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Sanchar Saathi app : क्‍या है संचार साथी ऐप जिसे हर मोबाइल फोन में इंस्‍टाल करना जरूरी? कैसे करता है काम

Sanchar Saathi app installation rule : दूरसंचार विभाग ने मोबाइल हैंडसेट मैन्‍युफैक्‍चरर्स और इंपोटर्स को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि 90 दिन के भीतर सभी नए उपकरणों में धोखाधड़ी की सूचना देने वाला ऐप ‘संचार साथी’ लगा हो.

Sanchar Saathi app installation rule : दूरसंचार विभाग ने मोबाइल हैंडसेट मैन्‍युफैक्‍चरर्स और इंपोटर्स को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि 90 दिन के भीतर सभी नए उपकरणों में धोखाधड़ी की सूचना देने वाला ऐप ‘संचार साथी’ लगा हो.

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FE Hindi Desk
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CEIR database India : सीईआईआर केंद्रीय डेटाबेस है जहां देश के हर मोबाइल फोन का IMEI नंबर दर्ज रहता है. (AI Image)

What is Sanchar Saathi App : दूरसंचार विभाग ने मोबाइल हैंडसेट मैन्‍युफैक्‍चरर्स और इंपोटर्स को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि 90 दिन के भीतर सभी नए उपकरणों में धोखाधड़ी की सूचना देने वाला ऐप ‘संचार साथी’ पहले से लगा हो. पिछले महीने 28 नवंबर के निर्देश के अनुसार, आदेश जारी होने की तारीख से 90 दिन के बाद भारत में बनने वाले या इंपोर्ट होने वाले सभी मोबाइल फोन में यह ऐप होना अनिवार्य होगा.

आदेश में कहा गया कि केंद्र सरकार भारत में उपयोग में लाए जाने वाले मोबाइल हैंडसेट के हर मैन्‍युफैक्‍चरर और इंपोर्टर को इस बात का निर्देश देती है... इन निर्देशों के जारी होने के 90 दिन के भीतर, यह सुनिश्चित करें कि दूरसंचार विभाग द्वारा निर्दिष्ट संचार साथी मोबाइल एप्लिकेशन, भारत में उपयोग के लिए बनाए जाने वाले या इंपोर्ट होने वाले सभी मोबाइल हैंडसेट में पहले से लगा हो. 

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ऐसे सभी उपकरणों के लिए जो पहले ही बनाए जा चुके हैं और भारत में बिक्री चरण में हैं, मोबाइल हैंडसेट मैन्‍युफैक्‍चरर्स और इंपोर्टर्स को सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऐप को ‘इंस्टॉल’ कराने के लिए कदम उठाने होंगे. निर्देश में यह भी  गया कि भारत में उपयोग में लाए जाने वाले मोबाइल हैंडसेट के सभी मैन्‍युफैक्‍चरर्स और इंपोटर्स  इन निर्देशों के जारी होने के 120 दिन के भीतर दूरसंचार विभाग को अनुपालन रिपोर्ट देंगे. 

क्‍या है संचार साथी ऐप 

संचार साथी ऐप साइबर सिक्योरिटी टूल है. यह ऐप 2023 में एक वेब पोर्टल के रूप में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य नागरिकों को उनके मोबाइल नंबर और डिवाइस से जुड़ी सुरक्षा उपलब्ध कराना था. बाद में इसे और उपयोगी बनाते हुए जनवरी 2025 में मोबाइल ऐप के रूप में पेश किया गया. यह ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है और पूरी तरह मुफ्त है.

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यह सीधे सरकार की टेलीकॉम सिक्योरिटी प्रणाली (CEIR) से जुड़ा हुआ है. CEIR केंद्रीय डेटाबेस है जहां देश के हर मोबाइल फोन का IMEI नंबर दर्ज रहता है. संचार साथी ऐप फोन की सुरक्षा, पहचान की सुरक्षा और डिजिटल ठगी से बचाने का एक आसान और उपयोगी टूल है. यह आपके फोन को सुरक्षित रखता है, आपकी पहचान के दुरुपयोग को रोकता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत सरकारी सहायता उपलब्ध कराता है.

कैसे काम करता है यह ऐप 

यह ऐप यूजर्स को अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान संख्या (आईएमईआई) से संबंधित संदिग्ध दुरुपयोग की रिपोर्ट करने और मोबाइल उपकरणों में उपयोग किए जाने वाले आईएमईआई की प्रामाणिकता सत्यापित करने में सक्षम बनाता है. 

आपका मोबाइल चोरी हो जाए या कहीं खो जाए, तो यह ऐप तुरंत फोन को ब्लॉक कराने में मदद करता है. चोरी या खोए हुए फोन को ट्रैक कराने में मदद करता है. आपके नाम पर कितनी SIM चल रही हैं, यह भी बताता है.

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अगर फ्रॉड कॉल आती है तो आप उस नंबर की शिकायत सीधे इस ऐप से कर सकते हैं. किसी भी मोबाइल के IMEI नंबर को ऐप में डालकर जांच सकते हैं कि फोन असली है, चोरी का है, ब्लैकलिस्ट है. 

मोबाइल फोन के 15 अंक वाला आईएमईआई नंबर सहित दूरसंचार पहचान से जुड़ी चीजों के साथ छेड़छाड़ गैर-जमानती अपराध है और दूरसंचार अधिनियम 2023 के तहत इसके लिए तीन साल तक की कैद, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

संचार साथी ऐप का क्‍या है उद्देश्‍य?

सरकार साइबर फ्रॉड और टेलीकॉम दुरुपयोग रोकने, मोबाइल चोरी और स्मगलिंग पर लगाम लाने और नागरिक सुरक्षा और जागरूकता फैलाने के मकसद से संचार साथी ऐप को अनिवार्य कर रही है.

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अगर कंपनियों ने ऐसा नहीं किया तो क्‍या होगा 

दूरसंचार ग्राहक ऐप के माध्यम से धोखाधड़ी वाली कॉल, खोए हुए मोबाइल फोन आदि की भी रिपोर्ट कर सकते हैं. दूरसंचार विभाग ने मोबाइल फोन कंपनियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पहले से लगा संचार साथी ऐप पहली बार उपयोग या डिवाइस सेटअप के समय अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए आसानी से दिखाई दे और सुलभ हो. 

दूरसंचार विभाग के निर्देश में कहा गया है कि अगर कंपनियां नियमों का पालन करने में विफल रहती हैं, तो दूरसंचार अधिनियम 2023, दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियम 2024 और अन्य उपयुक्त कानूनों के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. वर्तमान में, सभी प्रमुख मोबाइल फोन कंपनियां एप्पल, सैमसंग, गूगल, विवो, शाओमी आदि भारत में अपने हैंडसेट बनाती हैं.

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