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sheikh hasina verdict: शेख हसीना के साथ उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्लाह अल-ममून को भी दोषी ठहराया गया है. (Wikimedia Commons Photo)
Sheikh Hasina sentenced to death for crimes against humanity in Bangladesh : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है. पिछले साल छात्र आंदोलन पर हुए हिंसक दमन का जिम्मेदार ठहराते हुए इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल (ICT-BD) ने मानवता-विरोधी अपराधों में दोषी पाया और शेख हसीना मौत की सजा सुनाई. महीनों तक चले मुकदमे के बाद यह फैसला आया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हसीना के साथ उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्लाह अल-ममून को भी दोषी ठहराया गया है.
सोमवार को कोर्ट में सिर्फ अल-ममून मौजूद थे. उन्होंने जुलाई में खुद को दोषी माना था और सरकारी गवाह के तौर पर बयान दिया था. फैसले से पहले ढाका में सुरक्षा सख्त कर दी गई थी. रविवार को शहर में कई जगह कच्चे बम फटने की घटनाएं हुई थीं. हालांकि कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन पहले से तनाव में डूबे शहर में माहौल और भारी हो गया.
ढाका पुलिस ने आगजनी, विस्फोट या पुलिस व आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों पर देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए. सेना, बॉर्डर गार्ड और दंगा नियंत्रक बल तैनात कर दिए गए, जबकि अब भंग किए जा चुके अवामी लीग ने दो दिन के बंद का ऐलान किया.
इधर, हसीना के बेटे और सलाहकार सजीब वाजेद ने चेतावनी दी है कि अगर अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध नहीं हटाया गया, तो उनके समर्थक फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव को रोकने के लिए सड़कों पर उतर सकते हैं. उनका कहना है कि हालात और बिगड़ सकते हैं.
हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश से भागकर भारत आ गई थीं और तब से नई दिल्ली में निर्वासन में रह रही हैं.
शेख हसीना का सफर
शेख हसीना, जो बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहीं, पहली बार 1980 के दशक में तब उभरीं जब वे सैन्य शासन के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रही थीं. वे 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बनीं.
उनका दूसरा कार्यकाल 2009 में शुरू हुआ, लेकिन इस दौरान उन पर मानवाधिकार उल्लंघन, गैर-न्यायिक हत्याओं, लोगों के गायब होने और विरोध दबाने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे—जो उनकी शुरुआती लोकतांत्रिक छवि के बिल्कुल उलट था.
पिछले साल हुए आंदोलनों में हुई मौतों को उन्होंने “दुर्भाग्यपूर्ण” कहा था, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश देने से इनकार किया था.
उनके पिता शेख़ मुजीबुर रहमान, जो बांग्लादेश के संस्थापक नेता थे, 1975 में परिवार के अधिकांश सदस्यों के साथ हत्या कर दिए गए थे. उस वक्त हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना (Sheikh Rehana) विदेश में थीं, इसलिए बच गईं.
कई हमलों और गिरफ्तारियों का सामना कर चुकीं हसीना अपनी राजनीतिक दृढ़ता के लिए जानी जाती हैं. AP के मुताबिक 1981 के बाद से उन पर कम से कम 19 बार जानलेवा हमले हो चुके हैं.
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