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Photograph: (Image : Freepik)
संचार साथी ऐप के बाद अब एक और नई बहस छिड़ गई है. बताया जा रहा है कि सरकार हर मोबाइल फोन में GPS ट्रैकिंग अनिवार्य करने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा हुआ तो हर किसी के लोकेशन पर सरकार की नजर होगी. हालांकि इस फैसले से दिग्गज फोन निर्माताओं ने नाराजगी जताई है. हाल में सामने आई एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है.
यह रिपोर्ट ठीक उस वक्त सामने आई है जब केंद्र सरकार ने सभी मोबाइल फोन्स में संचार साथी मोबाइल ऐप (Sanchar Saathi mobile App) को प्री-इंस्टॉल करने का आदेश वापस लिया है. नए और पुराने फोन में ये ऐप अनिवार्य किए जाने वाले फैसले पर भी लोगों ने निगरानी और निजता को लेकर सवाल उठाए थे, और ऐपल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी दिग्गज फोन निर्मताओं ने सरकार के फैसले का पालन करने से इनकार कर दिया था.
जानकारों का मानना था कि ऐसे ऐप की अनिवार्यता सरकार को किसी भी यूजर की एक्टिविटी पर नजर रखने की ताकत दे सकती है और कंज्यूमर की पसंद को खत्म कर देती है. अब GPS ट्रैकिंग वाले नए प्रस्ताव को भी इसी तरह की कड़ी प्रतिक्रिया मिल रही है. कथित रुप से इस प्रस्ताव की बात टेलिकॉम इंडस्ट्री की ओर से सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल आईटी मिनिस्ट्री और गृह मंत्रालय, दोनों इस पर विचार कर रहे हैं.
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क्या हर फोन के लोकेशन को ट्रैक करने की हो रही है तैयारी?
समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार स्मार्टफोन कंपनियों के लिए असिस्टेड जीपीएस (Assisted GPS - A-GPS) को अनिवार्य करने के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है. अभी फोन कंपनियां मोबाइल टावरों की मदद से एक अनुमानित लोकेशन बताती हैं, जिसमें कई मीटर तक का फर्क हो सकता है.
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने प्रस्ताव दिया है कि यूजर की सटीक लोकेशन तभी उपलब्ध कराई जाए जब सरकार स्मार्टफोन कंपनियों को A-GPS तकनीक एक्टिव करने का निर्देश दे. सटीक लोकेशन देने वाली यह तकनीक सैटेलाइट सिग्नल और सेल्युलर डेटा दोनों का उपयोग करती है. सुत्रों की मानें तो इस प्रस्ताव का जिक्र जून में केंद्रीय आईटी मंत्रालय की एक इंटरनल ईमेल में किया गया.
बताया जा रहा है कि असिस्टेड GPS तकनीक के इस्तेमाल के लिए स्मार्टफोन में लोकेशन सर्विस का हमेशा ऑन रहना अनिवार्य होगा और यूजर के पास इसे बंद करने का कोई विकल्प नहीं होगा. सूत्रों के मुताबिक ऐपल (Apple), सैमसंग (Samsung) और अल्फाबेट (Alphabet) की गूगल (Google) जैसी दिग्गज टेक कंपनियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई और केंद्र को साफ कहा है कि इसे अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए.
दुनिया में कहीं नहीं हुआ ऐसा कदम
हालांकि Apple और Google जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक एसोसिएशन (India Cellular and Electronics Association) ने इस प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया है. बताया जा रहा है कि इस ग्रुप ने सरकार को एक गोपनीय पत्र लिखा और कहा कि दुनिया में कहीं भी किसी देश ने डिवाइस लेवल पर इस तरह की अनिवार्य लोकेशन ट्रैकिंग लागू नहीं की है. पत्र में यह भी कहा गया कि असिस्टेज GPS को मॉनिटरिंग के लिए इस्तेमाल करने का कोई प्रावधान ही नहीं है, और इसे अनिवार्य करना नियामकीय सीमा का उल्लंघन माना जाएगा. सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे पर स्मार्टफोन उद्योग के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक बुलाने की योजना बनाई थी, लेकिन बैठक फिलहाल टाल दी गई है और आगे क्या होने वाला है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है.
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