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आरएसएस के औपचारिक रूप से पंजीकृत न होने पर चल रही बहस पर टिप्पणी करते हुए भागवत ने कहा, “कई चीज़ें पंजीकृत नहीं होतीं। यहां तक कि हिंदू धर्म भी पंजीकृत नहीं है.” Photograph: (PTI)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने कहा है कि संगठन को आयकर देने की आवश्यकता नहीं है. ‘100 इयर्स ऑफ संघ जर्नी: न्यू होराइजन्स’ व्याख्यान श्रृंखला में प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि आयकर विभाग और कोर्ट ने आरएसएस को "बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स" यानी व्यक्तियों के समूह के रूप में मान्यता दी है, जिसके कारण संगठन आयकर से मुक्त है.
आरएसएस के पंजीकरण को लेकर जारी बहस
भागवत ने आरएसएस के औपचारिक पंजीकरण न होने पर चल रही बहस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “कई चीजें पंजीकृत नहीं हैं. यहां तक कि हिंदू धर्म भी पंजीकृत नहीं है.”
उन्होंने आगे कहा कि संगठन पर अब तक तीन बार प्रतिबंध लगाया जा चुका है, जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार आरएसएस के अस्तित्व को मान्यता देती है.
तिरंगे और भगवा ध्वज पर भागवत का बयान
इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कि आरएसएस केवल भगवा ध्वज का सम्मान करता है न कि भारतीय तिरंगे का, भागवत ने कहा कि संगठन में भगवा ध्वज को ‘गुरु’ के रूप में देखा जाता है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज का सदैव सम्मान, आदर और संरक्षण किया जाता है.
उनकी यह टिप्पणी उस समय आई जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. उनके पुत्र और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर आरएसएस की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, साथ ही संगठन के पंजीकरण और धन के स्रोतों पर सवाल उठाए थे.
भागवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है और न ही चुनावी राजनीति में भाग लेता है. उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज को एकजुट करना है, जबकि राजनीति स्वभावतः विभाजन लाती है, इसलिए आरएसएस इससे दूरी बनाए रखता है.
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“आरएसएस नीतियों का समर्थन करता है, दलों का नहीं”
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संगठन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के बजाय अच्छी नीतियों का समर्थन करता है. उन्होंने कहा कि संघ का कार्य सही बात का समर्थन करना है, चाहे उसे कोई भी प्रस्तावित करे.
अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने मंदिर निर्माण का समर्थन किया था. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस समेत कोई अन्य दल इस मुद्दे का समर्थन करता, तो संघ उनके साथ भी खड़ा होता.
भागवत ने दोहराया कि आरएसएस किसी एक राजनीतिक विचारधारा को नहीं मानता. संगठन का लक्ष्य समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना और बिना लोकप्रिय नारों के सबके विकास की दिशा में काम करना है.
भारत–पाकिस्तान संबंधों पर भागवत
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संगठन हमेशा पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण संबंधों का समर्थक रहा है, लेकिन जब तक पाकिस्तान भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता रहेगा, तब तक शांति संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत को अपनी ओर से शांति बनाए रखनी चाहिए, लेकिन अगर पाकिस्तान उसे तोड़ता है तो वह सफल नहीं होगा.
1971 के युद्ध का जिक्र करते हुए, जिससे बांग्लादेश का निर्माण हुआ, भागवत ने कहा कि पाकिस्तान को अपने पिछले अनुभवों से सबक लेना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान ने अपना रवैया नहीं बदला तो उसे फिर से गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. भागवत ने कहा कि झगड़े के बजाय सहयोग बेहतर है, लेकिन जब भारत पर हमला होता है, तो उसे कड़ा जवाब देना चाहिए ताकि पाकिस्तान को अपनी हरकतों पर पछतावा हो.
जाति व्यवस्था पर विचार
भारतीय समाज में जाति को लेकर भागवत ने कहा कि आज असली समस्या जातीय भेदभाव नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ और आरक्षण को लेकर पैदा की गई भ्रम की स्थिति है. उन्होंने कहा कि जाति के खिलाफ लड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसे भूल जाने की जरूरत है और यह कार्य व्यक्ति स्वयं कर सकता है.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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