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GDP Data : FY26 में 7.4% की रफ्तार से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, फर्स्ट एडवांस्ड एस्टिमेट्स के इसी आंकड़े पर बनेगा बजट

India GDP Growth FY26 First Advanced Estimates : मौजूदा वित्त वर्ष में देश की GDP 7.4% बढ़ने का अनुमान. फर्स्ट एडवांस्ड एस्टिमेट्स के इन्हीं आंकड़ों पर बनेगा बजट 2026.

India GDP Growth FY26 First Advanced Estimates : मौजूदा वित्त वर्ष में देश की GDP 7.4% बढ़ने का अनुमान. फर्स्ट एडवांस्ड एस्टिमेट्स के इन्हीं आंकड़ों पर बनेगा बजट 2026.

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Viplav Rahi
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India GDP Growth FY26 First Advanced Estimates Budget Impact

GDP First Advanced Estimates : FY26 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का लेटेस्ट अनुमान बजट 2026 की दिशा को प्रभावित करेगा. (AI Generated Image)

India's GDP estimated to grow at 7.4 pc in FY26 : भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है. यह अनुमान सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से जारी फर्स्ट एडवांस्ड एस्टिमेट्स (First Advanced Estimates) में सामने आया है. अगर यह अनुमान सही बैठता है, तो यह पिछले वित्त वर्ष FY25 की 6.5 प्रतिशत GDP ग्रोथ से साफ तौर पर बेहतर प्रदर्शन होगा. भारत में वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च तक चलता है.

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस तेज ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा योगदान सर्विस सेक्टर का है. मंत्रालय ने कहा कि FY26 में रीयल ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) के 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें सेवाओं की मजबूत मांग और गतिविधियां अहम भूमिका निभा रही हैं.

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बजट 2026 के लिए क्यों अहम हैं GDP के ये आंकड़े

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आने वाले एक महीने के भीतर संसद में केंद्रीय बजट पेश करेंगी. आमतौर पर बजट 1 फरवरी को आता है, लेकिन इस बार यह तारीख रविवार होने के कारण इस बार केंद्रीय बजट 2026 (Budget 2026) की तारीख को लेकर कुछ असमंजस है.

हालांकि तारीख कुछ भी हो, लेकिन यह साफ है कि फर्स्ट एडवांस्ड एस्टिमेट्स के ये आंकड़े बजट की बुनियाद बनेंगे. पूरे वित्त वर्ष का फाइनल GDP डेटा तो वित्त वर्ष खत्म होने के बाद ही जारी होता है, लेकिन शुरुआती अनुमान सरकार को यह तय करने में मदद करते हैं कि अगले साल उसकी रेवेन्यू कितनी हो सकती है, खर्च कहां करना है और टैक्स से कितनी आमदनी होने की उम्मीद है. यानी बजट की नीति और दिशा काफी हद तक इन्हीं अनुमानों पर टिकी होती है.

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फर्स्ट एडवांस्ड एस्टिमेट्स की मुख्य बातें

FY26 के लिए जारी अनुमानों में अर्थव्यवस्था की तस्वीर काफी संतुलित और सकारात्मक दिखती है.

रीयल GDP के 7.4 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जो FY25 में 6.5 प्रतिशत था.

नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) के FY26 में 8.0 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है.

सर्विस सेक्टर एक बार फिर ग्रोथ का इंजन बनकर उभरा है.

फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल एस्टेट, प्रोफेशनल सर्विसेज, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, डिफेंस और अन्य सर्विसेज में FY26 के दौरान करीब 9.9 प्रतिशत की तेज बढ़त का अनुमान है.

ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग से जुड़ी सेवाओं में 7.5 प्रतिशत की ग्रोथ दिख सकती है. 

मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन जैसे सेकेंडरी सेक्टर में 7.0 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान लगाया गया है.

कृषि और इससे जुड़े सेक्टर में 3.1 प्रतिशत की मीडियम ग्रोथ का अनुमान है.

बिजली, गैस, पानी और अन्य यूटिलिटी सेवाओं में 2.1 प्रतिशत की बढ़त देखी जा सकती है.

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खपत और निवेश से मिला सपोर्ट

आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान कंजम्प्शन और निवेश दोनों में सुधार का रुख बना हुआ है.

FY26 के दौरान प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PFCE), यानी आम लोगों की जेब से होने वाले खर्च में करीब 7.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है.

वहीं निवेश से जुड़ी गतिविधियों को दिखाने वाले ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में 7.8 प्रतिशत का इजाफा होने की उम्मीद है.

यह पिछले वित्त वर्ष के 7.1 प्रतिशत से बेहतर है, जिससे पता चलता है कि कंपनियां और सरकार दोनों निवेश को लेकर ज्यादा सक्रिय हैं.

सितंबर तिमाही में भी दिखी थी तेजी

अगर हालिया प्रदर्शन की बात करें, तो जुलाई-सितंबर 2025 की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया था. इस दौरान GDP ग्रोथ 8.2 प्रतिशत रही, जो पिछले 6 तिमाही का सबसे ऊंचा स्तर था.

सर्विस सेक्टर में करीब डबल डिजिट की ग्रोथ और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की तेज रफ्तार ने इस मजबूती में अहम योगदान दिया.

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क्या है GDP का मतलब

ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी GDP किसी देश में एक तय अवधि में पैदा हुई सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य होता है. यह अवधि एक तिमाही या पूरा वित्त वर्ष हो सकती है. GDP से यह समझने में मदद मिलती है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है.

सरकार के बजट को ऐसे समझें

जब वित्त मंत्री संसद में बजट भाषण (Budget Speech) देती हैं, तो वह देश का पूरा हिसाब-किताब पेश करती हैं. इसमें सरकार की आमदनी और खर्च दोनों शामिल होते हैं. साथ ही इसमें अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की आय और खर्च का अनुमानित लेखा-जोखा भी पेश किया जाता है. इसी को केंद्रीय बजट कहते हैं.  

सरकार की आमदनी का बड़ा हिस्सा टैक्स से आता है, जो आम लोगों और कंपनियों से वसूला जाता है.

इसके अलावा ब्याज, मुनाफा और सरकारी निवेश से मिलने वाली रकम सरकार की गैर-टैक्स रिसीट (non-tax receipts) में आती है.

सरकार की रेवेन्यू का एक और हिस्सा कैपिटल रिसीट (capital receipts) से आता है, जिसमें सरकारी हिस्सेदारी बेचने से मिलने वाली रकम जैसे आइटम शामिल होते हैं. 

एक्सपेंडीचर (Expenditure) यानी खर्च की बात करें, तो सैलरी, पेंशन और रोजमर्रा के खर्च रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (Revenue Expenditure) होते हैं.

सड़क, रेलवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) कहलाते हैं.

Gdp Budget 2026