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किसान दिवस के मौके पर देश ने एक बार फिर किसानों की आवाज बने महान नेता को याद किया. (Image : X/NarendraModi)
Farmers Day 2025, Kisan Diwas, Chaudhary Charan Singh : किसान दिवस के मौके पर देश ने एक बार फिर किसानों की आवाज बने महान नेता को याद किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर भारत रत्न चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने बेहतर खेती, किसानों की समृद्धि और समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. पीएम मोदी ने उनके योगदान को राष्ट्र निर्माण की नींव बताते हुए कहा कि देश उनके त्याग और संघर्ष को कभी भुला नहीं सकता.
किसान दिवस पर PM मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि. उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के साथ-साथ कृषि की प्रगति और किसानों की खुशहाली के लिए आजीवन काम किया. पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान अमूल्य है और कृतज्ञ भारत उसे हमेशा स्मरण रखेगा.
पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के साथ-साथ कृषि की प्रगति और किसानों की समृद्धि के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता। pic.twitter.com/naGrTf5mVM
— Narendra Modi (@narendramodi) December 23, 2025
किसानों के लिए जिए चौधरी चरण सिंह
किसान दिवस केवल किसानों के सम्मान का दिन नहीं है, बल्कि यह उस नेता को याद करने का अवसर भी है जिसने भारतीय राजनीति में सिद्धांतों को सत्ता से ऊपर रखा. 23 दिसंबर को मनाया जाने वाला किसान दिवस भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती से जुड़ा है. किसानों और ग्रामीण भारत की आवाज बने चरण सिंह भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक अनोखी पहचान रखते हैं. वे देश के इकलौते प्रधानमंत्री थे जिन्हें अपने कार्यकाल के दौरान संसद का सामना करने का अवसर ही नहीं मिला.
चौधरी चरण सिंह 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक प्रधानमंत्री रहे, लेकिन उनका कार्यकाल बेहद अल्पकालिक और राजनीतिक उथल-पुथल से भरा रहा. उनकी सरकार लोकसभा में स्पष्ट बहुमत के बिना बनी थी, जिस कारण वे न तो अपनी नीतियां संसद में रख सके और न ही विश्वास मत हासिल कर पाए.
1977 में आपातकाल हटने के बाद कांग्रेस के लंबे शासन का अंत हुआ और जनता पार्टी की सरकार बनी. इस सरकार में चरण सिंह उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे. हालांकि, पार्टी के भीतर गहरे मतभेद उभर आए और जुलाई 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने चरण सिंह को सरकार बनाने का न्योता दिया.
चरण सिंह को कांग्रेस (आई) का बाहरी समर्थन मिला, जिसका नेतृत्व इंदिरा गांधी कर रही थीं. इसी समर्थन के आधार पर उन्होंने 28 जुलाई 1979 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. लेकिन यह समर्थन बिना शर्त नहीं था.
सिद्धांतों के लिए छोड़ दी सत्ता
कांग्रेस (आई) ने शर्त रखी कि आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी और संजय गांधी पर चल रहे मामलों को वापस लिया जाए. चरण सिंह ने इसे न्याय और सिद्धांतों के खिलाफ मानते हुए साफ इनकार कर दिया. इसके बाद कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया और उनकी सरकार के पास बहुमत का कोई आधार नहीं बचा.
लोकसभा में विश्वास मत से पहले ही चरण सिंह ने अगस्त 1979 में, महज 23 दिन के भीतर, प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इस तरह वे भारत के एकमात्र प्रधानमंत्री बने जिन्होंने अपने कार्यकाल में कभी संसद का सामना नहीं किया. इसके बाद लोकसभा भंग कर दी गई और जनवरी 1980 में नए चुनाव कराए गए. तब तक चरण सिंह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बने रहे.
यह पूरा घटनाक्रम चौधरी चरण सिंह को भारतीय संवैधानिक और राजनीतिक इतिहास में एक विशिष्ट स्थान दिलाता है. सत्ता खोने के बावजूद सिद्धांतों से समझौता न करना उनकी सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है. हर साल 23 दिसंबर को किसान दिवस के रूप में उनकी जयंती मनाई जाती है, जो भारतीय कृषि, किसानों और ग्रामीण नीतियों के लिए उनके आजीवन संघर्ष और योगदान को सम्मान देने का प्रतीक है.
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