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Ayushman : आयुष्मान योजना में इलाज के नाम पर हो रही गड़बड़ी! अस्पतालों पर निगरानी करने की मांग

Ayushman Bharat : आयुष्मान योजना में इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही मनमानी को लेकर बीजेपी सांसद ने लोकसभा में मुद्दा उठाया. उन्होंने इम्पैनल्ड अस्पताल पर निगरानी करने की मांग की.

Ayushman Bharat : आयुष्मान योजना में इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही मनमानी को लेकर बीजेपी सांसद ने लोकसभा में मुद्दा उठाया. उन्होंने इम्पैनल्ड अस्पताल पर निगरानी करने की मांग की.

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FE Hindi Desk
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Ayushman Hoshangabad MP Darshan Singh Choudhary

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद से सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने लोकसभा में उठाया आयुष्मान का मुद्दा. (Image : Sansad TV/ANI Video Grab)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही आयुष्मान भारत योजना, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना माना जाता है, का उद्देश्य गरीबों और कमजोर वर्गों तक मुफ्त और आसान इलाज पहुंचाना है. लेकिन ज़मीन पर इसके लागू होने में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं. देशभर से ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि निजी अस्पताल योजना का फायदा मरीजों तक पहुंचाने के बजाय उससे कमाई का जरिया बना रहे हैं और इससे योजना की मूल भावना आहत हो रही है.

अक्सर देखा जा रहा है कि मरीज अस्पताल में भर्ती होते ही उनका पूरा कवरेज खत्म हो जाता है, लेकिन इलाज फिर भी पूरा नहीं होता. कहीं अस्पताल समय की मजबूरी का बहाना बनाकर आयुष्मान का लाभ देने से बचते हैं, तो कहीं कहा जाता है कि “यह बीमारी योजना में शामिल नहीं है.” कई अस्पताल मरीज से पैसा भी लेते हैं और सरकार से भी भुगतान. जिससे दोहरी वसूली के मामले सामने आए हैं. आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीज घंटों भटकते रहते हैं, जबकि योजना का मकसद था कि गरीब को बिना परेशानी इलाज मिले.

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इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में होशंगाबाद सीट से बीजेपी सांसद ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने कहा कि कई निजी अस्पताल जानबूझकर उपचार में देरी करते हैं ताकि मरीज मजबूरी में जेब से खर्च करे. कुछ अस्पताल अनावश्यक महंगे पैकेज दिखाकर पूरे 5 लाख रुपये तक का कवरेज एक ही मरीज पर खर्च कर देते हैं

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अस्पताल कार्ड स्वाइप करके फर्जी भर्ती और नकली बिलिंग कर रहे हैं. यह सब दिखाता है कि व्यवस्था मजबूत होने के बावजूद निगरानी कमजोर है और सुधार बेहद जरूरी है.

इस योजना के असफल होने के क्या कारण हैं?

इसकी असली वजह निजी अस्पतालों का एकाधिकार है. वे या तो यह दिखावा करते हैं कि फलां बीमारी कवर नहीं होती... फिर उन पर दबाव डाला जाता है... वे मरीज़ों के साथ-साथ सरकार से भी पैसा लेते हैं. इस योजना को पारदर्शिता के साथ लागू किया जाना चाहिए.

कुछ लोग इस योजना की आलोचना करते हुए कहते हैं कि यह निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है. उनका कहना है कि सरकार को यह पैसा सरकारी अस्पतालों के विकास पर खर्च करना चाहिए था.

महामारी के दौरान हमने सरकारी अस्पतालों की अहमियत देखी है. सरकारी अस्पतालों का आधुनिकीकरण सरकार की ज़िम्मेदारी है और वह ऐसा कर भी रही है. लेकिन निजी स्वास्थ्य सेवा भी है. यह सराहनीय है कि सरकार ने सोचा कि जिन लोगों को निजी स्वास्थ्य सेवा पर भरोसा है, उन्हें इसकी सुविधा मिलनी चाहिए. लेकिन सरकार को निजी स्वास्थ्य सेवा की उचित निगरानी की ज़िम्मेदारी तय करनी चाहिए.

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सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए?

स्थानीय स्तर पर एक समिति होनी चाहिए जिसमें स्थानीय लोग, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हों. इसमें आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी भी शामिल हो सकते हैं. समिति योजना के क्रियान्वयन की निगरानी करे.

योजना में शामिल बीमारियों की प्रकृति स्पष्ट होनी चाहिए. कई बार मरीज़ों को एक ही बीमारी के अलग-अलग नामों को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसके लिए उचित दिशानिर्देश होने चाहिए... अस्पतालों को इसे प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए कहा जाना चाहिए.

प्रशासन को बिचौलियों पर भी नकेल कसनी चाहिए.

गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों पर होनी चाहिए कार्रवाई?

इस योजना के तहत मरीजों को मना करने वाले अस्पतालों के लिए सजा का प्रावधान होना चाहिए. अस्पतालों के लिए योजना के प्रावधानों को और कड़ा किया जाना चाहिए.

लोकसभा में बीजेपी सांसद ने आयुष्मान योजना को लेकर व्यवस्था मजबूत और इसके तहत आने वाले अस्पतालों की निगरानी और जरूरी सुधार की मांग की. उन्होंने आयुष्मान योजना के इम्पैनल्ड अस्पतालों के लिए मॉनिटरिंग और रैकिंग सिस्टम लागू करने की मांग की. उन्होंने इलाज के नाम पर इन अस्पलातों द्वारा फेक बिलिंग और गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों के खिलाफ दंड निलंबन की व्यवस्था की मांग भी की.

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