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मन की बात कार्यक्रम के 128वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई अहम बातों का जिक्र किया. (Image: X/AkashvaniAIR)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंथली रेडियो कार्यक्रम मन की बात कार्यक्रम के 128वें एपिसोड में देश को दिशा देने वाले और समाज को प्रेरित करने वाले कई अहम मुद्दों का जिक्र किया. इस बार उनका संबोधन संस्कृति, विज्ञान, कृषि, पर्यटन, खेल, मानवता और आत्मनिर्भरता जैसे अनेक विषयों का एक सशक्त मिश्रण था. पूरे वक्तव्य में एक भावना स्पष्ट झलकती रही कि भारत अपनी परंपराओं की जड़ें मजबूत रखते हुए नवाचार, युवाशक्ति और स्थानीय सामर्थ्य पर आधारित नए युग की ओर तेजी से बढ़ रहा है.
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत संविधान दिवस, वंदेमातरम् के 150 साल, अयोध्या में राम मंदिर पर धर्मध्वजा आरोहण और कुरुक्षेत्र में स्मारकों के लोकार्पण जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए की और कहा कि नवंबर देश के लिए प्रेरणाओं से भरा महीना रहा. इसके बाद उन्होंने बताया कि कैसे भारत रक्षा, स्पेस और एविएशन जैसे क्षेत्रों में लगातार नई उड़ान भर रहा है.
हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी LEAP इंजन MRO सुविधा का उद्घाटन, मुंबई में INS माहे का नौसेना में शामिल होना और स्काईरूट (Skyroot) के इनफिनिटी कैंपस (Infinity Campus) की लॉन्चिंग को उन्होंने भारत की नई सोच और युवाओं की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया.
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कही ये 10 बड़ी बातें
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने किन अहम बातों पर जोर देते नजर आए, यहां 10 बड़ी बातों से समझिए
- प्रधानमंत्री ने एग्रीकल्चर सेक्टर में 357 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन के रिकॉर्ड और पिछले दस सालों में 100 मिलियन टन की वृद्धि को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने स्वाभाविक खेती की ओर लौट रहे युवाओं और हाईली क्वॉलिफाईड प्रोफेशनल्स की सराहना की. शहद उत्पादन में बढ़ती संभावनाओं को लेकर उन्होंने जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, नागालैंड और कर्नाटक के किसानों द्वारा किए जा रहे नवाचारों का विशेष उल्लेख किया.
- संस्कृति के मोर्चे पर उन्होंने काशी-तमिल संगमम के चौथे संस्करण को 2 दिसंबर से काशी में शुरू होने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन बताया. उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें भारतीय एकता को मजबूत करती हैं. उन्होंने तमिल भाषा और संस्कृति की महानता को रेखांकित करते हुए लोगों से इसमें शामिल होने का आग्रह भी किया.
- पर्यटन में बढ़ रही संभावनाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड विंटर टूरिज्म का नया केंद्र बन रहा है. औली, मुनस्यारी, चोपटा और डेयारा जैसी जगहें सर्दियों में बड़ी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं और कनेक्टिविटी तथा इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार भी किया जा रहा है. उन्होंने भारत में विंटर फेस्टिवल और विंटर स्पोर्ट्स के तेजी से बढ़ते आकर्षण की भी चर्चा की. आदिकैलाश में हाल ही में आयोजित हाई-एटलिट्यूड अल्ट्रा रन और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को उन्होंने राज्य की उपलब्धि बताया.
- रक्षा और नौसेना से जुड़े संग्रहालयों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने दीव, गोवा, कोच्चि, अंडमान और कारवार के प्रमुख नेवी म्यूजियमों को जरूर देखने की अपील की. उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज कदम बढ़ा रही है और 4 दिसंबर का नौसेना दिवस भारतीय वीरता का विशेष उत्सव है.
- प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के प्रति दुनिया भर में दिख रहे उत्साह का भी विशेष उल्लेख किया. भूटान, रूस, मंगोलिया, वियतनाम और थाईलैंड में इन अवशेषों के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ को उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति बताया.
- खेलों में भारत की सफलता को उन्होंने इस महीने की सबसे चमकदार उपलब्धियों में गिना. महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम द्वारा बिना एक भी मैच हारे विश्व कप जीतना, Tokyo Deaf-Olympics में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, महिला कबड्डी विश्व कप में ऐतिहासिक जीत और World Boxing Cup में 20 पदक जैसे परिणामों को उन्होंने भारत की नई खेल शक्ति का प्रमाण बताया. उन्होंने कहा कि देश में मैराथन, बाइकथॉन और Ironman Triathlon जैसे एंड्योरेंस स्पोर्ट्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है.
- वोकल फॉर लोकल पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के लोग त्योहारों और रोजमर्रा की खरीद में भारतीय उत्पादों को अधिक अपनाने लगे हैं. उन्होंने याद दिलाया कि G-20 के दौरान विश्व नेताओं को दिए गए उपहारों में भारतीय कला और शिल्प को खास तवज्जो दी गई ताकि देश के कारीगरों को वैश्विक मंच मिल सके.
- मानवता की मिसालों का उल्लेख करते हुए उन्होंने नवानगर के जाम साहब द्वारा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलिश बच्चों को आश्रय देने की कहानी को याद किया और इसे भारतीय संस्कृति की करुणा और सद्भाव का दुर्लभ उदाहरण बताया.
- अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने सुझाव भेजते रहें, भारत की विविधता की प्रेरक कहानियाँ साझा करते रहें और सर्दियों के मौसम में अपने परिवार का ध्यान रखें. उन्होंने कहा कि अगली बार जब वे मिलेंगे तो वर्ष 2025 समाप्ति की ओर होगा और हम नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ेंगे.
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