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Delhi Blast: गनई को विदेशी हैंडलर से मिले 42 बम बनाने के ट्यूटोरियल

Delhi Blast: दिल्ली आतंकी हमले की जांच में अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े नेटवर्क पर निगाह है. SIT फंडिंग, कामकाज और संदिग्ध संबंधों की पड़ताल कर रही है. ईडी ने यूनिवर्सिटी से जुड़े 25 ठिकानों पर छापे मारे.

Delhi Blast: दिल्ली आतंकी हमले की जांच में अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े नेटवर्क पर निगाह है. SIT फंडिंग, कामकाज और संदिग्ध संबंधों की पड़ताल कर रही है. ईडी ने यूनिवर्सिटी से जुड़े 25 ठिकानों पर छापे मारे.

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Arfa
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Delhi Bomb Blast Jasir Bilal Wani Accused

Delhi Blast: मुज़म्मिल अहमद गनई, अदील अहमद राथर, शाहीन सईद अंसारी और मुफ्ती इरफान अहमद वेगे को 10 दिन की एनआईए हिरासत में भेज दिया गया है। Photograph: (PTI)

Delhi Blast:  मुज़म्मिल अहमद गनई, जो वर्तमान में अदील अहमद राथर, शाहीन सईद अंसारी और मुफ्ती इरफान अहमद वेग़े के साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की 10-दिन की हिरासत में हैं, ने एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए 42 से अधिक बम निर्माण संबंधी वीडियो प्राप्त किए थे. यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट की है. जांच अधिकारियों का मानना है कि ये वीडियो कथित विदेशी हैंडलर द्वारा भेजे गए थे, जिनकी भूमिका दिल्ली में हुए हालिया आतंकवादी हमले में जांच के दायरे में है. इन वीडियो को हाल ही में भारत में हुई डाई-इट-योरसेल्फ (DIY) शैली की बमबारी के साथ तुलना की जा रही है. गनई, 36 वर्षीय उमर नबी के करीबी सहयोगी भी माने जाते हैं, जो कथित रूप से “धीमी चल रही” i20 कार को चला रहे थे.

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एन्क्रिप्टेड चैट पर बम बनाने के 42 वीडियो भेजे गए

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक,  राष्ट्रीय राजधानी में हुए आतंकवादी हमले में शामिल तीन हैंडलरों की पहचान “हंजुल्लाह”, “निसार” और “उकासा” के रूप में की गई है. माना जा रहा है कि ये असली नाम नहीं, बल्कि बदलकर रखे गए नाम हो सकते हैं. हंजुल्लाह ने गनई को बम बनाने के 42 वीडियो भेजे थे. यह भी कहा जा रहा है कि 35 साल का हंजुल्लाह उस जगह को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी संभाल रहा था, जिसका बाद में “व्हाइट-कॉलर” आतंकवादी मॉड्यूल इस्तेमाल करने वाला था.

राष्ट्रीय राजधानी पर हुए आतंकी हमले से दस दिन पहले गनई को गिरफ्तार किया गया था. उसके ठिकाने से 2,500 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक बरामद हुए थे, जिसमें 350 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट भी शामिल था.

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इस मामले में जिन व्यक्तियों पर खास ध्यान दिया जा रहा है, उनमें विदेशी हैंडलर मोहम्मद शाहिद फैज़ल भी शामिल है. वह “कर्नल”, “लैपटॉप भाई” और “भाई” जैसे नामों का इस्तेमाल करता है. द इंडियन एक्सप्रेस में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि उसने 2020 में बम धमाकों को अंजाम देने के लिए कर्नाटक और तमिलनाडु में आतंकी मॉड्यूल के साथ कोआर्डिनेट किया था. फैसल जो रामेश्वरम कैफ़े ब्लास्ट के फरार आरोपियों में से एक है, पुलिस द्वारा बेंगलुरु में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक कथित आतंकी मॉड्यूल के पकड़े जाने के बाद गायब हो गया. इस मॉड्यूल में युवा इंजीनियरों, डॉक्टरों और अन्य लोगों की संलिप्तता का आरोप है.

यह बताया जाता है कि वह पाकिस्तान भाग गया और वहां से सीरिया-तुर्की सीमा क्षेत्र में चला गया. दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली आतंकी हमले में शामिल हैंडलरों में से एक तुर्की में ही मौजूद है, जिसकी पहचान “उकासा” के रूप में हुई है.

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चार शहरों में एक साथ धमाकों की साज़िश का खुलासा

10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके में 15 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए. घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच आगे बढ़ने पर एक नया केस भी दर्ज किया गया. नई एफआईआर आपराधिक साज़िश से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज की गई है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, आठ संदिग्ध कथित तौर पर चार अलग-अलग शहरों में एक साथ धमाके करने की योजना बना रहे थे. इस साज़िश में दो-दो लोगों की चार टीमें बनाई गई थीं और हर टीम को एक अलग शहर में धमाका करने की जिम्मेदारी दी गई थी. शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि ये टीमें जोड़ों में आगे बढ़कर कई इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IEDs) लेकर एक ही समय में हमले करने की तैयारी में थीं.

जांच के दौरान एजेंसियों ने पहला मॉड्यूल अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ पाया, जहां से हथियार, विस्फोटक, अमोनियम नाइट्रेट और अन्य सामग्री बरामद हुई. हालांकि विश्वविद्यालय ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है और कहा है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेगा. इधर, दिल्ली की एक अदालत ने विश्वविद्यालय के संस्थापक और चेयरपर्सन को 13 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है.

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फरीदाबाद पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की कथित भूमिका की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है. यह जांच दिल्ली आतंकी हमले से जुड़े चरमपंथी मॉड्यूल के संदिग्ध संबंधों को लेकर की जा रही है. SIT विश्वविद्यालय की फंडिंग, कामकाज और उन संभावित नेटवर्क की पड़ताल कर रही है, जिनकी वजह से आरोपित डॉक्टर बिना शक के वहां सक्रिय रह सके.

मध्य प्रदेश के महू में स्थित महू कैंटोनमेंट बोर्ड ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन मोहम्मद जवाद अहमद सिद्दीकी के परिवार को अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया है. आरोप है कि महू में उनका पुश्तैनी घर बिना अनुमति के बनाए गए निर्माणों से जुड़ा हुआ है. बताया जाता है कि परिवार ने चार मंजिला “मौलाना की बिल्डिंग” को 2000 के दशक की शुरुआत में ही खाली कर दिया था.

इससे पहले ईडी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े 25 ठिकानों पर छापे मारे थे, जिनमें ओखला स्थित कार्यालय भी शामिल है.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

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