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Photograph: (ANI)
Delhi AQI: प्रधानमंत्री ऑफिस ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से नई उत्सर्जन सूची (emissions inventory) और स्रोत-आवंटन (source-apportionment) अध्ययन पर काम तेज़ करने के लिए कहा है. यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के हवाले से बताई गयी है.
इसी बीच, पिछले सप्ताह राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को अवगत कराया गया कि दिल्ली-एनसीआर में लागू की जा रही प्रदूषण-रोधी रणनीतियाँ पुराने उत्सर्जन आँकड़ों पर आधारित हैं.
चूंकि धूल पीएम प्रदूषण का बड़ा कारण है, सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तय समय सीमा के साथ एक ऐसा प्लान बनाएं जिसमें पर्याप्त फंड हो और जिसमें शहरों व औद्योगिक इलाकों की अहम सड़कों को दोबारा बेहतर तरीके से बनाया जाए. इस प्लान में सड़कों को पूरी तरह पक्का करना और किनारों पर हरियाली बढ़ाना शामिल होगा, ताकि उड़ने वाली धूल कम हो सके.
रिपोर्ट के मुताबिक, ये निर्देश 23 अक्टूबर को हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में दिए गए, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने की. इस बैठक में प्रदूषण मॉनिटरिंग एजेंसियों के अधिकारी, पर्यावरण, कृषि, आवास और ऊर्जा जैसे आठ केंद्रीय मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारी, और दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के मुख्य सचिव मौजूद थे.
दिल्ली का आज का AQI
सोमवार को दिल्ली की हवा और खराब हो गई, और शहर का AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी के क़रीब पहुँच गया. यह तब हुआ जब एक दिन पहले तेज़ हवाओं ने करीब 16 दिन बाद पहली बार हवा की गुणवत्ता को ‘बहुत खराब’ से ‘खराब’ श्रेणी में लाकर थोड़ा सुधार किया था. CPCB के मुताबिक, आज सुबह 7 बजे दिल्ली का AQI 298 रहा, जो अभी भी ‘खराब’ श्रेणी में आता है. सुबह शहर धुंध और धुएँ की परत में ढका हुआ था.
रविवार को दिल्ली की हवा थोड़े समय के लिए सुधरी और AQI 279 तक आ गया जो नवंबर में अब तक का दूसरा सबसे कम स्तर था. इससे पहले 5 नवंबर को AQI 202 था. यह डेटा CPCB की ‘समीर’ ऐप से आया है. दिल्ली के 39 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 22 ने ‘बहुत खराब’ श्रेणी की हवा दर्ज की. दक्षिण दिल्ली के नेहरू नगर में सबसे ज़्यादा प्रदूषण स्तर रहा. यहाँ AQI 351 दर्ज हुआ जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. वहीं दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के NSIT द्वारका में AQI सबसे कम 195 रहा, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में माना जाता है.
अन्य प्रदूषण वाले इलाके जैसे आनंद विहार (AQI 323), बावना (337), बुराड़ी क्रॉसिंग (304), जहांगीरपुरी (319), मुंडका (330), पंजाबी बाग (326), शादीपुर (325) और वजीरपुर (321) में भी हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ रही.
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एमिशन स्टडीज क्यों जरूरी हैं
उत्सर्जन सूची और स्रोत-आवंटन अध्ययन ये बताने में मदद करते हैं कि प्रदूषण के असली स्रोत कौन-कौन हैं और हर एक स्रोत कुल प्रदूषण में कितना योगदान देता है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि बैठक में अधिकारियों ने इस पर भी विचार किया कि अब तक प्रदूषण फ़ैलाने वाले मुख्य स्रोतों जैसे धूल, वाहनों का धुआँ, नगर निगम का कचरा जलाना, पराली जलाना, फैक्ट्रियां और थर्मल पावर प्लांट से आने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए क्या-क्या उपाय किये गए हैं.
दिल्ली में वाहनों का धुआँ चिंता का बड़ा कारण
दिल्ली में अकेले ही NCR में रजिस्टर्ड आधे से ज्यादा वाहन हैं, और यहां के 37% वाहन अभी भी पुराने BS I से BS III मानक के अनुसार चलते हैं. पिछले बुधवार को वरिष्ठ वकील संजय उपाध्याय, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की मदद कर रहे हैं, ने कोर्ट में बताया कि 2023 में एक रियल-टाइम स्टडी पूरी हो गई थी, लेकिन इसके आधार पर अब तक नया एक्शन प्लान तैयार नहीं किया गया.
निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों से हवा की गुणवत्ता प्रभावित
पिछले महीने हुई समीक्षा में CAQM ने बताया कि हजारों किलोमीटर औद्योगिक सड़कों को दोबारा बनाने की जरूरत है. निर्माण कार्य और डेमोलिशन वेस्ट से निकलने वाली धूल भी शहर की हवा को जहरीला बना रही है. रोजाना करीब 8,000 टन ऐसा कचरा बनता है, जो वर्तमान प्रोसेसिंग कैपेसिटी से कहीं ज्यादा है.
औद्योगिक प्रदूषण पर चर्चा में टास्क फोर्स को बताया गया कि IIT कानपुर कुछ औद्योगिक क्षेत्रों के लिए सख्त उत्सर्जन नियम तैयार कर रहा है. NCR में करीब 50,000 उद्योग हैं, जिनमें से लगभग 11,000 को प्रदूषण फैलाने वाला माना जाता है. हालांकि कई उद्योगों ने पाइप्ड नेचुरल गैस का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग डिवाइस का इंस्टॉलेशन अभी भी जारी है.
दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित 11 थर्मल पावर प्लांट्स पर निगरानी की जा रही है. इनमें से 35 यूनिट्स में से 14 ने सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने के लिए फ्लू गैस डिजल्फराइजेशन सिस्टम लगवा लिया है. महाराष्ट्र पावर मंत्रालय, CPCB और राज्य बोर्डों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी प्लांट्स तय मानकों के अनुसार काम करें.
दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण के मुख्य स्रोत
2018 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण का सबसे बड़ा हिस्सा गाड़ियों से आता है, जो 39% है. इसके अलावा सड़क की धूल 18%, पावर प्लांट्स 11% और उद्योग 3% जिम्मेदार हैं. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरोलॉजी की एक और रिपोर्ट में भी कहा गया है कि दिल्ली में PM2.5 का सबसे बड़ा कारण वाहन ही हैं.
CPCB के डेटा के आधार पर Climate Trends द्वारा किए गए विश्लेषण में पता चला है कि दिल्ली में 2015 से 2025 के बीच लगभग हर साल सबसे खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) दर्ज किया गया. सबसे ज्यादा प्रदूषण 2016 में देखा गया जब औसत AQI 250 तक पहुंच गया था.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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