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उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में आधार कार्ड के उपयोग को लेकर बड़ी अपडेट. Photograph: (Express Photo)
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में अब लोग अपने जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार कार्ड का उपयोग नहीं कर पाएंगे, क्योंकि अब इस दस्तावेज़ को जन्म का प्रमाणपत्र मान्यता प्राप्त नहीं होगी. उत्तर प्रदेश योजना विभाग और महाराष्ट्र राज्य राजस्व विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि आधार कार्ड केवल पहचान दस्तावेज़ के रूप में मान्य होगा और इसे जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश योजना विभाग ने कहा कि वह आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र या जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं करेगा.
In Uttar Pradesh, Aadhaar cards will no longer be accepted as a birth certificate or proof of date of birth. The Planning Department has issued instructions to all departments. No birth certificate is attached to the Aadhaar card; therefore, it cannot be considered a birth… pic.twitter.com/uzinTdj8Yc
— ANI (@ANI) November 28, 2025
योजना विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने सभी विभागों को जारी आदेश में स्पष्ट किया कि “आधार कार्ड के साथ अगर कोई जन्म प्रमाण पत्र संलग्न नहीं है,तो इसे जन्म प्रमाण पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता.”
महाराष्ट्र का नया आदेश: आधार आधारित जन्म प्रमाण पत्र होंगे रद्द
महाराष्ट्र में राज्य राजस्व विभाग ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए कहा कि अगस्त 2023 में अधिनियम में संशोधन के बाद केवल आधार कार्ड के माध्यम से बनाए गए सभी जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिए जाएंगे. सरकार ने कहा कि राज्य में विलंबित जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए आधार कार्ड को दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
आदेश में कहा गया, “सरकार ने यह निर्णय नकली जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों के अवैध उद्देश्यों के लिए उपयोग को रोकने के लिए लिया है.”
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Maharashtra | Aadhaar card will not be considered as a document for making a delayed birth certificate in the state and all birth certificates made only through the Aadhaar card after August 2023 amendment in Act will be cancelled. The government has taken this decision to stop… pic.twitter.com/Pogz4sAD6Y
— ANI (@ANI) November 28, 2025
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आधार कार्ड का उपयोग कर जारी किए गए सभी संदिग्ध प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अब तक इन प्रमाण पत्रों को जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. राजस्व विभाग ने सभी तहसीलदारों, उप-जिलाधिकारी, जिला आयुक्त और संभागीय आयुक्तों को 16-पॉइंट सत्यापन दिशानिर्देश जारी किए हैं.
क्या ये आदेश SIR से जुड़े हैं?
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये आदेश फिलहाल चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े हैं या नहीं, लेकिन समयावधि इस ओर इशारा जरूर कर रही है. यूँ भी निर्वाचन आयोग (ECI) और SIR की प्रक्रिया के तरीके का विरोध कर रहे दलों के बीच आधार कार्ड की भूमिका को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है.
चुनाव आयोग ने बिहार में चल रहे SIR अभ्यास के दौरान नागरिकता साबित करने के दस्तावेजों की सूची में आधार कार्ड को शामिल नहीं किया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर आयोग ने इसे बाद में शामिल किया, लेकिन साफ़ किया कि इसे केवल पहचान प्रमाण के रूप में ही इस्तेमाल किया जाएगा.
जिस तरह दूसरे राज्यों में SIR सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के तहत है, राज्य सरकार भी धीरे-धीरे आधार को सिर्फ पहचान के दस्तावेज़ के रूप में ही मानने की दिशा में कदम बढ़ा रही है.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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