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Vande Mataram Debate : वंदे मातरम पर आज संसद में चर्चा, लोकसभा में पीएम मोदी करेंगे अगुवाई

पिछले महीने वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर हुए कार्यक्रम में माहौल तब गरम हो गया, जब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने 1937 में वंदे मातरम् के असली गीत के कुछ अहम हिस्से हटा दिए थे.

पिछले महीने वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर हुए कार्यक्रम में माहौल तब गरम हो गया, जब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने 1937 में वंदे मातरम् के असली गीत के कुछ अहम हिस्से हटा दिए थे.

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FE Hindi Desk
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यह बहस संसद के उस खास सत्र का हिस्सा है, जिसमें वंदे मातरम् के इतिहास और उसकी विरासत पर चर्चा की जा रही है. (Image: PTI)

Parliament Winter Session Vande Mataram : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर एक विशेष चर्चा की अगुआई करेंगे. यह बहस पहले से चल रहे राजनीतिक और वैचारिक टकराव को और तेज करने वाली है, क्योंकि वंदे मातरम् जहां आज़ादी की लड़ाई में एक मजबूत नारा था, वहीं उसकी सांस्कृतिक पहचान आज बीजेपी की राजनीति का अहम हिस्सा मानी जाती है.

बीजेपी और विपक्ष में वंदे मातरम् को लेकर विवाद क्यों?

यह चर्चा संसद के उस विशेष सत्र का हिस्सा है जिसमें वंदे मातरम् के इतिहास और उसकी विरासत पर बात की जा रही है. विवाद तब बढ़ा जब पिछले महीने कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने 1937 के फ़ैज़ाबाद अधिवेशन में वंदे मातरम् के कुछ महत्वपूर्ण बंद हटा दिए थे. मोदी का दावा है कि इस फैसले ने “विभाजन के बीज बोए” और राष्ट्रीय गीत के संदेश को कमजोर किया. उन्होंने इसे अपने "विकसित भारत" विजन से जोड़ते हुए कहा कि सांस्कृतिक विरासत का सम्मान देश की प्रगति के लिए जरूरी है.

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कांग्रेस ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया. पार्टी ने महात्मा गांधी के लिखित कार्यों का हवाला देते हुए कहा कि 1937 का फैसला किसी को बांटने के लिए नहीं था, बल्कि कुछ समुदायों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया था. इस फैसला लेने वाली कार्य समिति में गांधी, नेहरू, पटेल, सुभाष चंद्र बोस समेत तमाम बड़े नेता शामिल थे. समिति ने कहा था कि गाए जाने वाले पहले दो बंद व्यापक रूप से स्वीकार्य हैं, जबकि बाकी बंद में धार्मिक संदर्भ हैं जिनसे कुछ वर्ग असहज थे. कांग्रेस ने यह भी कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर ने भी ऐसा ही सुझाव दिया था और उन्होंने ही 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम् गाया था.

इसके बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि वे आज की असल समस्याओं जैसे बेरोजगारी, असमानता और विदेश नीति की चुनौतियों पर बात करने के बजाय आज़ादी के संघर्ष की विरासत पर हमला कर रहे हैं. यही कारण है कि संसद में इस मुद्दे पर बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है.

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संसद में वंदे मातरम् पर तीखी बहस की तैयार

लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में इस विषय पर दस–दस घंटे की विस्तृत चर्चा का समय निर्धारित किया गया है. राज्यसभा में यह बहस मंगलवार को होनी है और इसमें गृह मंत्री अमित शाह बीजेपी की ओर से पक्ष रखेंगे.

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी इस बहस में वंदे मातरम् के इतिहास से जुड़े कई कम ज्ञात पहलुओं को सामने लाने की योजना बना रही है, ताकि कांग्रेस को इस मुद्दे पर घेरा जा सके, जिसने भारत की आज़ादी की लड़ाई में गहरा योगदान दिया था.

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