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लाल क़िला आतंकी हमला: पार्किंग से निकलती i20 कार
Delhi Blast: सोमवार शाम को लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के पास एक आतंकवादी हमला हुआ था. यह हमला उस वक्त हुआ जब संदिग्ध “बॉम्बर” को लाल क़िले के पास पार्किंग छोड़कर गए अभी कुछ ही मिनट हुए थे. अब जांच में नई जानकारी सामने आई है जो बताती है कि यह हमला शायद कैलेंडर की गलती की वजह से हुआ. पुलिस और जांच एजेंसियां इस नए सुराग की पुष्टि कर रही हैं.
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लाल क़िला ब्लास्ट: बम से भरी कार तीन घंटे तक पार्क की गई थी
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. उमर नबी ने बम से भरी हुई i20 कार को लाल क़िले की पार्किंग में दोपहर 3:19 बजे प्रवेश कराया. ऐसा लग रहा था कि वह भीड़ बढ़ने का इंतजार कर रहे थे ताकि बम धमाका कर सकें. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ क्योंकि सोमवार को लाल क़िला पर्यटकों के लिए बंद रहता है और इसलिए पार्किंग में भीड़ बढ़ी ही नहीं.
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, अपने साथियों की गिरफ्तारी की खबर सुनकर डॉ. उमर नबी हताश और घबरा गए. उन्होंने अंततः शाम 6:38 बजे पार्किंग स्थल छोड़ दिया और लाल क़िला और चांदनी चौक के बीच स्थित नेताजी सुभाष मार्ग की ओर चल दिए. कुछ ही देर बाद, कार लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के पास एक ट्रैफिक सिग्नल पर धमाके से फट गई. इस धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए.
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. उमर नबी ने दोपहर 3:19 बजे पार्किंग में प्रवेश करने से लेकर शाम 6:38 बजे निकलने तक अपनी कार से कभी बाहर कदम नहीं रखा और न ही उसे अकेला छोड़ा. बताया गया है कि उनका फोन 31 अक्टूबर से बंद था और आखिरी लोकेशन अल-फलाह यूनिवर्सिटी में रिकॉर्ड की गई थी. अधिकारी संदेह कर रहे हैं कि शायद उन्होंने किसी बर्नर फोन का इस्तेमाल किया हो या हो सकता है उन्हें सुरक्षा कारणों से किसी भी तरह के संपर्क से बचने के निर्देश मिले हों.
रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ. उमर नबी फरीदाबाद में हुई बड़ी विस्फोटक बरामदगी और अपने साथियों की गिरफ्तारी की खबरें देख रहे थे. ये घटनाएं उन्हें घबराहट में डाल गईं और संभवत: इसी वजह से उन्होंने कार को समय से पहले ही धमाका करने का निर्णय लिया.
अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जहां डॉ. उमर नबी काम करते थे, ने साफ किया है कि उसका “व्हाइट-कॉलर” आतंक मॉड्यूल से कोई संबंध नहीं है. यूनिवर्सिटी ने बताया कि डॉ. नबी और बाकी आरोपियों से उसका रिश्ता सिर्फ काम से जुड़ा था, निजी तौर पर कोई संपर्क नहीं था.
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. उमर नबी ने मूल रूप से हमला 6 दिसंबर को करने की योजना बनाई थी, ताकि यह बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के साथ मेल खाए. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डॉ. नबी और एक अन्य प्रमुख आरोपी, डॉ. मुज़म्मिल गनइ, वर्ष 2021 में तुर्की की यात्रा के दौरान प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सदस्यों से मिले थे. इसके अलावा, डॉ. गनइ ने इस साल की शुरुआत में लाल क़िला क्षेत्र के आसपास कई बार जाकर रेकी की थी.
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लाल क़िला हमला ‘आतंकी घटना’ घोषित
बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने लाल क़िला हमले को आधिकारिक रूप से “आतंकी घटना” घोषित किया. बैठक की शुरुआत में कैबिनेट ने हमले में मारे गए लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखा और फिर एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की ओर से औपचारिक प्रस्ताव पढ़ा. प्रस्ताव में कहा गया, “देश ने 10 नवंबर 2025 की शाम लाल क़िले के पास कार धमाके के रूप में एक घिनौनी आतंकी घटना देखी है, जिसे देशविरोधी ताकतों ने अंजाम दिया. इस विस्फोट में कई लोगों की जान गई और कई घायल हुए. कैबिनेट इस कायराना और नृशंस हमले की कड़ी निंदा करती है, जिसने निर्दोष लोगों की जान ले ली.”
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कैबिनेट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि भारत हर रूप में आतंकवाद (Terrorism) के प्रति “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति पर कायम है. प्रस्ताव में यह भी कहा गया, “कैबिनेट विश्व के कई देशों द्वारा व्यक्त किए गए एकजुटता और समर्थन के संदेशों की सराहना करता है. उनके सहयोग और कर्तव्यनिष्ठा की भावना वास्तव में सराहनीय है.”
कैबिनेट ने निर्देश दिया है कि जांच को पूरी तत्परता और तेजी से आगे बढ़ाया जाए, ताकि हमले के जिम्मेदार आतंकियों, सहयोगियों और मददगारों की पहचान कर उन्हें कानून के घेरे में लाया जा सके. सरकार ने यह भी कहा कि वह हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और देश के सभी नागरिकों की सुरक्षा व जीवन की रक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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