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New Labour Codes : नए लेबर कोड से घट सकती है बेरोजगारी दर, 77 लाख लोगों के लिए खुलेंगे मौके, SBI रिपोर्ट में दावा

नए लेबर कोड लागू होने के बाद बेरोजगारी लगभग 1.3 प्रतिशत तक घट सकती है. इसका मतलब है कि करीब 77 लाख लोगों को नए रोजगार मिल सकते हैं. एसबीआई ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है.

नए लेबर कोड लागू होने के बाद बेरोजगारी लगभग 1.3 प्रतिशत तक घट सकती है. इसका मतलब है कि करीब 77 लाख लोगों को नए रोजगार मिल सकते हैं. एसबीआई ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है.

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FE Hindi Desk
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सरकार के नए लेबर रिफॉर्म्स आने वाले समय में देश में रोजगार और फॉर्मल जॉब्स को काफी बढ़ावा दे सकते हैं. (Image: Akashwani)

सरकार के नए लेबर रिफॉर्म्स आने वाले समय में देश में रोजगार और फॉर्मल जॉब्स को काफी बढ़ावा दे सकते हैं. SBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए लेबर कोड लागू होने के बाद बेरोजगारी लगभग 1.3 फीसदी तक घट सकती है. इसका मतलब है कि करीब 77 लाख लोगों को नए रोजगार मिल सकते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, इस वक्त भारत में 15 साल और उससे ऊपर की आबादी में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 60.1 फीसदी है. ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों की मिलाकर कामकाजी आबादी औसतन 70.7 फीसदी है.

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नए लेबर कोड लागू होने के बाद भारत में फॉर्मल जॉब्स (यानी PF, ESI और अन्य सुविधाओं वाली नौकरियां) कम से कम 15 फीसदी बढ़ सकती हैं. इससे फॉर्मल रोजगार की हिस्सेदारी 60.4 फीसदी से बढ़कर 75.5 फीसदी तक पहुंच सकती है. सामाजिक सुरक्षा कवर भी बढ़कर 85 फीसदी तक पहुंच सकता है.

SBI के मुताबिक, रिफॉर्म्स लागू होने के बाद लोगों की आमदनी और खपत दोनों बढ़ेंगी. बचत दर लगभग 30 फीसदी मानते हुए अनुमान है कि हर व्यक्ति की रोज की खपत करीब 66 रुपये बढ़ सकती है, जो कुल मिलाकर 75,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त खपत पैदा करेगी. इससे देश की अर्थव्यवस्था को अच्छी बढ़त मिलेगी.

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रिपोर्ट में बताया गया कि देश में अभी लगभग 44 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं. इनमें से करीब 31 करोड़ ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं. अगर इनमें से 20 फीसदी लोग भी फॉर्मल सेक्टर में आ जाते हैं, तो 10 करोड़ लोगों को बेहतर नौकरी सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और फॉर्मल रोजगार के फायदे मिल सकते हैं.

नए लेबर कोड्स को 21 नवंबर 2025 से लागू किया गया है. सरकार ने 29 पुराने लेबर कानूनों को मिलाकर उन्हें चार बड़े कोड में बदल दिया है, ताकि नियम आसान हों और काम की जगहों पर गवर्नेंस बेहतर हो सके. ये चार कोड हैं:

  • वेजेज कोड (2019)
  • सोशल सिक्योरिटी कोड (2020)
  • ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ और वर्किंग कंडीशंस कोड (2020)
  • इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020)

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बदलावों से देश का लेबर सिस्टम ज्यादा मजबूत होगा और कामगारों को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी, जिससे आने वाले सालों में रोजगार और अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा होगा.

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