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वन रैंक-वन पेंशन से नोटबंदी तक: जानिए वे महत्वपूर्ण फैसले जिनमें जस्टिस सूर्य कांत की प्रमुख भूमिका रही

जस्टिस सूर्य कांत भारत के 53वें चीफ जस्टिस हैं. वे वन रैंक-वन पेंशन, नोटबंदी, पेगासस स्पाइवेयर, समलैंगिक विवाह और इंटरनेट बंद जैसे कई महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहे हैं. उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक रहेगा.

जस्टिस सूर्य कांत भारत के 53वें चीफ जस्टिस हैं. वे वन रैंक-वन पेंशन, नोटबंदी, पेगासस स्पाइवेयर, समलैंगिक विवाह और इंटरनेट बंद जैसे कई महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहे हैं. उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक रहेगा.

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Sakshi Kuchroo
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CJI Surya Kant

जस्टिस सूर्य कांत भारत के 53वें चीफ जस्टिस बने, लंबित संवैधानिक मामलों और प्रमुख फैसलों की अगुवाई करेंगे. Photograph: (X)

जस्टिस सूर्य कांत (Justice Surya Kant) सोमवार को भारत के 53वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ लेने वाले हैं. 63 वर्ष की उम्र में वे सीजेआई (Chief Justice Of India) संजीव खन्ना के सेवानिवृत्त होने के बाद सबसे सीनियर जज हैं. जस्टिस सूर्य कांत फरवरी 2027 तक इस पद पर कार्य करेंगे.

कांत का जन्म हिसार, हरियाणा में हुआ था. उन्होंने 1985 में कानून का अभ्यास पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में और बाद में सुप्रीम कोर्ट में शुरू किया. 2018 में वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने और एक साल बाद सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त हुए. वे उन बेंचों का हिस्सा रहे हैं जिन्होंने हाल के वर्षों में कुछ सबसे बड़े मामलों के फैसले दिए हैं.  

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कुछ महत्वपूर्ण फैसले हैं जिनमें वे शामिल रहे:

वन रैंक वन पेंशन (OROP)

2024 में कांत की बेंच ने पूर्व सैनिकों के लिए OROP योजना को बरकरार रखा, लेकिन सरकार को लंबित बकाया राशि को समयबद्ध तरीके से चुकाने का निर्देश दिया.

पेगासस स्पाइवेयर केस 

जस्टिस सूर्य कांत उस सुप्रीम कोर्ट बेंच का हिस्सा थे जिसने 2021 में पेगासस स्पाइवेयर मामले में एक तकनीकी समिति गठित की. इस समिति का काम यह जांचना था कि क्या सरकार ने नागरिकों की जासूसी के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया था.

अनुच्छेद 370 

दिसंबर 2023 में जस्टिस सूर्य कांत उस पांच-सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट बेंच का हिस्सा थे जिसने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा. इस फैसले के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया.

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समलैंगिक विवाह 

2023 में आए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से इनकार किया. जस्टिस सूर्य कांत उन न्यायाधीशों में शामिल थे जिन्होंने कहा कि विवाह करने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है और इसे संसद पर छोड़ दिया जाना चाहिए.

नोटबंदी

जस्टिस सूर्य कांत उस सुप्रीम कोर्ट बेंच का हिस्सा थे जिसने 2016 की नोटबंदी के फैसले को 4-1 के बहुमत से बरकरार रखा.

जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बंद पर फैसला

2020 में जस्टिस सूर्य कांत की बेंच ने कहा कि इंटरनेट को अनिश्चित समय के लिए बंद नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है.

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NEET 2024 पेपर लीक

जस्टिस सूर्य कांत उस सुप्रीम कोर्ट बेंच के प्रमुख रहे जिसने 2024 में NEET पेपर लीक मामले में फैसला सुनाया. बेंच ने पूरे परीक्षा को रद्द करने से इनकार किया और केवल प्रभावित छात्रों के लिए री-टेस्ट कराने का आदेश दिया.

इलेक्टोरल बॉन्ड 

जस्टिस सूर्य कांत विवादित इलेक्टोरल बॉन्ड योजना पर हुई प्रारंभिक सुनवाईयों का हिस्सा भी रहे, हालांकि अंतिम निर्णय बाद में आया.

वे तेज न्याय सुनिश्चित करने के लिए भी जाने जाते हैं. उन्होंने एक बार “जीरो पेंडेंसी कोर्ट” की बात भी कही थी. इसके अलावा वे मोब लिंचिंग और हेट स्पीच के खिलाफ कड़े रुख के लिए भी प्रसिद्ध हैं.

सीजेआई के रूप में लगभग 15 महीने के कार्यकाल में वे कई लंबित महत्वपूर्ण मामलों की संवैधानिक बेंच की अध्यक्षता करेंगे जिनमें सिटीजनशिप  अमेंडमेंट  एक्ट की वैधता और कई कर विवाद शामिल हैं.

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Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

To read this article in English, click here.

Orop Chief Justice Of India Justice Surya Kant