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एक साल में सहयोग पोर्टल से व्हाट्सऐप, फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम समेत 19 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को 2,300 से अधिक कंटेंट ब्लॉक करने के आदेश जारी किए गए. (AI Image)
देश में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी कितनी तेज़ी से बढ़ी है, इसकी एक साफ तस्वीर अब सामने आई है. आरटीआई के जरिए द इंडियन एक्सप्रेस को मिले आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय के ‘सहयोग’ पोर्टल के जरिए व्हाट्सऐप, फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम समेत 19 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को 2,300 से ज्यादा कंटेंट ब्लॉक करने के आदेश भेजे.
यह अवधि ‘सहयोग’ पोर्टल के शुरू होने के बाद का पहला पूरा साल है. पहली बार सामने आए इन आंकड़ों से साफ होता है कि यह विवादों में रहा पोर्टल अब भारत में ऑनलाइन कंटेंट पर नियंत्रण और सेंसरशिप का एक अहम औजार बन चुका है. इन आदेशों के तहत सोशल मीडिया पर मौजूद कथित आपत्तिजनक या गैरकानूनी पोस्ट, लिंक और कई मामलों में पूरे अकाउंट तक ब्लॉक करने को कहा गया.
गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इन ब्लॉकिंग आदेशों का सबसे बड़ा हिस्सा मेटा समूह के प्लेटफॉर्म्स को भेजा गया. व्हाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम को मिले आदेश कुल संख्या का 78 प्रतिशत से ज्यादा रहे.
सबसे ज्यादा कार्रवाई व्हाट्सऐप पर हुई, जिसे अकेले 1,392 ब्लॉकिंग ऑर्डर मिले. इसके बाद फेसबुक को 255 और इंस्टाग्राम को 169 आदेश भेजे गए. यानी मेटा के इन तीनों प्लेटफॉर्म्स को मिलाकर कुल 1,816 ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी किए गए.
अन्य प्लेटफॉर्म्स की बात करें तो यूट्यूब को 176, मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम को 123, गूगल को 93, एप्पल को 43 और अमेजन को 23 आदेश मिले. इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, लिंक्डइन और स्नैपचैट समेत 11 अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को कुल 38 ब्लॉकिंग आदेश भेजे गए. अधिकारियों के अनुसार, एक ही आदेश में कई लिंक या कंटेंट शामिल हो सकते हैं, जिन पर कार्रवाई करना संबंधित प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी होती है.
आरटीआई के तहत सामने आए इस डेटा में मई महीने में चले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान की गई बड़ी संख्या में कंटेंट हटाने की कार्रवाई भी शामिल है. उस दौरान सरकार ने पाकिस्तान से जुड़े बताए जा रहे अकाउंट्स और कंटेंट को ऑनलाइन प्रचार रोकने के लिए निशाना बनाया था. इसी समय एलन मस्क की कंपनी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने दावा किया था कि उसे सरकार की ओर से 8,000 से ज्यादा अकाउंट ब्लॉक करने के आदेश मिले थे, जिनमें अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान और कई प्रमुख यूजर्स के अकाउंट भी शामिल थे.
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एक वरिष्ठ इंडस्ट्री अधिकारी ने बताया कि कंटेंट ब्लॉक करने के आदेशों की संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई बार जब सहयोग पोर्टल काम नहीं करता, तो कंपनियों को ऐसे आदेश ई-मेल के जरिए भी भेजे जाते हैं.
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने यह भी खुलासा किया है कि अब तक 118 से ज्यादा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मध्यस्थों को सहयोग पोर्टल से जोड़ा जा चुका है. इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार के हटाने (टेकडाउन) से जुड़े निर्देशों का दायरा लगातार बढ़ रहा है. ये ब्लॉकिंग आदेश केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की एजेंसियों की ओर से भेजे गए.
इस साल की शुरुआत में I4C ने कर्नाटक हाईकोर्ट को जो जानकारी दी थी, उसके मुताबिक मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को 426 नोटिस भेजे गए थे, जिनमें 1.1 लाख से ज्यादा लिंक और अकाउंट्स को गैरकानूनी कंटेंट साझा करने के आरोप में ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया था.
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि ऐसे आदेशों की रफ्तार तेजी से बढ़ी है. मार्च 2024–25 के दौरान जहां औसतन रोज़ाना करीब एक ब्लॉकिंग आदेश भेजा जा रहा था, वहीं अक्टूबर 2024–25 के बीच यह संख्या बढ़कर दिन में छह से ज्यादा आदेश हो गई. इससे संकेत मिलता है कि सहयोग पोर्टल के जरिए सरकारी एजेंसियों को ऑनलाइन कंटेंट हटाने में ज्यादा आसानी हुई है.
द इंडियन एक्सप्रेस पहले भी रिपोर्ट कर चुका है कि 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारी, साथ ही सात केंद्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधि सहयोग पोर्टल से जोड़े जा चुके हैं.
द इंडियन एक्सप्रेस की ओर से इन कंटेंट हटाने (टेकडाउन) के आदेशों और उन्हें जारी करने के आधार पर सवाल भेजे गए थे, लेकिन गृह मंत्रालय, मेटा, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, अमेजन और टेलीग्राम में से किसी ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
ये ब्लॉकिंग आदेश नोटिस के रूप में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत जारी किए जाते हैं. इस धारा के तहत अगर कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चिन्हित किए गए कंटेंट को ब्लॉक नहीं करता, तो वह अपनी “सेफ हार्बर” सुरक्षा खो सकता है. यह सुरक्षा सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से बचाती है.
ये आदेश आईटी एक्ट की धारा 69(A) के दायरे में नहीं आते, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर ऑनलाइन सेंसरशिप के लिए किया जाता है और जो सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों तक सीमित है.
सहयोग पोर्टल को अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया था, ताकि सरकारी एजेंसियां धारा 79(3)(b) के तहत एक ही प्लेटफॉर्म से ब्लॉकिंग आदेश जारी कर सकें. इससे पहले अलग-अलग एजेंसियों को ऐसे आदेश सीधे ई-मेल के जरिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को भेजने पड़ते थे.
इस साल की शुरुआत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने धारा 79(3)(b) के तहत भेजे गए ब्लॉकिंग आदेशों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. X का तर्क था कि सरकार एक “समानांतर” कंटेंट ब्लॉकिंग सिस्टम बना रही है और उसने सहयोग पोर्टल को “सेंसरशिप पोर्टल” तक बताया था. हालांकि सितंबर में कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके खिलाफ X ने आगे अपील करने की बात कही है.
वहीं अक्टूबर में आईटी मंत्रालय ने आईटी नियमों में संशोधन करते हुए साफ किया कि धारा 79(3)(b) के तहत ब्लॉकिंग आदेश केवल केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी ही जारी कर सकेंगे. इसके साथ ही मासिक समीक्षा जैसी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी लागू की गई है.
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