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बिहार में चुनावी दंगल के मुख्य उम्मीदवार. Photograph: (PTI)
Bihar election 2025: आज बिहार में पहले चरण का मतदान हो रहा है, जहां कई नेताओं की प्रतिष्ठा, सम्मान, ताकत और राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है. बिहार की जंग अब तक गठबंधन बनाने, सीटों के बंटवारे, उम्मीदवारों की घोषणा और जोरदार चुनाव प्रचार की तेज़ रफ्तार यात्रा रही है. लेकिन क्या यह सब कारगर साबित होगा? इसका फैसला आज बिहार के मतदाता 121 सीटों पर करेंगे.
हालांकि सबकी निगाहें कुछ ऐसे चेहरों पर होंगी जो अपनी पार्टियों की ताकत और प्रभाव का प्रतीक हैं. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में सात ऐसी हाई-प्रोफाइल सीटें हैं जिन पर पूरे राज्य की नज़र टिकी हुई है. तेजस्वी, तेज प्रताप से लेकर अनंत सिंह और सम्राट चौधरी तक कई बड़े नेता यहाँ मैदान में हैं.
बिहार चुनाव 2025: सात वीआईपी सीटें जहां तय होगी दिग्गजों की किस्मत
1. राघोपुर: तेजस्वी यादव (राजद) बनाम सतीश कुमार (भाजपा)
राघोपुर की लड़ाई व्यक्तिगत और पारंपरिक दोनों है. यह सीट दशकों से राजद का गढ़ रही है. 1995 और 2000 में लालू प्रसाद यादव ने यहां से जीत दर्ज की, जिसके बाद राबड़ी देवी ने भी इसी सीट से जीत हासिल की. तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) 2015 से लगातार इस सीट से विधायक हैं.
2010 में जदयू के सतीश कुमार ने राबड़ी देवी को 13,006 वोटों से हराया था, लेकिन तेजस्वी ने 2015 में सतीश कुमार को हराकर बदला लिया और 2020 में दोबारा विजय हासिल की. अब सतीश कुमार भाजपा के टिकट पर तीसरी बार तेजस्वी को चुनौती दे रहे हैं.
2. तारापुर: सम्राट चौधरी (भाजपा) बनाम अरुण शाह (राजद)
राजनीति में किसी सीट की अहमियत इस बात से तय होती है कि वहां हारने पर पार्टी को कितना झटका लगेगा. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए यह सीट वैसी ही है. उनके सामने राजद के अरुण शाह मैदान में हैं.
तारापुर सीट 2010 से जदयू के कब्जे में रही है. यहाँ पहले नीता चौधरी ने जीत हासिल की, फिर मेवा लाल चौधरी ने 2015 और 2020 में लगातार जीत दर्ज की. अब भाजपा के सम्राट चौधरी यहां से मैदान में हैं. दस से अधिक उम्मीदवारों के बीच यह एक दिलचस्प और कांटे की टक्कर बन गई है.
3. महुआ: तेज प्रताप यादव (जनशक्ति जनता दल) बनाम मुकेश रौशन (राजद)
तेज प्रताप यादव के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई है. लालू यादव परिवार से अलग-थलग पड़े तेज प्रताप को इस बार प्रचार में परिवार का कोई समर्थन नहीं मिला. उनकी नई पार्टी, जनशक्ति जनता दल (JJD) जो पाँच क्षेत्रीय दलों (विकास वंचित इंसान पार्टी, भोजपुरिया जन मोर्चा, प्रगतिशील जनता पार्टी, वाजिब अधिकार पार्टी, और संयुक्त किसान विकास पार्टी) का गठबंधन है, का भविष्य दांव पर है.
राजद से “गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार” और पार्टी मूल्यों से विचलन के कारण उन्हें निकाला गया था. यह विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने सोशल मीडिया पर किसी महिला के साथ अपने 12 साल के रिश्ते का दावा किया था. 2015 में उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की थी. अब वे अपनी राजनीतिक साख और पारिवारिक सम्मान दोनों को वापस पाने के लिए चुनाव मैदान में हैं.
4. अलीनगर: मैथिली ठाकुर (भाजपा) बनाम बिनोद मिश्रा (राजद)
लोकगीत और भक्ति संगीत के लिए मशहूर 25 वर्षीय मैथिली ठाकुर पहली बार चुनाव मैदान में हैं. उन्होंने अक्टूबर में भाजपा जॉइन की और पहले ही उम्मीदवार सूची में उनका नाम था. मैथिली ने अपना प्रचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों के आधार पर चलाया है, साथ ही अपने क्षेत्र के नाम और गौरव पर भी जोर दिया है.
अलीनगर सीट पारंपरिक रूप से राजद की रही है. अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सात बार यहां जीत दर्ज की. हालांकि 2020 में विकासशील इंसान पार्टी के मिश्री लाल यादव ने मात्र 3000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. भाजपा का मैथिली ठाकुर को मैदान में उतारने का यह प्रयोग देखने योग्य रहेगा.
5. मोकामा: अनंत कुमार सिंह (जदयू) बनाम वीणा देवी (राजद)
बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह चार बार विधायक रह चुके हैं. लेकिन उनकी वफादारी बार-बार बदलती रही है. वे 2010 में जदयू के टिकट पर जीते, 2015 में निर्दलीय लड़े और 2020 में राजद से जीत हासिल की.
मामलों और विवादों ने अपना असर दिखाया और सिंह दोबारा जदयू में लौट आए. अब उनके सामने हैं वीणा देवी, उसी पार्टी राजद से, जिसने उन्हें उनकी सबसे बड़ी जीत दिलाई थी.
6. लखीसराय: विजय कुमार सिन्हा (भाजपा) बनाम सूरज कुमार (जन सुराज पार्टी)
भाजपा के दो उपमुख्यमंत्री इस बार चुनावी रण में हैं. सम्राट चौधरी के अलावा, विजय कुमार सिन्हा को भी अपनी और पार्टी की ताकत साबित करनी है. लखीसराय सीट 2010 से भाजपा के पास है. सिन्हा ने 2015 से लगातार जीत हासिल की है.
अब उनके सामने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) के सूरज कुमार हैं, जो भाजपा के इस मजबूत गढ़ को हिलाने की कोशिश में हैं.
7. पटना साहिब: शशांत शेखर (कांग्रेस) बनाम रत्नेश कुशवाहा (भाजपा)
पूरी तरह शहरी इलाका, पटना साहिब राज्य की राजधानी का केंद्र और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में से एक है, जिस पर पार्टी दशकों से काबिज रही है. भाजपा के नंद किशोर यादव इस विधानसभा क्षेत्र के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले विधायकों में से एक रहे हैं.
इस बार भाजपा ने 45 वर्षीय वकील रत्नेश कुशवाहा के रूप में एक नया चेहरा उतारा है. वहीं कांग्रेस ने 35 वर्षीय नए उम्मीदवार शशांत शेखर को मैदान में उतारा है. शहरी मतदाताओं वाली यह सीट दोनों पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है, और इसका नतीजा राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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