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Modi-Putin talks Today : मोदी-पुतिन की शिखर वार्ता आज, 2030 के आर्थिक रोडमैप पर मुहर लगने की संभावना

पुतिन लगभग तीन साल बाद भारत आए हैं. फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है. इससे पहले वे दिसंबर 2021 में दिल्ली आए थे.

पुतिन लगभग तीन साल बाद भारत आए हैं. फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है. इससे पहले वे दिसंबर 2021 में दिल्ली आए थे.

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FE Hindi Desk
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन को रुषी भाषा में भेंट की गीता. देर रात एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि गीता की शिक्षाएं दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रेरणा देती हैं. Photograph: (Image: X/@narendramodi)

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार शाम दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे, जहाँ उनकी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के दौरान कई अहम आर्थिक और रणनीतिक समझौतों की घोषणा होने की उम्मीद है. सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेता भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास पर 2030 तक का एक व्यापक घोषणापत्र, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ाने, श्रम गतिशीलता पर समझौता, और आर्कटिक क्षेत्र में जहाज निर्माण पर सहयोग जैसे महत्वपूर्ण कदमों पर मुहर लगा सकते हैं.

दोनों देशों और नेताओं के बीच घनिष्ठ रिश्तों का संकेत देने वाले एक विशेष कदम में प्रधानमंत्री मोदी खुद पुतिन को स्वागत करने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे. इसके बाद दोनों नेताओं ने लोककल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री निवास पर निजी रात्रिभोज में लंबी बातचीत की.

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मोदी ने पुतिन को गीता की रूसी अनुवादित प्रति भेंट की. देर रात एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि गीता की शिक्षाएँ दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रेरणा देती हैं.

पुतिन लगभग तीन साल बाद भारत आए हैं. फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है. इससे पहले वे दिसंबर 2021 में दिल्ली आए थे.

अमेरिका के ट्रंप प्रशासन द्वारा रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ लगाने के बाद यह यात्रा और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी रूस पर यूक्रेन युद्ध खत्म करने का दबाव बढ़ा रहे हैं, वहीं यूरोपीय देश चाहते हैं कि दिल्ली भी अपनी भूमिका का इस्तेमाल करते हुए पुतिन को संघर्ष रोकने के लिए मनाए.

अधिकारियों के मुताबिक पुतिन और मोदी की मुलाकात में वैश्विक हालात पर चर्चा तो होगी, लेकिन दोनों पक्ष चाहते हैं कि बातचीत का मुख्य फोकस द्विपक्षीय मुद्दों पर रहे. इनमें व्यापार, रक्षा सहयोग, तकनीक, परमाणु ऊर्जा और दोनों देशों के बीच श्रमिकों की आवाजाही जैसी अहम बातें शामिल हैं.

मोदी द्वारा आयोजित निजी रात्रिभोज और शुक्रवार को तय कई कार्यक्रम दोनों देशों को इन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत करने का पर्याप्त मौका देंगे.

शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद पुतिन राजघाट जाएंगे. इसके बाद हैदराबाद हाउस में मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी. दोनों नेता फिर भारत मंडपम जाएंगे, जहाँ वे भारत-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे.

पुतिन भारत में RT टीवी चैनल के लॉन्च कार्यक्रम में भी शामिल हो सकते हैं. शाम को वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलेंगे और उनके सम्मान में एक राजकीय भोज का आयोजन होगा.

सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच चल रही बातचीत में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, सुखोई-57 के नवीनतम संस्करण, और कई अन्य रक्षा परियोजनाओं पर प्रगति हो सकती है. नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग, विशेषकर रूसी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों पर भी आगे बढ़ने की संभावना है.

चर्चा का एक बड़ा हिस्सा भारत और रूस के बीच यात्रा को आसान बनाने पर भी केंद्रित रहेगा. रूस की ओर से भारतीय पर्यटकों के लिए वीजा मुक्त प्रवेश की मांग पर जोर दिया जा रहा है.

भारत को अमेरिकी टैरिफ और रूसी तेल आयात के मुद्दे को भी संभालना होगा. सेकेंडरी टैरिफ लागू होने के बाद दिल्ली को रूस से तेल आयात कम करना पड़ा है. ऐसे में दोनों पक्षों को अपने पहले तय किए गए 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को लेकर अब अपेक्षाएँ थोड़ा कम करनी पड़ सकती हैं, क्योंकि वह लक्ष्य मुख्य रूप से रूसी तेल आयात बढ़ने पर आधारित था.

भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 68.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया. लेकिन यह व्यापार काफी असंतुलित है. भारत ने रूस को सिर्फ 4.9 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि रूस से आयात—जिसमें ज्यादातर कच्चा तेल शामिल है—63.8 अरब डॉलर तक पहुँच गया.

सूत्रों का कहना है कि भारत अब रूस को अपने निर्यात को बढ़ाना चाहता है. इसके लिए भारतीय उत्पादों—जैसे फल, सब्जियाँ, दवाइयाँ और अन्य सामान—के लिए रूस के बाजार में ज्यादा पहुंच की मांग की जाएगी. पिछले महीने रूस ने भारत से आलू और अनार के आयात को मंजूरी दी थी. भारत रूस से खाद आयात भी बढ़ाना चाहता है और इस क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर जोर दे रहा है.

पुतिन की यात्रा के बाद एक संयुक्त बयान जारी होने की संभावना है और कई द्विपक्षीय समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. इनमें 2030 तक रूस-भारत आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास कार्यक्रम को मंजूरी मिलने की भी उम्मीद है. इसी महीने 21 दिसंबर को दोनों देशों के बीच "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" को औपचारिक रूप से अपनाए जाने के 15 साल पूरे हो जाएंगे.

दिल्ली में बैठकों से पहले, रूसी राष्ट्रपति के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच उद्योग, नई तकनीक, परिवहन, अंतरिक्ष, खनन, स्वास्थ्य, और श्रम प्रवासन जैसे कई क्षेत्रों में बड़े और संभावनाओं से भरे प्रोजेक्ट चल रहे हैं.

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत अब तेज हो गई है और पिछले हफ्ते इसकी एक निर्णायक बैठक भी हुई है.

रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव ने स्पुतनिक इंडिया से कहा कि भारत और रूस आर्कटिक जहाज निर्माण पर मिलकर काम कर सकते हैं. उनके मुताबिक, आर्कटिक क्षेत्र के लिए विशेष श्रेणी के जहाजों का संयुक्त उत्पादन दोनों देशों के लिए एक बड़ा सहयोगी अवसर बन सकता है.

दोनों नेता वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिनमें संयुक्त राष्ट्र, एससीओ, जी-20 और ब्रिक्स के भीतर सहयोग शामिल है. भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा, और पुतिन को उस शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया जाएगा.

Narendra Modi Vladimir Putin