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गुजरात के बनासकांठा से कांग्रेस सांसद जेनीबेन नगाजी ठाकोर ने आयुष्मान भारत योजना को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे. (Screenshots : PMJAY, Samsad TV)
Ayushman Bharat Yojana Alert : आयुष्मान भारत योजना यानी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में फर्जी रजिस्ट्रेशन और गलत दावों जैसी गड़बड़ियों को लेकर संसद में गंभीर सवाल उठे. गुजरात के बनासकांठा से कांग्रेस सांसद जेनीबेन नगाजी ठाकोर (Banaskantha Congress MP Geniben Nagaji Thakor) ने सरकार से पूछा कि क्या राज्यों से फर्जी कार्ड, फर्जी इलाज के दावे, कार्ड के दुरुपयोग और अस्पताल बिलों में गड़बड़ियों की शिकायतें मिली हैं. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पिछले तीन वर्षों में खासकर गुजरात सहित देशभर में ऐसे कितने मामले दर्ज हुए हैं और सरकार ने दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है. इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या सरकार आयुष्मान कार्ड सिस्टम को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए कोई नई व्यवस्था लागू करने जा रही है.
आयुष्मान भारत योजना की AI से हो रही निगरानी
स्वास्थ्य मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव (Prataprao Jadhav) ने जवाब दिया कि आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में किसी भी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाती. यानी जीरो टॉलरेंस के साथ सरकार योजना पर काम करती है. इसके लिए सरकार ने नेशनल हेल्थ अथॉरिटी में नेशनल एंटी-फ्रॉड यूनिट (NAFU) बनाई है, जो एआई और मशीन लर्निंग से चलने वाले सिस्टम की मदद से हर क्लेम की जांच करती है.
संसद में सरकार ने कहा कि आयुष्मान योजना की निगरानी के लिए बनाया गया ये खास सिस्टम खुद ही उन मामलों को पकड़ लेता है, जहां एक ही मरीज का क्लेम दो बार दाखिल किया गया हो, इलाज को जरूरत से ज्यादा दिखाया गया हो, या मरीज की पहचान का गलत इस्तेमाल हुआ हो. इसके अलावा, धोखाधड़ी रोकने की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नियमित तौर पर ट्रेनिंग और वर्कशॉप आयोजित की जाती हैं, ताकि राज्य और जिला स्तर तक पूरी टीम इस तरह की गड़बड़ियों को समय रहते पहचान सके.
फ्रॉड करने वालों पर सरकार सख्त
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय एंटी-फ्रॉड यूनिट (NAFU) राज्यों में बनी स्टेट एंटी-फ्रॉड यूनिट (SAFU) के साथ मिलकर आयुष्मान योजना में होने वाले हर तरह के फर्जीवाड़े की जांच करती है. AI सिस्टम जब किसी क्लेम या रजिस्ट्रेशन को संदिग्ध बताता है, तो उसे जांच के लिए संबंधित राज्य के स्वास्थ्य प्राधिकरण के पास भेज दिया जाता है. जांच में गड़बड़ी साबित होने पर सरकार सख्त कार्रवाई करती है, जिसमें अस्पतालों को सस्पेंड करना, नोटिस थमाना, वार्निंग जारी करना, अस्पताल को आयुष्मान योजना से बाहर यानी डी-एम्पैनल्ड करना, फर्जी ई-कार्ड बंद करना, भारी जुर्माना लगाना और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज करना शामिल है.
फ्रॉड करने वालों पर 231 करोड़ का लगा जुर्माना
इन मामलों की जांच राज्य स्तर पर बनी स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट के साथ मिलकर की जाती है और गड़बड़ी साबित होने पर कड़ी कार्रवाई की जाती है. सरकार के मुताबिक 15 नवंबर 2025 तक 1184 अस्पतालों को योजना से बाहर किया जा चुका है, 411 अस्पताल निलंबित किए गए हैं और गड़बड़ी करने वालों पर कुल 231.88 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
कई फेज की चांज के बाद जारी होता है आयुष्मान कार्ड
मंत्री ने बताया कि आयुष्मान कार्ड बनाने से पहले आधार जानकारी, नाम, उम्र, लिंग और ई केवाईसी सहित कई स्तरों पर जांच की जाती है. ई केवाईसी पूरी होने पर ही कार्ड जारी किया जाता है. लाभार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई है. इसमें हर स्तर पर नोडल अधिकारी और समितियां नियुक्त की गई हैं. कोई भी लाभार्थी सीजीआरएमएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकता है या चौबीसों घंटे काम करने वाली हेल्पलाइन 14555 पर फोन कर सकता है.
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