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Aadhaar : बर्थ सर्टिफिकेट के बिना नहीं बनेगा 5-18 साल वालों का आधार? UIDAI की क्या है तैयारी

फिलहाल 0 से 5 साल तक के बच्चों का आधार बनवाने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट जरूरी है. अब UIDAI 5 से 18 साल के बच्चों और युवाओं के आधार एनरोलमेंट के लिए भी इसी एक अहम दस्तावेज को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है.

फिलहाल 0 से 5 साल तक के बच्चों का आधार बनवाने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट जरूरी है. अब UIDAI 5 से 18 साल के बच्चों और युवाओं के आधार एनरोलमेंट के लिए भी इसी एक अहम दस्तावेज को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है.

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Mithilesh Kumar
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UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार ने बताया कि अथॉरिटी के पास हर दिन औसतन 75,000 नए आधार एनरोलमेंट आवेदन आते हैं, जिनमें से करीब 98% आवेदन 18 साल से कम उम्र के बच्चों के होते हैं. (Screenshots : YT/@AadhaarUIDAI)

UIDAI Considers Making Birth Certificate Mandatory for Children Five to 18 Years : आधार से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है और इसका सीधा असर देश के करोड़ों बच्चों और उनके पेरेंट्स पर पड़ने वाला है. अब तक जहां सिर्फ 0 से 5 साल के बच्चों के लिए आधार बनवाने में जन्म प्रमाण पत्र यानी बर्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य था, वहीं अब UIDAI इसे 18 साल तक के सभी बच्चों के लिए जरूरी करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. अगर यह प्रस्ताव लागू हो गया, तो आधार एनरोलमेंट के लिए बर्थ सर्टिफिकेट ही एकमात्र मान्य दस्तावेज होगा. इससे न सिर्फ पहचान प्रक्रिया और सख्त होगी, बल्कि फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी.

आधार बनवाने के लिए हर दिन आते हैं 75 हजार आवेदन: UIDAI

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित डेराइविंग मैक्सिमम इंपैक्ट आउट ऑफ आधार वर्कशॉप (Deriving Maximum Impact out if Aadhaar) में आधार जारी करने वाली संस्था UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार ने इस प्रस्ताव की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि UIDAI को हर दिन औसतन करीब 75 हजार नए आधार एनरोलमेंट आवेदन मिलते हैं. इनमें से लगभग 98 फीसदी आवेदन 18 साल से कम उम्र के बच्चों के होते हैं, जिनमें 0 से 5 साल और 5 से 18 साल के बच्चों की हिस्सेदारी लगभग बराबर, करीब 49-49% है.

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वहीं 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए रोजाना आने वाले आधार एनरोलमेंट आवेदन करीब 1,600 होते हैं, जो कुल आवेदनों का लगभग 2 फीसदी है. सालाना आधार पर यह संख्या करीब सवा दो करोड़ तक पहुंच जाती है, जो देश की सालाना जनसंख्या वृद्धि के लगभग बराबर मानी जाती है.

UIDAI प्रमुख ने साफ किया कि छोटे बच्चों के नाम में बदलाव को लेकर भी बर्थ सर्टिफिकेट को ही आधार बनाने की तैयारी है. कई बार माता-पिता बच्चों का नाम बदलना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए कोई ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं होता. ऐसे मामलों में अब वही नाम मान्य होगा जो बर्थ सर्टिफिकेट में दर्ज है और नाम बदलने के लिए भी जन्म प्रमाण पत्र ही जरूरी दस्तावेज माना जाएगा. इसका मकसद सिस्टम को पारदर्शी बनाना और गड़बड़ियों की गुंजाइश कम करना है.

पता और मोबाइल नंबर अपडेशन के सबसे ज्यादा मिलते हैं रिक्वेस्ट: UIDAI

वर्कशॉप में यह भी बताया गया कि आधार में सबसे ज्यादा बदलाव की मांग पते और मोबाइल नंबर को लेकर आती है. लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं या मोबाइल नंबर बदलते हैं, जिससे अपडेट की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा जन्म तिथि और नाम बदलने से जुड़ी हजारों रिक्वेस्ट भी हर दिन आती हैं. UIDAI के मुताबिक, सालभर में करीब 23 करोड़ अपडेट रिक्वेस्ट आती हैं, यानी रोजाना लगभग साढ़े सात लाख आवेदन.

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जन्म तिथि 1 और नाम 2 बार बदलने की है अनुमति

फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए UIDAI ने नियमों को और सख्त किया है. अब जन्म तिथि सिर्फ एक बार बदली जा सकती है, जबकि नाम बदलने की अनुमति सीमित संख्या में यानी दो बार दी गई है. बड़े नाम परिवर्तन के लिए गजट नोटिफिकेशन अनिवार्य किया गया है. इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से बायोमेट्रिक जांच को और मजबूत किया गया है, ताकि एक व्यक्ति एक से ज्यादा आधार न बनवा सके.

UIDAI अब ऑफलाइन दस्तावेजों से धीरे-धीरे दूरी बना रहा है और ऑनलाइन वेरिफिकेशन पर जोर दे रहा है. जन्म प्रमाण पत्र, सीबीएसई मार्कशीट, पैन, पासपोर्ट, मनरेगा और पीडीएस जैसे दस्तावेजों को अलग-अलग सरकारी डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है. देश के 35 राज्यों के जन्म प्रमाण पत्र सिस्टम पहले ही UIDAI से इंटीग्रेट हो चुके हैं, जिससे दस्तावेजों की तुरंत जांच संभव हो पा रही है.

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इसके अलावा UIDAI एक नया यूनिवर्सल क्लाइंट सॉफ्टवेयर भी लागू करने जा रहा है, जिसे अक्टूबर तक सभी एक लाख एनरोलमेंट मशीनों पर तैनात करने की तैयारी है. इसके जरिए QR कोड वाले दस्तावेजों को तुरंत स्कैन कर उनकी ऑनलाइन सत्यता जांची जा सकेगी, जिससे फर्जी दस्तावेजों पर पूरी तरह रोक लग सके.

UIDAI प्रमुख ने आधार की भूमिका को आम लोगों के सशक्तिकरण से जोड़ते हुए कहा कि आधार आने से पहले देश में करीब 25 करोड़ लोगों के पास कोई पहचान पत्र नहीं था. आधार ने उन्हें पहली पहचान दी और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उन तक पहुंचा. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सरकार अब तक आधार पर हुए खर्च के मुकाबले करीब 40 गुना ज्यादा बचत कर चुकी है.

वर्कशॉप में ऑथेंटिकेशन सिस्टम पर भी विस्तार से चर्चा हुई. UIDAI रोजाना करीब 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन करता है, जिनमें ओटीपी, बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन शामिल हैं. खास तौर पर फेस ऑथेंटिकेशन को ज्यादा सुरक्षित और आसान बताया गया, जिससे पेंशन जैसे मामलों में लोगों को घर बैठे सुविधा मिल रही है.

UIDAI का साफ कहना है कि आधार से जुड़ी सख्ती लोगों को असुविधा लग सकती है, लेकिन सिस्टम की विश्वसनीयता बनाए रखने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ये कदम जरूरी हैं. आने वाले समय में आधार एनरोलमेंट और अपडेट की प्रक्रिया और ज्यादा तकनीकी, सुरक्षित और पारदर्शी होने वाली है.

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