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सुप्रीम कोर्ट का बिहार वोटर वेरिफिकेशन पर रोक लगाने से इनकार, लेकिन चुनाव आयोग से मांगे 3 सवालों के जवाब

Supreme Court : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मामले में याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग का पक्ष सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

Supreme Court : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मामले में याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग का पक्ष सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

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FE Hindi Desk
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निर्वाचन आयोग के अनुसार समय के साथ-साथ मतदाता सूची में नामों को शामिल करने या हटाने के लिए उनका पुनरीक्षण आवश्यक है. (ANI)

Bihar Voter List : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मामले में याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.  कोर्ट ने आयोग से प्रूफ के तौर पर आधार, वोटर कार्ड और राशन कार्ड को शामिल करने को कहा, जिसका आयोग ने विरोध किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आपको रोक नहीं रहे हैं. हम आपसे कानून के तहत एक्ट करने के लिए कह रहे हैं. जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में क्‍या क्‍या हुआ. 

चुनाव आयोग : आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक मतदाता को भारतीय नागरिक होना चाहिए और आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है. इस बीच, पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों की इस दलील को खारिज कर दिया कि निर्वाचन आयोग के पास बिहार में ऐसी किसी कवायद का अधिकार नहीं है.  पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग जो कर रहा है वह संविधान के तहत आता है और पिछली बार ऐसी कवायद 2003 में की गयी थी.

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सुप्रीम कोर्ट : क्‍या अब देर नहीं हो गई

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के समय पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से कहा कि आपको पहले ही कदम उठाना चाहिए था, अब थोड़ी देर हो चुकी है. हालांकि, उसने इस दलील को खारिज कर दिया कि आयोग के पास इस कवायद को करने का कोई अधिकार नहीं है. न्यायालय ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण की कवायद महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो लोकतंत्र की जड़ों से जुड़ा है और यह मतदान के अधिकार से संबंधित है.

कपिल सिब्बल ने क्‍या कहा 

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर BLO को ये पावर दिया गया है कि वो तय करें कि कोई भारत का नागरिक है या नहीं. केंद्र सरकार तय करेगी कि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक है या नहीं. चुनाव आयोग ये तय नहीं कर सकता.

आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं

भारत निर्वाचन आयोग ने इस कवायद को न्यायोचित ठहराया और कहा कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है. न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में दस्तावेजों की सूची में आधार कार्ड पर विचार न करने को लेकर सवाल किया और कहा कि निर्वाचन आयोग का किसी व्यक्ति की नागरिकता से कोई लेना-देना नहीं है और यह गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है.

चुनाव आयोग ने कहा कि एक बार फॉर्म अपलोड हो जाने के बाद इस इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि डेटाबेस तैयार हो चुका होगा. हम मतदान केंद्रों की संख्या 1500 से घटाकर 1200 करना चाहते हैं. आवास प्रमाण पत्र और पहचान पत्र पर गौर किया जाएगा. आधार देश के सभी नागरिकों के लिए है, ना कि सिर्फ नागरिकता के लिए. आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है बल्कि यह पहचान का प्रूफ है. 

तीन सवालों का जवाब

याचिकाकर्ताओं की दलीलों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग को तीन सवालों का जवाब देना होगा, क्योंकि बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया लोकतंत्र की जड़ से जुड़ी है और यह मतदान के अधिकार से संबंधित है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से 3 मुद्दों पर जवाब मांगा कि क्या उसके पास मतदाता सूची में संशोधन करने, अपनायी गयी प्रक्रिया और कब यह पुनरीक्षण किया जा सकता है, उसका अधिकार है. 

पुनरीक्षण आवश्यक

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि समय के साथ-साथ मतदाता सूची में नामों को शामिल करने या हटाने के लिए उनका पुनरीक्षण आवश्यक होता है और एसआईआर ऐसी ही कवायद है. उन्होंने पूछा कि अगर चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची में संशोधन का अधिकार नहीं है तो फिर यह कौन करेगा? बहरहाल, निर्वाचन आयोग ने आश्वस्त किया कि किसी को भी अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा.