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उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 31 दिसंबर को जारी होनी है. (Image : X/@ECISVEEP)
उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का पहला फेज यानी एन्यूमरेशन का काम शुक्रवार को पूरा हो गया. अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए चिन्हित किए गए हैं. इसकी मुख्य वजह यह रही कि इन मतदाताओं के एनुमरेशन फॉर्म जमा नहीं हो पाए.
31 दिसंबर को ड्राफ्ट और 28 फरवरी को जारी होगी फाइनल लिस्ट
आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि शहरी जिलों में वोट कटने की संख्या ग्रामीण इलाकों के मुकाबले कहीं ज्यादा है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा (UP CEO Navdeep Rinwa) ने बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 31 दिसंबर को जारी की जाएगी. इसके बाद 31 दिसंबर से 30 जनवरी 2026 तक क्लेम-ऑब्जेक्शन दर्ज की जा सकेंगी. वहीं, फाइनल वोटर लिस्ट 28 फरवरी को प्रकाशित होगी.
19% मतदाताओं के नामों पर मंडरा रहा कटने का खतरा
जिन 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने के लिए चिन्हित किए गए हैं, उनमें 1.30 करोड़ शिफ्ट, 79.52 लाख एब्सेंट,46.24 लाख को “मृत”, 25.47 लाख "डुप्लीकेट” यानी किसी और जगह भी पंजीकृत) और 7.74 लाख को “अन्य श्रेणी” में रखा गया है. एन्यूमरेशन फेज में चिन्हित किए गए नामों की संख्या मौजूदा वोटर लिस्ट में दर्ज कुल 15,44,30,092 मतदाताओं का करीब 18.70 फीसदी हिस्सा है.
इन जिलों के वोटर लिस्ट से हटेंगे सबसे ज्यादा नाम
सबसे ज्यादा वोट कटने वाले जिलों में लखनऊ सबसे टॉप पर है, जहां करीब 30 फीसदी यानी 12 लाख मतदाता चिन्हित किए गए हैं. इसके बाद गाजियाबाद 28.83 फीसदी यानी 8.18 लाख, कानपुर नगर (25.50 फीसदी – 9 लाख), मेरठ (24.66 फीसदी – 6.65 लाख), प्रयागराज (24.64 फीसदी – 11.56 लाख), गौतम बुद्ध नगर (23.94 फीसदी – 4.47 लाख) और आगरा (23.25 फीसदी – 8.36 लाख) का नंबर आता है. इसके अलावा हापुड़, शाहजहांपुर, कन्नौज, बरेली, फर्रुखाबाद, बदायूं, सिद्धार्थनगर और संभल जैसे जिलों में भी 20 फीसदी से ज्यादा वोट कटने की स्थिति है.
कटौती के बाद 31 दिसंबर को जारी होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल होंगे.
“एब्सेंट या पता न चलने वाले” वे मतदाता हैं, जो बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के दौरे के समय अपने दर्ज पते पर नहीं मिले और जिनके बारे में पड़ोसी भी कोई जानकारी नहीं दे सके. “अन्य” कैटेगरी में वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने अपना एनुमरेशन फॉर्म बीएलओ को वापस लौटाया ही नहीं.
सूत्रों के मुताबिक, करीब 1.04 करोड़ मतदाता ऐसे रहे, जिनका पिछली (2003) SIR प्रक्रिया के डेटा में भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. ये वह मतदाता हैं जिनका नाम मौजूदा वोटर लिस्ट में नाम शामिल है लेकिन आखिरी बार राज्य में हुए एसआईआर लिस्ट से खुद के, उनके माता-पिता या अन्य करीबी के नाम से मिलान नहीं हो सका. बताया जा रहा है कि इनके फॉर्म डिजिटाइज कर दिए गए हैं और इन्हें वोटरों को चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस भेजे जाएंगे. सूत्रों के अनुसार एन्यूमरेशन फेज में राज्य के कुल 15.44 करोड़ वोटरों में से मिले 12.55 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं.
नेपाल से सटे बलरामपुर में 25.98% SIR फार्म अनकलेक्टेड
नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले में स्थिति थोड़ी अलग रही. यहां 25.98 फीसदी फॉर्म “अनकलेक्टेड” पाए गए. वहीं, 10 फीसदी से ज्यादा “एब्सेंट” मतदाताओं वाले जिलों में बलरामपुर के अलावा गाजियाबाद और लखनऊ भी शामिल हैं.
कहां मिले सबसे अधिक एब्सेंट वोटर
“एब्सेंट” वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा लखनऊ (4.27 लाख), प्रयागराज (3.67 लाख), गाजियाबाद (3.19 लाख), कानपुर नगर (3.10 लाख), आगरा (2.96 लाख) और बरेली (2.35 लाख) में दर्ज की गई.
कहां सबसे अधिक शिफ्टेड मिले वोटर
वहीं “शिफ्ट” मतदाताओं के कारण सबसे ज्यादा कटौती लखनऊ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, मेरठ, कानपुर नगर, प्रयागराज, बागपत और हापुड़ में देखने को मिली. एक अधिकारी के मुताबिक, शहरी इलाकों में वोटर लिस्ट में पते और व्यक्तिगत विवरण से जुड़ी गड़बड़ियां ज्यादा होती हैं, इसी वजह से वहां अनुपस्थित मतदाताओं की संख्या भी ज्यादा सामने आती है.
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 15 दिनों में 7 लाख से ज्यादा ऐसे फॉर्म इकट्ठा किए गए, जो पहले जमा नहीं हो पाए थे, क्योंकि अधिकारियों ने खुद जाकर अनुपस्थित मतदाताओं को ट्रेस किया.
इतनी बड़ी संख्या में वोट कटने के बाद राजनीतिक दल विधानसभा क्षेत्रों में बनने वाले नए सामाजिक समीकरणों का आकलन करने में जुट गए हैं.
एक राजनीतिक चिंता यह भी सामने आई है कि शहरी इलाकों में, जो परंपरागत रूप से बीजेपी के मजबूत गढ़ माने जाते हैं, वहां ज्यादा वोट कटे हैं. एक बीजेपी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मुस्लिम मतदाताओं में कटौती का अनुपात अन्य समुदायों के मुकाबले कम दिख रहा है, क्योंकि उन्होंने SIR प्रक्रिया में ज्यादा सक्रियता दिखाई. वहीं, शहरी इलाकों में रहने वाले कई हिंदू मतदाता, खासकर बीजेपी के पारंपरिक समर्थक, उतने सक्रिय नहीं रहे.
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की कवायद तेज
चुनाव आयोग के मुताबिक सेकेंड फेज SIR की शुरूआत के साथ ही फॉर्म-6 के जरिए वोटर लिस्ट में नए नाम जुड़वाने के लिए कवायद भी जारी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 11 लाख से ज्यादा लोग मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर चुके हैं. 18 साल से ऊपर वाले या 1 जनवरी 2026 को 18 साल पूरे कर रहे लोग अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए फार्म 6 भर सकते हैं. ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों मोड में वोटर रजिस्ट्रेशन जारी है. पात्र लोग बीएलओ की मदद से या चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
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