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Census 2027 : जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर, हर आदमी की गिनती पर खर्च होंगे 82 रुपये?

Census 2027 : केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह जनगणना दो फेज में होगी.

Census 2027 : केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह जनगणना दो फेज में होगी.

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FE Hindi Desk
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Census 2027 Budget

देश में आखिरी जनगणना साल 2011 में कराई गई थी. (Screenshots : X/@AshwiniVaishnaw)

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह जनगणना दो फेज में होगी. जनगणना 2027 देश की 16वीं जनगणना होगी और आजादी के बाद 8वीं बार यह प्रक्रिया की जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत की जनगणना दुनिया की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय कवायद मानी जाती है.

इस बार जनगणना में जातिगत गणना (Caste Enumeration) भी शामिल की जाएगी. खास बात यह है कि यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेटा मोबाइल ऐप के जरिए जुटाया जाएगा. यह ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा. इस काम में करीब 30 लाख कर्मचारी लगेंगे, जो देश के हर घर पर जाकर जानकारी इकट्ठा करेंगे. जनगणना में दो तरह के - पहला हाउसलिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस फार्म (Houselisting and Housing Census) के लिए और दूसरा जनसंख्या गणना (Population Enumeration) फार्म भरे जाएंगे.

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2027 की जनगणना है खास

जनगणना 2027 के लिए शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत की जनगणना विश्‍व की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्‍यिकीय प्रक्रिया है. इसके तहत जातिगत गणना भी कराई जाएगी. वैष्‍णव ने कहा कि यह पहली डिजिटल जनगणना होगी. एंड्रॉइड और आई ओ एस दोनों मोबाइल एप्लिकेशन के माध्‍यम से डेटा संग्रह किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य में 30 लाख कर्मियों को लगाया जाएगा. जनगणना 2027 में देश की पूरी आबादी को शामिल किया जाएगा. इस प्रक्रिया के तहत हर घर तक जनगणना कर्मी पहुंचेंगे.

देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी. अब 2027 की जनगणना के लिए केंद्र सरकार ने तैयारी तेज कर दी है. यह पहली बार होगा जब हर दस साल में होने वाली जनगणना छह साल की देरी से कराई जाएगी.

इससे पहले दिसंबर 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2021 में जनगणना कराने और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने का प्रस्ताव मंजूर किया था. उस समय 2021 की जनगणना को दो चरणों में कराने की योजना थी. अप्रैल से सितंबर 2020 तक मकान सूचीकरण और 9 से 28 फरवरी 2021 तक जनसंख्या गणना लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टालना पड़ा.

दशकीय जनगणना भारत में 1872 से लगातार हो रही है. 2027 की जनगणना कुल मिलाकर 16वीं दशकीय जनगणना होगी और आजादी के बाद यह आठवीं होगी. इस दौरान गांव, कस्बे और वार्ड स्तर पर जनसंख्या से जुड़ी कई जानकारियां जुटाई जाएंगी, जैसे आवास की स्थिति, सुविधाएं, संपत्ति, धर्म, अनुसूचित जाति और जनजाति, भाषा, साक्षरता और शिक्षा, आर्थिक गतिविधियां, प्रवास और प्रजनन दर.

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हर आदमी की गिनती पर खर्च होगा 82 रुपये

हर व्यक्ति की गिनती पर करीब 82 रुपये खर्च होने का अनुमान है. आधार डैशबोर्ड के अनुसार देश में अब तक 1,430,477,374 लोगों को आधार जारी किए गए हैं. ऐसे में 2027 की जनगणना के लिए केंद्र सरकार द्वारा मंजूर 11,718 करोड़ रुपये के बजट के आधार पर प्रति व्यक्ति लगभग 82 रुपये खर्च होने की संभावना बनती है.

इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि कैबिनेट ने कोयला सेक्टर में नई सुधार नीति CoalSETU को मंजूरी दे दी है. इसका मकसद कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है. इस नीति के तहत उद्योगों को लंबे समय के लिए कोयला लिंकिंग नीलामी के जरिए मिलेगी, और इसके लिए एक नया विंडो CoalSETU बनाया जाएगा. इसमें कोई भी घरेलू खरीदार नीलामी में हिस्सा ले सकेगा.

इसके साथ ही कैबिनेट ने 2026 सीज़न के लिए नारियल (Copra) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को भी मंजूरी दे दी है. सरकार ने बताया कि किसानों को लाभकारी दाम देने के लिए 2018-19 के बजट में यह तय किया गया था कि सभी अनिवार्य फसलों का MSP उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना रखा जाएगा.

Caste Census