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बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के कुछ ही दिन कांग्रेस पार्टी ने वोट चोरी के खिलाफ दिल्ली में मेगा रैली करने का ऐलान किया गया था. (Image : X/@INCIndia)
Congress’s mega rally against ‘vote chori’ in Capital today : बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार और सीमित जनसमर्थन के बावजूद कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह “वोट चोरी” के मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है. पार्टी अब इस अभियान को देश की राजधानी दिल्ली तक ले आई है. इसी कड़ी में कांग्रेस आज रामलीला मैदान में “वोट चोर, गद्दी छोड़” रैली आयोजित करने जा रही है, जिसे पार्टी अपने आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव मान रही है.
इस रैली में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत देशभर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल होंगे. यह दिल्ली में कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए गए “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर पहली बड़ी जनसभा होगी.
वोट चोरी के खिलाफ आवाज बुलंद करने की कांग्रेस की अपील
कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली में आज होने वाली मेगा रैली को लेकर लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है. पार्टी ने अपने एक्स (X) हैंडल पर किए एक पोस्ट में “वोट चोर–गद्दी छोड़” के नारे के साथ जनता को आमंत्रित करते हुए लिखा है कि वे रामलीला मैदान में होने वाली इस रैली में शामिल हों और वोट चोरी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें.
'वोट चोर - गद्दी छोड़' ✊ pic.twitter.com/rjuVM324cX
— Congress (@INCIndia) December 14, 2025
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बिहार चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी ने किया था ऐलान
इस रैली का ऐलान 18 नवंबर को किया गया था, यानी बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के कुछ ही दिनों बाद. बिहार में कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 6 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई. इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नेताओं के साथ बैठक की, जहां मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चल रहा है. बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल ने कहा था कि पार्टी अब सड़क पर उतरकर चुनाव आयोग की उस प्रक्रिया को उजागर करेगी, जिसे कांग्रेस लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाला बता रही है.
दरअसल, “वोट चोर, गद्दी छोड़” का नारा राहुल गांधी ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अपनी “वोटर अधिकार यात्रा” के दौरान जोर-शोर से उठाया था. चुनाव में हार के बावजूद कांग्रेस ने इस नारे और वोट चोरी के आरोपों वाला अभियान जारी रखने का फैसला किया है.
इस साल 18 नवंबर को रैली का ऐलान होने के बाद से कांग्रेस पूरी ताकत झोंक चुकी है. खासकर दिल्ली से सटे राज्यों में पार्टी नेता दिन-रात जुटे हुए हैं, ताकि रविवार की रैली में बड़ी भीड़ जुट सके. इसके लिए दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय (अकबर रोड) पर कंट्रोल रूम बनाया गया है, वहीं उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, पंजाब समेत कई राज्यों के नेता लगातार काम कर रहे हैं.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि “वोट चोरी” का मुद्दा राहुल गांधी के लिए बेहद अहम है और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में यह एक बड़ा जनआंदोलन बन सकता है. अब तक राहुल गांधी इस मुद्दे पर तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं, जिनमें उन्होंने दावा किया है कि चुनाव आयोग ने बीजेपी के साथ मिलकर देशभर में वोट चोरी की है.
राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर आरोपों की शुरुआत पिछले साल नवंबर में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद हुई थी. उनका कहना था कि 2024 के लोकसभा चुनाव (अप्रैल–मई) और नवंबर के विधानसभा चुनाव के बीच राज्य में मतदाताओं की संख्या अचानक काफी बढ़ गई. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर नए वोटर उन 85 विधानसभा सीटों में जोड़े गए, जहां लोकसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन कमजोर रहा था.
इसके बाद राहुल गांधी ने लगातार तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अलग-अलग राज्यों से वोट चोरी के सबूत पेश करने का दावा किया. पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस 7 अगस्त को हुई, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग और बीजेपी पर चुनाव में “बड़ा आपराधिक घोटाला” करने का आरोप लगाया. उन्होंने कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र की महादेवपुरा विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कई तरीकों से वोटों में हेरफेर की गई.
राहुल गांधी ने 18 सितंबर को दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर हमले और तेज कर दिए. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर “वोट चोरों को बचाने” का आरोप लगाया और कर्नाटक व महाराष्ट्र की दो विधानसभा सीटों के आंकड़े पेश कर मतदाता सूची में गड़बड़ी का दावा किया. हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया था.
इसके बाद 5 नवंबर को तीसरी और आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले साल हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार वोट चोरी का नतीजा थी. उन्होंने दावा किया कि राज्य में करीब 25 लाख फर्जी वोट डाले गए.
इससे पहले 11 अगस्त को कांग्रेस ने बिहार में SIR के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन किया था. उस वक्त संसद से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकाला गया था, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत INDIA गठबंधन के कई नेता शामिल हुए थे.
लेकिन इस बार कांग्रेस ने SIR और वोट चोरी के मुद्दे पर अकेले प्रदर्शन करने का फैसला किया है. पार्टी नेताओं के मुताबिक, बिहार चुनाव में करारी हार के बाद सहयोगी दलों की रैली में भागीदारी को लेकर अनिश्चितता थी, इसलिए कांग्रेस ने अकेले आगे बढ़ने का रास्ता चुना.
अगर बिहार चुनाव को कांग्रेस के “वोट चोरी” अभियान की कसौटी माना जाए, तो दिल्ली की यह रैली यह दिखाने का मौका होगी कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर कितनी गंभीर है. पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि बिहार में हार के बावजूद राहुल गांधी इस अभियान को छोड़ने के मूड में नहीं हैं.
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि राहुल गांधी इस मुद्दे को लोकतंत्र की सबसे बुनियादी चीज, यानी मतदान से जुड़ा मानते हैं. इसी वजह से वह चुनाव आयोग और बीजेपी के खिलाफ अपना अभियान जारी रखने के पक्ष में हैं. नेता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस मुद्दे पर जनता में जागरूकता बढ़ेगी और लोग इसे गंभीरता से समझेंगे.
आने वाले समय में असम, केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में कांग्रेस के वोट चोरी अभियान की असली परीक्षा इन्हीं राज्यों में होगी.
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की भूमिका सीमित मानी जा रही है क्योंकि वहां इंडिया गठबंधन की सहयोगी टीएमसी मैदान में है. तमिलनाडु में पार्टी को डीएमके के साथ मिलकर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. वहीं असम और केरल में कांग्रेस मुख्य मुकाबले में है, इसलिए ये चुनाव पार्टी के लिए ज्यादा अहम होंगे. माना जा रहा है कि इन राज्यों के नतीजे ही यह तय करेंगे कि राहुल गांधी का वोट चोरी अभियान आगे कितना असर डाल पाता है.
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