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Samrat Choudhary Tarapur Chunav Result : बीजेपी के सम्राट चौधरी तारापुर की अहम सीट पर आरजेडी के अरुण शाह से सीधी टक्कर ले रहे हैं. (Image: FE)
BJP Samrat Choudhary in Tarapur Constituency Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुंगेर जिले की तारापुर सीट इस समय सबसे हॉटस्ट सीटों में है. कुशवाहा बहुल इलाके में हो रहा यह मुकाबला सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच की लड़ाई नहीं, बल्कि राज्य की भविष्य की सियासत का भी पैमाना बन गया है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और ओबीसी राजनीति के प्रमुख चेहरे सम्राट चौधरी 15 साल बाद मैदान में लौटे हैं, जिससे तारापुर उनकी राजनीतिक वापसी की सबसे अहम परीक्षा बन गई है.
दूसरी तरफ आरजेडी के अरुण शाह हैं, जिन्होंने 2021 के उपचुनाव में मात्र 3,800 से ज्यादा वोटों से हार झेली थी और इस बार बदला चुकाने की पूरी तैयारी के साथ उतरे हैं. इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में जन सुराज पार्टी के संतोष कुमार सिंह ने तीसरा मोर्चा जोड़कर समीकरण और पेचीदा कर दिए हैं.
तारापुर क्यों है इतना अहम
तारापुर विधानसभा सीट जमुई लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और आर्थिक रूप से खेती तथा परदेस में काम करने वाले प्रवासियों की मेहनत पर टिकी है. यहां सिंचाई, बेरोजगारी, ग्रामीण सड़कें और बाढ़ नियंत्रण जैसी समस्याएं चुनावी मुद्दों में सबसे ऊपर हैं. इस सीट का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है. जदयू छह बार, कांग्रेस पांच बार, आरजेडी तीन बार और अन्य दल एक-एक बार यहां से जीत चुके हैं. 2025 में आरजेडी-कांग्रेस-लेफ्ट-विआइपी वाला महागठबंधन और भाजपा-जदयू-लोजपा(रामविलास)-हम-आरएलएम वाला एनडीए आमने-सामने है. यही वजह है कि तरापुर को इस चरण की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक माना जा रहा है.
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मतगणना के ताजा रुझानों में तारापुर सीट पर सम्राट चौधरी 22,738 वोटों की बढ़त के साथ आगे चल रहे हैं. 18 राउंड की गिनती के बाद बीजेपी के सम्राट चौधरी को 74,435 वोट मिले हैं, जबकि आरजेडी उम्मीदवार अरुण कुमार को 49,059 मत प्राप्त हुए हैं.
तारापुर का सामाजिक गणित
तारापुर की असल राजनीति इसके जातीय समीकरणों से तय होती है. यहां लगभग 63,000 यादव, 20,000 मुस्लिम मतदाता, 50,000 सवर्ण (राजपूत, ब्राह्मण), 40,000 कुशवाहा, 35,000 साह और 28,000 दलित हैं. यह सामाजिक मिश्रण इस सीट को पूरी तरह जाति-संवेदनशील बनाता है, जहां थोड़ी-सी भी राजनीतिक पारी पलटने की क्षमता रखती है.
जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ेगी, यह तय होगा कि तरापुर में ओबीसी की गोलबंदी के सहारे भाजपा की राह आसान होगी या आरजेडी का मजबूत जमीनी नेटवर्क और पिछली हार की कसर पूरी कर पाएगा. तीसरे मोर्चे का असर भी इस बार निर्णायक साबित हो सकता है.
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