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Sanchar Saathi App Controversy : संचार साथी ऐप को प्रियंका गांधी ने बताया "स्नूपिंग ऐप", रिजिजू बोले- हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार

Sanchar Saathi App को लेकर बड़ा विवाद. प्रियंका गांधी ने इसे “स्नूपिंग ऐप” कहा, जबकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू बोले - सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार.

Sanchar Saathi App को लेकर बड़ा विवाद. प्रियंका गांधी ने इसे “स्नूपिंग ऐप” कहा, जबकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू बोले - सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार.

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FE Hindi Desk
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Priyanka Gandhi criticising Sanchar Saathi App as snooping tool; Kiren Rijiju responding to controversy

Sanchar Saathi App Controversy : संचार साथी ऐप पर विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच जुबानी जंग तेज. (File Photo : ANI)

Sanchar Saathi App Controversy, Priyanka Gandhi vs Kiren Rijiju : संचार साथी ऐप को लेकर देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी जहां इसे "स्नूपिंग ऐप" बता रही हैं, वहीं केंद्र सरकार इस आरोप को खारिज करते हुए कह रही है कि इस मुद्दे पर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि विपक्ष चाहे तो इस पर संसद में खुलकर चर्चा की जा सकती है. 

हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार : रिजिजू

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने विपक्ष की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर बात करने से पीछे नहीं हट रही है. समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “संसद में कामकाज की सूची तैयार है और कई विषयों पर चर्चा हो सकती है. विपक्ष जो मुद्दे उठाना चाहता है, हम उस पर भी बहस को तैयार हैं. लेकिन संसद को रोकने के लिए मुद्दों को हथियार बनाना ठीक नहीं है.”

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रिजिजू ने आगे कहा कि सरकार विपक्ष की चिंताओं को नकार नहीं रही, लेकिन संसद का कामकाज बिना रुकावट के चलना जरूरी है. उनका कहना है कि देश में सिर्फ एक नहीं, कई गंभीर मुद्दे हैं जिन पर रचनात्मक बहस होनी चाहिए.

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ये स्नूपिंग ऐप है : प्रियंका गांधी

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने संचार साथी ऐप पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह नागरिकों की प्राइवेसी पर हमला है. उनका कहना है: “ये एक स्नूपिंग यानी जासूसी करने वाला ऐप है. नागरिकों को प्राइवेसी का अधिकार है. हर व्यक्ति को अपना संदेश परिवार और दोस्तों को भेजने का अधिकार है, बिना इस डर के कि सरकार सब कुछ देख रही है. देश को हर रूप में तानाशाही की ओर धकेला जा रहा है.” 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संसद में किसी भी मुद्दे पर चर्चा से बच रही है. प्रियंका गांधी ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र चर्चा पर चलता है, और साइबर सुरक्षा को लेकर बनाई जा रही नीतियों के जरिये नागरिकों के फोन की निगरानी नहीं होनी चाहिए.

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सरकार का आदेश असंवैधानिक : वेणुगोपाल

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) ने भी इस ऐप पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे हर फोन में अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने का सरकार का आदेश असंवैधानिक है. उन्होंने इसे निगरानी के लिए एक “डिस्टोपियन टूल” बताया. वेणुगोपाल ने अपने बयान में जॉर्ज ऑरवेल की प्रसिद्ध किताब 1984 का जिक्र करते हुए कहा, “बिग ब्रदर को हमारी निगरानी करने की छूट नहीं दी जा सकती है. (Big Brother cannot watch us).”

वेणुगोपाल का आरोप है कि ऐप के जरिए नागरिकों की लोकेशन और इंटरैक्शंस पर नजर रखी जाएगी, जो लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है.

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सरकार ने बताया फ्रॉड रोकने का टूल 

दूसरी तरफ, दूरसंचार मंत्रालय का कहना है कि 28 नवंबर 2025 को जारी दिशा-निर्देश नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हैं. मंत्रालय के मुताबिक ऐप का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि लोग नकली या चोरी के मोबाइल फोन ना खरीदें, और किसी संदिग्ध कॉल या संदेश को आसानी से रिपोर्ट कर सकें. मंत्रालय का कहना है कि संचार साथी ऐप और पोर्टल के जरिए लोग यह पता लगा सकते हैं कि उनका फोन सही है या नहीं. साथ ही वे स्टोलन डिवाइस, फर्जी कॉल या अवैध सिम कनेक्शन की शिकायत भी कर सकते हैं.

सरकार के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक हर फोन कंपनी को हर नए फोन में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करना होगा. साथ ही पहले से मौजूद डिवाइस पर इसे सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए भेजा जाएगा. फोन निर्माता कंपनियों को कहा गया है कि वे नए निर्देश को 90 दिनों में लागू करें और 120 दिनों में इस पर कम्प्लायंस रिपोर्ट दें. 

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