/financial-express-hindi/media/media_files/2025/11/05/reliance-cuts-russian-crude-imports-2025-11-05-18-43-03.jpg)
रिलायंस ने यह बदलाव तय समय से पहले पूरा कर लिया है, ताकि 21 जनवरी से लागू होने वाले नए उत्पाद-आयात प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन हो सके. (Image: Reuters)
Reliance Industries stops Russian crude imports for refinery operations: रिलायंस इंडस्ट्रीज ने गुजरात के जामनगर में अपनी सिर्फ निर्यात यानी एक्सपोर्ट वाली रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल रोक दिया है. कंपनी ने यूरोपीय संघ (EU) की पाबंदियों के चलते यह फैसला लिया है. कंपनी के प्रवक्ता ने यह जानकारी इसी गुरुवार को दी. उन्होंने बताया कि कंपनी ने 20 नवंबर से अपनी एसईजेड रिफाइनरी में रूसी क्रूड ऑल का आयात यानी इंपोर्ट बंद कर दिया है. रिलायंस ने कहा कि एक दिसंबर से उसकी एसईजेड रिफाइनरी से निर्यात होने वाले सभी उत्पाद गैर-रूसी कच्चे तेल से बने होंगे.
रिलायंस का रूस की तेल कंपनी रोज़नेफ्ट से लगभग 5 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदने का दीर्घकालिक समझौता है. कंपनी ने कहा कि वह मॉस्को पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन करेगी, लेकिन मौजूदा सप्लायर्स के साथ अपने कारोबारी रिश्ते बनाए रखेगी.
ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिका के ताज़ा कदमों में रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों, रोजनेफ्ट और लुकोइल, को खासतौर पर निशाने पर लिया गया है.
1 दिसंबर से केवल नॉन-रशियन क्रूड का इस्तेमाल
कंपनी ने कहा कि 1 दिसंबर से रिफाइनरी से निर्यात होने वाले सभी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स केवल नॉन-रशियन क्रूड से तैयार किए जाएंगे.
रिलायंस ने यह बदलाव तय समय से पहले पूरा कर लिया है, ताकि 21 जनवरी से लागू होने वाले नए उत्पाद-आयात प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन हो सके.
अमेरिका ने कंपनियों को 21 नवंबर तक रूसी ऑयल प्रोड्यूसर्स के साथ अपने सौदे बंद करने की मोहलत दी है. वहीं यूरोपीय संघ पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 21 जनवरी से वह ऐसे ईंधन नहीं खरीदेगा, जो बिल ऑफ लैडिंग की तारीख से 60 दिन पहले रूसी तेल से बने हों या जिसे प्रोसेस किया गया हो.
रिलायंस के कुल एक्सपोर्ट में यूरोप की हिस्सेदारी 28%
रिलायंस के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी करीब 28% है. कंपनी ने यह भी बताया कि 22 अक्टूबर तक तय सभी रूसी क्रूड की शिपमेंट्स को सम्मानपूर्वक पूरा किया जा रहा है, क्योंकि उनके ट्रांसपोर्ट इंतज़ाम पहले से तय थे. आखिरी कार्गो 12 नवंबर को लोड हुआ. 20 नवंबर या उसके बाद आने वाली कोई भी खेप अब जामनगर की डोमेस्टिक टैरिफ एरिया (DTA) रिफाइनरी में उतारी और प्रोसेस की जाएगी.
रिलायंस भारत में रूसी कच्चे तेल की सबसे बड़ी खरीदार है, जिसे वह जामनगर में अपने बड़े तेल शोधन परिसर यानी रिफाइनरी प्लांट में शोधित कर पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदलती है. यह प्लांट दो रिफाइनरियों से बना है - एक एसईजेड इकाई जिससे यूरोपीय संघ, अमेरिका और दूसरे बाजारों में फ्यूल एक्सपोर्ट किया जाता है, और दूसरी पुरानी यूनिट जो घरेलू बाजार की जरूरतें पूरी करती है. यूरोपीय संघ रिलायंस के लिए एक बड़ा बाजार है और उसने रूस के ऊर्जा राजस्व को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर पाबंदियां लगाई हैं.
/financial-express-hindi/media/agency_attachments/PJD59wtzyQ2B4fdzFqpn.png)
Follow Us