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MGNREGA : मनरेगा की जगह लेगी नई रोजगार स्कीम? कितने दिन काम की होगी गारंटी और मेहनताना

केंद्र सरकार लोकसभा में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण नाम का नया बिल पेश करने की तैयारी में है. अगर यह बिल पास हो जाता है, तो मौजूदा मनरेगा कानून की जगह यही नई स्कीम लागू हो जाएगी.

केंद्र सरकार लोकसभा में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण नाम का नया बिल पेश करने की तैयारी में है. अगर यह बिल पास हो जाता है, तो मौजूदा मनरेगा कानून की जगह यही नई स्कीम लागू हो जाएगी.

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FE Hindi Desk
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नई स्कीम के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले गारंटीड काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने की योजना है. (Image : www.tnrd.tn.gov.in)

Centre to introduce Bill to replace MNREGA with new job guarantee scheme : केंद्र सरकार ने मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा को हटाकर उसकी जगह एक नई रोजगार गारंटी योजना लाने की तैयारी में है. सरकार इसके लिए लोकसभा में “विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” नाम का नया बिल पेश करने वाली है, जिसे VB–G RAM G Bill 2025 बताया जा रहा है. अगर यह बिल संसद से पास हो जाता है, तो मौजूदा मनरेगा कानून खत्म हो जाएगा.

सूत्रों के हवाले से दी गई इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले गारंटीड काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने की योजना है. मनरेगा के दायरे को बढ़ाने और कानून का नाम बदलने पर हाल के दिनों में केंद्रीय कैबिनेट के भीतर चर्चा भी हुई है.

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मनरेगा क्या है?

मनरेगा कानून साल 2005 में लागू किया गया था, जिसे 2 अक्टूबर 2009 को तत्कालीन यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी के नाम पर रखा. इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों के हर उस परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य बिना कुशल श्रम यानी मजदूरी का काम करना चाहते हैं, साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी दी जाती है.

सरकारी समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आया

साल 2022 में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक समिति बनाई थी, जिसे मनरेगा के कामकाज और राज्यों में इसके क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा का जिम्मा दिया गया था. इस समिति ने अपनी रिपोर्ट पिछले साल सरकार को सौंपी.

रिपोर्ट में बताया गया कि कानून भले ही 100 दिन के काम की गारंटी देता है, लेकिन 2024–25 में एक परिवार को औसतन सिर्फ करीब 50 दिन का ही काम मिल पाया. पिछले साल सिर्फ 40.70 लाख परिवार ही ऐसे थे, जिन्हें पूरे 100 दिन का काम मिला. चालू वित्त वर्ष में तो अब तक सिर्फ 6.74 लाख परिवार ही 100 दिन की सीमा तक पहुंच पाए हैं.

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राज्यों की मांग और हकीकत

आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे कई राज्य लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि मनरेगा में काम के दिन 100 से बढ़ाए जाएं. नियम यह है कि राज्य चाहें तो 100 दिन से ज्यादा काम दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें पैसा अपने बजट से देना होता है. यही वजह है कि बहुत कम राज्य ऐसा कर पाते हैं.

पिछले वित्त वर्ष 2024–25 में देशभर में मनरेगा के तहत करीब 290 करोड़ मानव-दिवस का काम हुआ, लेकिन इसमें से सिर्फ 4.35 करोड़ मानव-दिवस ही राज्यों ने अपने पैसे से पैदा किए. महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे कुछ राज्यों ने अपने संसाधनों से अतिरिक्त काम दिया.

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एक और बिल भी लाएगी सरकार

इसके साथ ही केंद्र सरकार लोकसभा में परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित और टिकाऊ इस्तेमाल से भारत को बदलने से जुड़ा एक और बिल, यानी सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बिल (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Bill, 2025) भी पेश करने जा रही है.

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