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PM Kisan Yojana : बीते दो वित्त वर्ष के दौरान कुल पंजीकृत लोगों में 2 लाख 29 हजार 731 पात्र किसानों को 2000 रुपये की किस्त का आंशिक लाभ मिल पाया, जबकि 13 लाख 41 हजार 632 किसान ऐसे रहे जिन्हें अब तक एक भी किस्त नहीं मिल सकी. (AI Image)
PM Kisan Samman Nidhi Yojana Updates : लोकसभा में सरकार ने बताया कि पिछले दो वित्त वर्षों के दौरान पीएम किसान योजना के लिए 1 करोड़ 32 लाख 60 हजार 543 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से केवल 1 करोड़ 16 लाख 89 हजार 180 पात्र किसानों को ही योजना का पूरा लाभ मिला, जबकि बड़ी संख्या में किसान 2,000 रुपये की किस्त से वंचित रह गए. इस दौरान सरकार ने एक भी किस्त का लाभ न पाने वालों और कुछ किस्तों का लाभ पाने वाले किसानों का ब्योरा भी दिया. साथ ही यह भी बताया किन कमियों के चलते 13.41 लाख से ज्यादा लोग पीएम किसान योजना का लाभ नहीं मिला.
दरअसल लोकसभा में पश्चिम बंगाल की बांकुड़ा सीट से तृणमूल कांग्रेस के सांसद अरूप चक्रवर्ती ने लोकसभा में पीएम किसान योजना के लिए किए गए फंड आवंटन को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कृषि मंत्री से जानना चाहा कि
- पिछले दो वर्षों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए कितना बजट रखा गया और हर साल कितना पैसा खर्च किया गया.
- इन दो वर्षों में पीएम किसान के तहत किसानों को जोड़ने का क्या लक्ष्य रखा गया और कितने किसानों को इसका लाभ मिला.
- पिछले दो वर्षों में कितने ऐसे किसान हैं जिनका पंजीकरण तो हुआ, लेकिन उन्हें अभी तक पूरा पैसा नहीं मिला या सिर्फ आंशिक लाभ मिला.
टीएमसी सांसद के सवालों को जवाब देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद को बताया कि पीएम किसान योजना केंद्र सरकार की एक अहम योजना है, जिसे फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री ने किसानों की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शुरू किया था. इस योजना के तहत खेती करने वाले पात्र किसानों को साल में कुल 6,000 रुपये की मदद दी जाती है. यह रकम तीन बराबर किस्तों में सीधे किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाती है. इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलता है जिनके पास खेती योग्य जमीन है. हालांकि, जिन किसानों की आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत मानी जाती है, उन्हें कुछ शर्तों के तहत इस योजना से बाहर रखा गया है.
किसानों को केंद्र में रखकर तैयार किए गए डिजिटल सिस्टम की वजह से इस योजना का पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे देशभर के किसानों तक पहुंच रहा है. लाभार्थियों के पंजीकरण और जांच की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी गई है. सरकार अब तक इस योजना की शुरुआत से 21 किस्तों के जरिए किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जारी कर चुकी है. चूंकि यह एक अधिकार आधारित योजना है, यानी जो भी किसान पात्र है उसे इसका लाभ मिलना तय है, इसलिए पीएम किसान में न तो किसानों को जोड़ने का कोई राज्यवार लक्ष्य तय किया गया है और न ही राज्यों के हिसाब से अलग-अलग बजट रखा गया है.
पीएम किसान योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है कि वे पात्र किसानों की पहचान करें, उनकी जानकारी की जांच करें और बिना किसी गलती वाला डेटा अपलोड करें. इसमें किसानों की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, आधार को बैंक खाते से जोड़ना और ई-केवाईसी पूरा करना शामिल है, ताकि पैसा सही तरीके से उनके खाते में पहुंच सके. इस योजना में किसानों का पंजीकरण और सत्यापन एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है.
किसान खुद भी पीएम किसान पोर्टल, पीएम किसान ऐप या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए आवेदन कर सकते हैं. इन सभी आवेदनों की जांच संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकारें करती हैं. अगर आवेदन में जरूरी दस्तावेज या जानकारी पूरी नहीं होती, तो राज्य सरकार उसे खारिज भी कर सकती है. लेकिन जैसे ही आवेदन मंजूर होता है, विभाग तुरंत किसान को लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर देता है.
इस दौरान कुल 1 करोड़ 32 लाख 60 हजार 543 किसानों का पंजीकरण हुआ. इनमें से 1 करोड़ 16 लाख 89 हजार 180 किसानों को योजना का पूरा लाभ मिला. वहीं 2 लाख 29 हजार 731 किसानों को आंशिक रूप से लाभ मिला, जबकि 13 लाख 41 हजार 632 किसानों को अब तक योजना के तहत कोई भी किस्त नहीं मिल पाई.
पिछले दो वित्तीय वर्षों में पीएम किसान योजना के तहत स्थिति इस तरह रही:
कुल पंजीकृत किसान: 1 करोड़ 32 लाख 60 हजार 543
पूरा लाभ पाने वाले किसान: 1 करोड़ 16 लाख 89 हजार 180
आंशिक लाभ पाने वाले किसान: 2 लाख 29 हजार 731
कोई लाभ न पाने वाले किसान: 13 लाख 41 हजार 632
करीब 13 लाख 41 हजार 632 किसानों को पीएम किसान योजना का पैसा इसलिए नहीं मिल पाया, क्योंकि उनकी तरफ से कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो सकीं. इनमें जमीन की जानकारी अपडेट न होना, आधार का बैंक खाते से लिंक न होना या ई-केवाईसी पूरी न होना जैसे कारण शामिल हैं.
जिन किसानों को पैसा नहीं मिल पाया, उसके पीछे कई कारण रहे. जैसे
- आधार बैंक खाते से लिंक न होना
- ई-केवाईसी पूरी न होना
- जमीन से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी
- परिवार के किसी अन्य सदस्य का पहले से योजना का लाभ लेना
- किसान का इनकम टैक्स दाता होना
- या फिर किसान द्वारा खुद योजना से नाम वापस लेना
जिन किसानों को आंशिक लाभ मिला, उनके मामलों में जमीन के इस्तेमाल या अन्य शर्तों की दोबारा जांच के लिए भुगतान रोक दिया गया था. सरकार का कहना है कि जैसे ही सही और सत्यापित जानकारी मिलती है, अगली किस्त में पैसा जारी कर दिया जाता है.
इसके अलावा कुछ मामलों में जमीन खेती योग्य नहीं पाई गई, कहीं परिवार का कोई दूसरा सदस्य पहले से योजना का लाभ ले रहा था, कुछ किसानों ने खुद ही योजना से नाम वापस ले लिया और कुछ किसान आयकरदाता पाए गए. जिन किसानों को पीएम किसान योजना के तहत कुछ ही किस्तें मिलीं, उनके मामलों में जमीन के इस्तेमाल और अन्य पात्रता शर्तों की दोबारा जांच के लिए भुगतान अस्थायी रूप से रोक दिया गया था. सरकार ने साफ किया है कि इस योजना में किसानों का पंजीकरण और सत्यापन लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. जैसे ही राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों से किसानों की सही और जांची हुई जानकारी मिलती है, विभाग तुरंत लाभ की प्रक्रिया शुरू कर देता है और अगली किस्त में पैसा जारी कर दिया जाता है.
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