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SEBI IPO Rules : अभी 75 से अधिक कंपनियों को सेबी की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि अन्य 100 कंपनियां अप्रूवल के इंतजार में हैं. (Freepik)
Upcoming IPO 2026 : साल 2025 में आईपीओ मार्केट में जमकर एक्शन देखने को मिला, अब नए साल में भी ऐसा ही ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है. पर्याप्त घरेलू नकदी, निवेशकों का मजबूत भरोसा और बेहतर मैक्रो कंडीशंस के चलते 2025 में रिकॉर्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये जुटाकर रिकॉर्ड स्तर छूने वाले आईपीओ मार्केट की यह तेजी नए साल में भी जारी रहने वाली है.
मार्केट पार्टिसिपेंट 2026 में आईपीओ गतिविधियों को लेकर आशावादी बने हुए हैं. इक्विरस कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर एंड इन्वेस्टमेंट बैंकिंग हेड, भावेश शाह ने कहा कि नए साल के लिए आईपीओ (IPO) का आउटलुक मजबूत बना हुआ है.
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उन्होंने बताया कि 75 से अधिक कंपनियों को पहले ही मार्केट रेगुलेटर सेबी की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन उन्होंने अभी तक अपने इश्यू शुरू नहीं किए हैं. जबकि अन्य 100 कंपनियां नियामक के अप्रूवल का इंतजार कर रही हैं. आगामी आईपीओ में टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल सर्विसेज, बुनियादी ढांचा, एनर्जी और कंजम्पशन सेक्टर के आईपीओ शामिल हैं, जो व्यापक सहभागिता को दर्शाते हैं. इसमें रिलायंस जियो, एसबीआई म्यूचुअल फंड, ओयो और फोनपे जैसे प्रमुख आईपीओ के शामिल होने की भी संभावना है.
स्टार्टअप भी तेजी से हो रहे लिस्ट
साल 2025 की एक बड़ी उपलब्धि स्टार्टअप का लिस्ट (Stock Market Listing) होना रहा. इस साल लेंसकार्ट, ग्रो, मीशो और फिजिक्सवॉला समेत 18 स्टार्टअप शेयर बाजार में लिस्ट हुए और संयुक्त रूप से 41,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए. वहीं, 2024 में स्टार्टअप ने 29,000 करोड़ रुपये जुटाए थे. साथ ही, बिक्री पेशकश (ओएफएस) फंड जुटाने की गतिविधियों में प्रमुख बना रहा. इसकी 2025 में जुटाई गई कुल रकम में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी रही.
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2025 में 1.76 लाख करोड़ रुपये जुटाए
‘आईपीओ सेंट्रल’ के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में पेश किए गए 103 नए आईपीओ ने कुल 1.76 लाख करोड़ रुपये जुटाए. यह 2024 में 90 कंपनियों द्वारा जुटाए गए 1.6 लाख करोड़ रुपये और 2023 में 57 कंपनियों द्वारा जुटाए गए 49,436 करोड़ रुपये से अधिक है.
जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज में मैनेजिंग डायरेक्टर एंड इक्विटी कैपिटल मार्केट हेड, नेहा अग्रवाल ने कहा कि मजबूत घरेलू नकदी और निवेशकों के भरोसे ने रिकॉर्ड फंड जुटाने में मदद की. इक्विरस कैपिटल के शाह ने कहा कि भारत की मैक्रो इकोनॉमिक स्थिरता (जिसमें मजबूत जीडीपी ग्रोथ, कंट्रोल होती महंगाई और फेवरेबल पॉलिसी शामिल हैं) ने ग्लोबल और घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ाया.
2025 में OFS का रहा जोर
आनंद राठी एडवाइजर्स के डायरेक्टर एंड ईसीएम इन्वेस्टमेंट बैंकिंग हेड, वी प्रशांत राव ने कहा कि हालांकि आईपीओ की संख्या बढ़ी लेकिन फंड जुटाने में झुकाव अधिकतर बिक्री पेशकश की ओर रहा. इस साल लिस्ट हुईं कंपनियों में से केवल 23 ने पूरी तरह से फ्रेश इश्यू के माध्यम से फंड जुटाया, जिनका औसत आईपीओ साइज 600 करोड़ रुपये रहा. इसके विपरीत, 15 कंपनियों ने केवल ओएफएस के माध्यम से 45,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए. बाकी कंपनियों ने दोनों का मिक्स अपनाया, जिसमें ओएफएस की हिस्सेदारी अधिक रही.
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