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Bihar election 2025 exit polls: पिछली बार एग्जिट पोल्स क्या कहते हैं . Photograph: (Canva)
Bihar Election 2025: बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से बची 122 सीटों पर आज शाम 6 बजे तक मतदान होगा. बिहार की राजनीति में यह मुकाबला बहुत ही रोमांचक और कड़ा होगा. पहले चरण में 6 नवंबर को ऐतिहासिक 64.66% वोटिंग हुई थी.
इस चरण में मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन (एमजीबी) के बीच देखा जा रहा है. कई क्षेत्रों में यह मुकाबला इतना जबरदस्त है क्योंकि यहाँ कई बार जीत का अंतर बेहद कम रहा है. वहीं, कुछ सीटें ऐसी हैं जो उम्मीदवारों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही हैं.
बिहार की स्विंग सीटें
अमेरिका में स्विंग स्टेट्स का एक कांसेप्ट होता है. स्विंग स्टेट्स क्या होते हैं? नाम से ही पता चलता है, ये वे राज्य होते हैं जिनकी वोटिंग वफादारी समय-समय पर बदलती रहती है. कभी ये डेमोक्रेट्स का समर्थन करते हैं, तो अगले चुनाव में रिपब्लिकन्स के साथ चले जाते हैं, इसलिए इन्हें स्विंग स्टेट्स कहा जाता है.
अमेरिका और बिहार के चुनाव बिलकुल समान नहीं हैं, लेकिन स्विंग सीटों की अवधारणा दोनों में देखने को मिलती है. बिहार में कुछ ऐसी सीटें हैं, जहाँ के मतदाताओं ने पोलिटिकल नेरेटिव्स, पोलिटिकल वेव्स या नार्मल फ्लो को न मानकर अपनी पसंद दिखाई है. ये सीटें दोनों पक्षों के लिए बहुत अहम हैं, क्योंकि अपने मजबूत क्षेत्रों के अलावा इन सीटों को जीतने से उनकी संख्या बढ़ती है और सत्ता में आने के अवसर मजबूत होते हैं.
बिहार की 15 प्रमुख स्विंग सीटें
1. बरबीघा:
2020 में जेडीयू के सुदर्शन कुमार ने कांग्रेस को केवल 113 वोट के मामूली अंतर से हराकर यह सीट जीती थी. इससे पहले 2015 में उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में यह सीट 15,717 वोट के बड़े अंतर से जीती थी. इस बार उनका सामना कांग्रेस के नेता त्रिशूलधारी सिंह से है. इस पैटर्न से लगता है कि इस सीट पर कांग्रेस की थोड़ी वफादारी तो है, लेकिन बहुत मजबूत नहीं है. 2020 का चुनाव इस बात का उदाहरण है कि इस “ग्रैंड-ओल्ड पार्टी” के लिए इसे फिर से जीतना आसान नहीं है.
पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में, एनडीए की भाजपा ने इस सीट पर 29,072 वोट के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी.
2. बछवारा:
इस सीट पर महागठबंधन के भीतर दोस्ताना मुकाबला देखा जा रहा है. कांग्रेस ने अपनी युवा इकाई के नेता प्रकाश गरीब दास को मैदान में उतारा है, जबकि CPI के पूर्व विधायक अवधेश रॉय भी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा के सुरेंद्र मेहता इस सीट से वर्तमान विधायक हैं.
सुरेंद्र मेहता ने 2020 में यह सीट जीती थी, जो 2015 से कांग्रेस के पास थी.
3. भोरे:
2020 में जेडीयू के सुनील कुमार ने कांग्रेस के अनिल कुमार और CPI(ML) के जितेंद्र पासवान को केवल 462 वोट के मामूली अंतर से हराकर यह सीट जीती थी. इस बार भी भोरे में एनडीए और लेफ्ट के बीच सीधा मुकाबला होगा. 2015 में यह सीट अनिल कुमार के पास थी, जिन्होंने इसे 74,365 वोट के अंतर से जीता था.
इस बार लेफ्ट के धनंजय और सुनील कुमार के बीच मुकाबला कड़ा और तनावपूर्ण माना जा रहा है.
4. रामगढ़:
RJD के सुधाकर सिंह ने इस सीट को 189 वोट के मामूली अंतर से जीता था. उनकी सबसे करीबी प्रतिद्वंदी बीएसपी की अंबिका सिंह यादव थीं. 2015 में यह सीट भाजपा के अशोक कुमार सिंह के पास थी. इस बार कुमार का मुकाबला RJD के अजीत कुमार से है. यह देखने लायक होगा कि RJD इस सीट को बरकरार रख पाता है या भाजपा को यह मिल जाती है.
5. चकाई:
चकाई के मतदाताओं ने 2020 में स्वतंत्र उम्मीदवार सुमित कुमार सिंह को चुना था, जिन्होंने RJD की सावित्री देवी को केवल 581 वोट के अंतर से हराया. 2015 में सावित्री देवी ने सुमित कुमार सिंह (स्वतंत्र) को 12,113 वोट के अंतर से हराया था. इस बार दोनों फिर से चुनाव मैदान में हैं. इस बार यहाँ तीसरे उम्मीदवार के रूप में जन सुधार पार्टी के राहुल कुमार भी है.
6. कुढ़नी:
यह एक सुपर-स्विंग सीट है, जिसने 2022 में उपचुनाव भी देखा. RJD के अनिल कुमार साहनी यहाँ के वर्तमान विधायक हैं, जिन्होंने 2020 में जीत हासिल की थी.
2015 में भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता ने इस सीट को जीता था. इस बार मुकाबला भाजपा के केदार गुप्ता, RJD के सुनील कुमार सुमन और JSP के मोहम्मद अली इरफ़ान के बीच है.
7. डेहरी:
2020 में यहाँ RJD के फते बहादुर सिंह ने BJP के सत्यनारायण सिंह को केवल 464 वोट के अंतर से हराया था. इससे पाँच साल पहले, 2015 में RJD के मोहम्मद इलियास हुसैन ने यह सीट जीती थी.
हालांकि, इस बार NDA ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राजीव रंजन सिंह को RJD के गुड्डू कुमार चंद्रवंशी के खिलाफ मैदान में उतारा है.
8. बखरी:
2015 के चुनाव के बाद यह सीट RJD के उपेंद्र पासवान के पास थी, जिसे 2020 में CPI के सूर्यकांत पासवान ने जीत लिया. उन्होंने BJP के रामशंकर पासवान को हराया था.
इस बार पासवान फिर चुनाव में हैं और उनके मुकाबले में LJP (RV) के संजय कुमार हैं.
9. मटिहानी:
2020 में LJP ने बिहार चुनाव अकेले लड़ा था और मटिहानी उन कुछ सीटों में से एक थी जिसे उसने जीता. इसके उम्मीदवार राज कुमार सिंह ने JD(U) के नरेंद्र कुमार सिंह को केवल 333 वोट के अंतर से हराया था.
राज कुमार सिंह उस समय मौजूदा विधायक थे, क्योंकि उन्होंने 2015 में अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सर्वेश कुमार (BJP) को हराकर यह सीट जीती थी. बिहार चुनाव 2025 में फिर मुकाबला JD(U) के राज कुमार सिंह और RJD के नरेंद्र कुमार सिंह के बीच है.
10. हिलसा:
RJD के नेता अत्रि मुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव ने 2015 में यह सीट जीती थी. 2020 में यह सीट JD(U) के हाथ चली गई जब कृष्णमुरारी शरण, जिन्हें प्रेम मुखिया के नाम से जाना जाता है, ने यादव को हराया.
दोनों फिर से राज्य की एक महत्वपूर्ण और ज़बरदस्त लड़ाई में आमने-सामने हैं.
11. हरलाखी:
2010 में JD(U) के शालिग्राम यादव ने यह सीट जीती थी, जबकि 2015 में BLSP के बसंत कुमार ने इसे अपने नाम किया. 2020 के चुनाव में यह सीट JD(U) के सुधांशु शेखर ने जीती थी. इस बार सुधांशु शेखर JD(U) से चुनाव लड़ रहे हैं और उनका मुकाबला CPI के राकेश कुमार पांडे से है.
12. चेनारी:
2010 के बिहार चुनाव में JD(U) के श्याम बिहारी राम ने यह सीट जीती थी. 2015 में BLSP के ललन पासवान ने इसे जीता. वहीं 2020 में यह सीट फिर बदल गई और कांग्रेस के मुरारी प्रसाद गौतम ने इसे जीत लिया.
इस बार मुकाबले में राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) की आशा पासवान, कांग्रेस के मंगल राम और LJP (RV) के मुरारी प्रसाद गौतम शामिल हैं.
13. वाल्मीकि नगर:
2010 में JD(U) के राजेश सिंह ने यह सीट जीती थी, लेकिन 2015 में स्वतंत्र उम्मीदवार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने सभी को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की. बाद में उन्होंने JDU में शामिल होकर पिछले विधानसभा चुनाव में यह सीट जीती. इस बार सिंह फिर से मैदान में हैं और उनका मुकाबला कांग्रेस के सुरेंद्र यादव से है.
14. गोविंदगंज:
2010 में JD(U) की नेता मीना द्विवेदी ने यह सीट जीती थी, लेकिन 2015 में यह सीट चिराग पासवान की LJP के पास चली गई. 2020 में BJP के सुनील मणि तिवारी ने यहाँ से चुनाव जीता. इस बार LJP (RV) के राजू तिवारी, कांग्रेस के शशि भूषण सिंह और जन सुधार पार्टी के कृष्ण कांत मिश्रा भी इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.
15. वारिसलीगंज :
बिहार की एक अहम सीट वारिसलीगंज 2010 में JD(U) के प्रदीप कुमार के पास थी. 2015 में यह सीट BJP की अरुणा देवी के पास चली गई, जिन्होंने 2020 में भी भाजपा के टिकट पर इसे जीता. इस बार यहाँ RJD के अनित का मुकाबला भाजपा की वर्तमान विधायक अरुणा देवी से है.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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