का इस्तेमाल कर सकती है, जिससे स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन काफी कम हो जाता है.
  • टाटा स्टील के पास इस तकनीक का वैश्विक IP है, जो उसे लंबे समय में टिकाऊ (sustainable) स्टील उत्पादन का अग्रणी खिलाड़ी बना सकता है.

(Disclaimer: यहां स्टॉक में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दी गई है. यह फाइनेंशियल एक्सप्रेस के निजी विचार भी नहीं है. बाजार में जोखिम होते हैं, इसलिए निवेशक निवेश का कोई फैसला लेने के पहले एक्सपर्ट की राय लें.)

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