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बिहार और उत्तर प्रदेश में कई लाभार्थियों के लिए एक ही फोटो का इस्तेमाल किया गया. (Photo: CAG Report | Enhanced for clarity with AI)
CAG on gaps in Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana scheme : बैंक खाते के नंबर के नाम पर “11111111111” दर्ज होना, कई-कई लाभार्थियों के लिए एक ही फोटो का इस्तेमाल, 34 लाख से ज़्यादा उम्मीदवारों का भुगतान अब तक अटका होना, और ट्रेनिंग सेंटरों का बंद पड़ा मिलना, ये कुछ चौंकाने वाली गड़बड़ियां हैं, जो केंद्र सरकार की स्किल ट्रेनिंग स्कीम प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana - PMKVY) में कॉम्प्ट्रोलर ऐंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया यानी सीएजी (CAG) को मिली हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि यह इनवेस्टिगेशन 2015 से 2022 के बीच स्कीम के तीन फेज को लेकर की गई.
CAG की ये गंभीर टिप्पणियां गुरुवार को लोकसभा में पेश की गई ऑडिट रिपोर्ट में सामने आईं. ये इसलिए अहम हैं क्योंकि बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए पीएम कौशल विकास योजना यानी PMKVY सरकार की सबसे बड़ी पहलों में से एक रही है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मई 2025 में 15 से 29 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर करीब 15 फीसदी रही. PMKVY की शुरुआत जुलाई 2015 में इस मकसद से की गई थी कि बड़ी संख्या में युवा उद्योगों से जुड़े कौशल सीख सकें और उन्हें सर्टिफिकेट मिल सके.
2015 से 2022 के बीच इसके तीन फेज पर कुल मिलाकर करीब 14,450 करोड़ रुपये खर्च किए गए. लक्ष्य था 1.32 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन देना. पहला फेज 2015-16 में, दूसरा 2016-20 के दौरान और तीसरा 2021-22 में चला. इस पूरे समय में करीब 1.1 करोड़ उम्मीदवारों को सर्टिफाई किया गया.
CAG की जांच के दौरान ये भी सामने आया कि स्किल इंडिया पोर्टल (Skill India Portal - SIP) पर दर्ज कई उम्मीदवारों के बैंक खातों में भारी गड़बड़ियां थीं. यह खुलासा उम्मीदवारों की डिजिटल आईडी और कॉन्टैक्ट डिटेल की ऑडिट के दौरान हुआ. सीएजी की जांच में सामने आया कि PMKVY 2.0 और 3.0 से जुड़े डेटा के एलालिसिस में भारी स्तर पर गड़बड़ियां थीं.
सीएजी की ऑडिट के मुताबिक, कुल 95.9 लाख पार्टिसिपेंट्स में से 90.66 लाख लोगों के रिकॉर्ड में बैंक खाते की जानकारी या तो शून्य (zero) दर्ज थी, या ‘Null’, ‘N/A’ लिखी हुई थी, या फिर यह कॉलम खाली ही छोड़ दिया गया था. यानी करीब 94.5 फीसदी मामलों में बैंक खाते की कोई ठोस जानकारी मौजूद ही नहीं थी.
बचे हुए 5.24 लाख उम्मीदवारों के मामलों में भी स्थिति बेहतर नहीं थी. इनमें सिर्फ 12,122 अलग-अलग बैंक अकाउंट नंबर, 52,381 उम्मीदवारों के लिए दो या उससे ज्यादा बार दोहराए गए पाए गए.
CAG ने यह भी कहा कि जिन मामलों में एक उम्मीदवार के लिए एक ही बैंक खाता (कुल 4.72 लाख यूनिक अकाउंट) दिखाया गया था , वहां भी बड़ी संख्या में बैंक अकाउंट नंबर साफ तौर पर गलत पाए गए. इनमें कहीं ‘11111111111’ या ‘123456’ जैसे नंबर दर्ज थे, कहीं सिर्फ एक अंक वाला अकाउंट नंबर लिखा था, और कई जगह तो अकाउंट नंबर की जगह नाम, पता, साधारण टेक्स्ट या स्पेशल कैरेक्टर तक भर दिए गए थे.
ऑडिट रिपोर्ट में CAG ने साफ तौर पर कहा कि PMKVY 2.0 और 3.0 के डेटा में बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी इतनी कमजोर है कि इससे स्कीम के लाभार्थियों की पहचान पर भरोसा नहीं किया जा सकता.
रिपोर्ट में मंत्रालय की मई 2023 में दी गई सफाई का भी जिक्र है. मंत्रालय ने कहा कि शुरुआत में स्किल इंडिया पोर्टल (Skill India Portal - SIP) पर बैंक खाते की जानकारी भरना अनिवार्य था, लेकिन जमीनी स्तर पर आ रही दिक्कतों के चलते बाद में इसे अनिवार्य नहीं रखा गया.
मंत्रालय ने यह भी तर्क दिया कि उम्मीदवारों को भुगतान आधार (Aadhaar) से जुड़े बैंक खातों में किया जाना था. चूंकि आधार से लिंक बैंक अकाउंट में पैसा सीधे भेजा जाता है, इसलिए अलग से बैंक अकाउंट नंबर लेने की जरूरत नहीं समझी गई.
सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया है कि उसने मंत्रालय की सफाई की सच्चाई परखने के लिए 2023 में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के ज़रिए किए गए भुगतानों का गहराई से विश्लेषण किया. ऑडिट में सामने आया कि PMKVY 2.0 और 3.0 के तहत प्रमाणित उम्मीदवारों में से सिर्फ 24.53 लाख लोगों यानी करीब 25.6 फीसदी के लिए ही DBT भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई. इनमें से भी भुगतान सिर्फ 17.69 लाख उम्मीदवारों यानी महज 18.4 फीसदी के खातों में ही सफल हो सका.
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय ने अक्टूबर 2024 में जानकारी दी थी कि कुल 95.91 लाख उम्मीदवारों में से 61.14 लाख लोगों यानी करीब 63.75 फीसदी को DBT के जरिए भुगतान किया जा चुका है. लेकिन रिपोर्ट यह भी साफ कहती है कि अधूरी और कमजोर जानकारी के चलते 34 लाख से ज़्यादा प्रमाणित उम्मीदवारों को अब तक पैसा नहीं मिल पाया है जबकि PMKVY के संबंधित फेज खत्म हुए काफी वक्त बीत चुका है.
इसके अलावा, मंत्रालय यह बताने में भी नाकाम रहा कि इन उम्मीदवारों को भुगतान दिलाने के लिए क्या प्रयास किए गए, खासकर उन लोगों के लिए जिनके रिकॉर्ड में बैंक अकाउंट की जानकारी दर्ज ही नहीं थी.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि CAG ने एक ऑनलाइन लाभार्थी सर्वे कराया, लेकिन उसमें भी भारी खामियां दिखीं.
करीब 36.5 फीसदी ईमेल (1,581 ईमेल) तो उम्मीदवारों तक पहुंचे ही नहीं. जिन मामलों में ईमेल डिलीवर हुआ, वहां भी सिर्फ 3.95 फीसदी उम्मीदवारों (171 लोग) ने जवाब दिया. हैरानी की बात यह रही कि इन 171 जवाबों में से 131 जवाब एक ही ईमेल ID से आए, या फिर वे ट्रेनिंग पार्टनर्स और ट्रेनिंग सेंटर्स की ईमेल आईडी से भेजे गए थे. यानी असली लाभार्थियों की भागीदारी बेहद कम रही.
CAG की ऑडिट में यह भी पता चला कि योजना के तहत चल रहे कई ट्रेनिंग सेंटर बंद पड़े थे. मसलन, बिहार में बंद मिले तीन सेंटरों में से एक - बांका जिले में स्थित - के बारे में स्किल इंडिया पोर्टल के डेटा में यह दर्ज था कि वहां की दो बैचों की ट्रेनिंग उसी दिन चल रही थी, जिस दिन CAG की टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई मामलों में ऐसे नियोक्ताओं द्वारा स्किल सर्टिफिकेशन दिया गया, जो बेस्ट इन क्लास की कैटेगरी में आने लायक ही नहीं थे.
इसके अलावा, ट्रेनिंग से जुड़े फोटो सबूतों में भी गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं. उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और राजस्थान में एक ही तस्वीर को कई-कई लाभार्थियों के लिए इस्तेमाल किया गया, जिससे ट्रेनिंग की सच्चाई पर सवाल खड़े हो गए.
स्कीम को सही तरीके से लागू करने में इन जानकारियों की अहमियत बताते हुए सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया कि स्किल इंडिया पोर्टल पर उम्मीदवारों का रजिस्ट्रेशन करते समय मोबाइल नंबर, बैंक खाता नंबर और ईमेल ID जैसी संपर्क जानकारियाँ भरना अनिवार्य था, ताकि उम्मीदवार की डिजिटल पहचान तय हो सके और उससे संपर्क बना रहे.
इसके अलावा, PMKVY की गाइडलाइंस में यह भी साफ लिखा था कि उम्मीदवार के पास वैध बैंक खाता होना चाहिए.
अगर किसी उम्मीदवार के पास बैंक खाता नहीं होता, तो नियमों के मुताबिक परियोजना लागू करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी थी कि वह उम्मीदवार को खाता खुलवाने में मदद करे और दाखिले के समय उसकी सही बैंक जानकारी आईटी सिस्टम में दर्ज करे.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उम्मीदवारों के बैंक खाते का सही तरीके से मैप होना बेहद ज़रूरी था, क्योंकि गाइडलाइंस के तहत हर प्रमाणित उम्मीदवार को DBT के जरिए 500 रुपये देने का प्रावधान था.
CAG की इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, इंडियन एक्सप्रेस की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्रालय ने एक बयान जारी किया. मंत्रालय ने कहा कि उसने स्कीम को काफी हद तक बेहतर किया है और पिछले एक्सपीरियंस व कमियों से सीख लेते हुए पॉजिटिव कदम उठाए गए हैं, ताकि जवाबदेही और सख्त हो सके.
मंत्रालय के मुताबिक, अब यह योजना टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी, आधार से प्रमाणित ई-केवाईसी, बेहतर रेगुलेटरी निगरानी और स्किल इंडिया डिजिटल हब (Skill India Digital Hub) के जरिए चलाई जा रही है, जिससे डेटा एक जगह उपलब्ध हो, पारदर्शिता बढ़े और लाभार्थियों पर बेहतर नजर रखी जा सके.
मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब फेस ऑथेंटिकेशन और जियो-टैग्ड अटेंडेंस को अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ ही लाइव अटेंडेंस डैशबोर्ड शुरू किया गया है और सेंट्रल कम्युनिकेशन लेयर (CCL) के जरिए उम्मीदवारों से फीडबैक लेकर कोर्स में लगातार सुधार किया जा रहा है.
अन्य कदमों का ज़िक्र करते हुए मंत्रालय ने कहा कि अब QR कोड वाले डिजिटल सर्टिफिकेट के ज़रिए सर्टिफिकेशन की जांच और मज़बूत की गई है. वहीं, भुगतान से पहले सख्त सत्यापन लागू कर वित्तीय जवाबदेही भी बढ़ाई गई है.
इसके अलावा, कौशल समीक्षा केंद्र (Kaushal Samiksha Kendra) के माध्यम से बड़े पैमाने पर वर्चुअल और फिज़िकल निरीक्षण किए जा रहे हैं. नए मॉनिटरिंग नियम, तय पेनल्टी फ्रेमवर्क और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत नियम तोड़ने वालों पर निलंबन, ब्लैकलिस्टिंग और पैसे की वसूली तक की कार्रवाई की जा रही है.
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