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India on Venezuela Crisis : भारत ने वेनेजुएला के हालात पर जताई ‘गहरी चिंता’, शांति और संवाद पर दिया जोर

India on Venezuela Crisis : वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद भारत सरकार ने पूरे घटनाक्रम पर “गहरी चिंता” जाहिर करते हुए सभी पक्षों से अपील की है कि हालात को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाए.

India on Venezuela Crisis : वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद भारत सरकार ने पूरे घटनाक्रम पर “गहरी चिंता” जाहिर करते हुए सभी पक्षों से अपील की है कि हालात को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाए.

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FE Hindi Desk
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India expresses deep concern after US attack on Venezuela

Protest Outside UN Plaza in San Francisco : वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के खिलाफ अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में UN प्लाज़ा के बाहर प्रदर्शन करते प्रदर्शनकारी. (Photo : AP)

India on Venezuela Crisis: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका लाए जाने के अगले दिन भारत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. भारत सरकार ने पूरे घटनाक्रम पर “गहरी चिंता” जाहिर करते हुए सभी पक्षों से अपील की है कि हालात को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाए. हालांकि भारत ने अमेरिका की कार्रवाई की खुलकर निंदा नहीं की है, लेकिन उसने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया है.

भारत का आधिकारिक रुख क्या है

विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी बयान में कहा, “वेनेजुएला में हाल के घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय हैं. हम वहां की बदलती स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.”

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यह बयान विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया. इसी बयान में आगे कहा गया, “भारत वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए अपने समर्थन की पुष्टि करता है. हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिये सुलझाया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे.”

अमेरिकी कार्रवाई पर संतुलित प्रतिक्रिया

भारत की प्रतिक्रिया पर गौर करें तो इसमें एक संतुलन साफ दिखता है. एक ओर “गहरी चिंता” शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, तो दूसरी ओर अमेरिका की कार्रवाई की सीधी आलोचना या निंदा नहीं की गई. यह भारत की पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप है, जहां वह अक्सर ऐसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों में संयमित भाषा अपनाता है.

भारत का जोर इस बात पर है कि किसी भी संकट का समाधान बातचीत से निकले, न कि सैन्य ताकत के इस्तेमाल से. यही वजह है कि बयान में बार-बार “संवाद”, “शांति” और “स्थिरता” जैसे शब्दों पर जोर दिया गया है.

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वेनेजुएला में भारतीयों की सुरक्षा पर फोकस

विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि वेनेजुएला की राजधानी कराकास में स्थित भारतीय दूतावास वहां रह रहे भारतीयों के संपर्क में है. मंत्रालय के अनुसार दूतावास “भारतीय समुदाय के सदस्यों के संपर्क में है और हर संभव मदद उपलब्ध कराता रहेगा.”

शनिवार को हालात बिगड़ने के बाद विदेश मंत्रालय ने एक ट्रैवल एडवाइजरी भी जारी की थी, जिसमें भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई.

एडवाइजरी में कहा गया, “वेनेजुएला में हाल के घटनाक्रम को देखते हुए भारतीय नागरिकों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है. जो भारतीय किसी भी कारण से वेनेजुएला में हैं, वे अत्यधिक सावधानी बरतें, अपनी आवाजाही सीमित रखें और कराकास स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें.”

इस एडवाइजरी में दूतावास का ईमेल और आपातकालीन फोन नंबर भी साझा किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके.

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वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अमेरिका लाया गया 

अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला करने के बाद वहां के वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) को पकड़कर अमेरिका ले आए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी और बताया कि महीनों से बनाए जा रहे दबाव के बाद ये कार्रवाई की गई है. 

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भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया

भारत के भीतर इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. लेफ्ट पार्टियों ने अमेरिकी हमले की कड़ी आलोचना की है. सीपीआई (एम) के महासचिव एम ए बेबी ने इस कार्रवाई को “अमेरिकी नेतृत्व वाले साम्राज्यवाद द्वारा किया गया अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद” बताया. विपक्षी राजनीतिक दल का यह बयान भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया से काफी अलग है.

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