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SIM Card Alert: अपने नाम का सिम किसी को देना पड़ सकता है भारी, इन मामलों में जेल जाना तय

SIM Card Warning: जो लोग अपने नाम पर सिम कार्ड खरीदकर परिजनों या दोस्तों को देते हैं उनके लिए सरकार ने अलर्ट जारी किया है. सरकार का कहना है कि ऐसे सिम के दुरुपयोग पर असली मालिक ही जिम्मेदार माना जाएगा.

SIM Card Warning: जो लोग अपने नाम पर सिम कार्ड खरीदकर परिजनों या दोस्तों को देते हैं उनके लिए सरकार ने अलर्ट जारी किया है. सरकार का कहना है कि ऐसे सिम के दुरुपयोग पर असली मालिक ही जिम्मेदार माना जाएगा.

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FE Hindi Desk
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SIM Card Warning

सरकार का अलर्ट है कि अपने नाम का सिम दूसरों को देने पर उसका दुरुपयोग होने की जिम्मेदारी सिम के असली मालिक की ही होगी. (Screenshots: X/@DoT_India)

SIM Card Misuse Alert : डिजिटल इंडिया के इस दौर में मोबाइल फोन हमारे रोजमर्रा के जीवन का सबसे भरोसेमंद साथी बन चुका है. कॉलिंग, पेमेंट, ओटीपी वेरिफिकेशन से लेकर सोशल मीडिया तक हर काम मोबाइल नंबर और सिम कार्ड पर टिका है. लेकिन अक्सर लोग सुविधा के लिए अपने नाम पर लिए गए सिम कार्ड परिवार या दोस्तों को दे देते हैं. यह आदत पहले आम लगती थी और शायद ही कोई इसे किसी खतरे से जोड़ता था. लेकिन साइबर अपराधियों ने इसी ढिलाई को हथियार बना लिया है.

शेयर किए गए या दूसरों को दिए गए सिम कार्ड का उपयोग अब फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी, फ्रॉड लिंक, स्पैम और फिशिंग हमलों में किया जा रहा है. यही वजह है कि केंद्र सरकार ने अब नागरिकों को साफ चेतावनी दी है कि यदि आपके नाम का सिम किसी गलत काम में इस्तेमाल हुआ तो असली मालिक कोई भी हो, कानूनी जिम्मेदारी आपकी होगी.

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सरकार के नए नियमों के अनुसार यदि आपके नाम से जारी सिम कार्ड का दुरुपयोग होता है तो सिम का पंजीकृत मालिक ही उस नंबर से होने वाली गतिविधियों के लिए जिम्मेदार माना जाएगा. जांच एजेंसियां उसी व्यक्ति को प्राथमिक जिम्मेदार मानती हैं जिसके नाम पर सिम रजिस्टर्ड है.

IMEI छेड़छाड़, सिम के गलत इस्तेमाल पर हो सकती है जेल

सरकार ने मोबाइल के आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ और फर्जी सिम कार्ड का उपयोग भी बड़े अपराध की श्रेणी में रखा है. बढ़ते साइबर फ्रॉड को देखते हुए दूरसंचार विभाग ने दूरसंचार अधिनियम 2023 और साइबर सुरक्षा नियम 2024 के तहत सख्त प्रावधान लागू किए हैं. इन कानूनों के मुताबिक आईएमईआई नंबर बदलना, फर्जी दस्तावेजों से सिम कार्ड लेना या अपने नाम पर लिया गया सिम किसी और को देना दंडनीय अपराध है. इसके लिए तीन साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. ये अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं, यानी पुलिस तुरंत गिरफ्तारी कर सकती है.

दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियम 2024 में IMEI बदले जा सकने वाले किसी भी उपकरण को खरीदने, बेचने या उपयोग करने पर भी रोक लगा दी गई है.

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इन गलतियों से तुरंत बचें

सरकार ने लोगों को चेताया है कि वे छेड़छाड़ किए गए आईएमईआई वाले मोबाइल फोन, संदिग्ध मॉडेम, मॉड्यूल, सिम बॉक्स या ऐसे किसी भी उपकरण का उपयोग न करें जिसमें आईएमईआई बदला जा सकता है. फर्जी दस्तावेजों से सिम खरीदना, अपने नाम का सिम किसी को देना या कॉलर आईडी बदलने वाले ऐप का उपयोग करना भी अपराध की श्रेणी में आता है. सरकार ने स्पष्ट कहा है कि यदि आप अपने नाम का सिम किसी को देते हैं और वह व्यक्ति साइबर अपराध करता है तो कानून की नजर में आप भी दोषी माने जाएंगे.

सरकार ने नागरिकों को सावधान करते हुए कहा है कि वे निम्न गतिविधियों से दूर रहें:

  • छेड़छाड़ वाले IMEI वाला मोबाइल उपयोग न करें
  • फर्जी डाक्यूमेंट पर सिम कार्ड न लें
  • अपने नाम पर लिया सिम किसी को न दें
  • CLI बदलने वाले धोखेबाज ऐप या वेबसाइट का प्रयोग न करें
  • मॉडेम, सिम बॉक्स लाइक डिवाइस जिनमें IMEI बदला जा सकता है, उनका उपयोग पूरी तरह अवैध

सरकार ने यह भी स्पष्ट कहा है कि यदि आप अपना सिम किसी और को देते हैं और वह साइबर अपराध करता है, तो कानून की नजर में आप भी उतने ही अपराधी माने जाएंगे.

अब सवाल है कि अपने मोबाइल फोन की स्थिति या सिम कार्ड की जांच कैसे करें. इसके लिए आप संचार साथी पोर्टल और मोबाइल ऐप की मदद ले हैं. यह पोर्टल बताता है कि आपके नाम पर कितने सिम जारी हैं और आपके मोबाइल का आईएमईआई असली है या नहीं.

ऐसे लगाएं पता कि कितने सिम हैं आपके नाम 

दूरसंचार विभाग ने एक पोर्टल जारी किया था जिसके जरिए आप यह पता लगा सकते हैं कि आपके नाम पर कितनी सिम चल रही हैं.

  • इसके लिए आपको सबसे पहले tafcop.sancharsaathi.gov.in पर जाना होगा.
  • यहां पर आपको अपना मोबाइल नंबर डालना होगा.
  • इसके बाद आपके पास एक OTP आएगा.
  • इसे दर्ज करने पर एक नया पेज खुलेगा, जहां कैप्चा कोड दर्ज करना होगा.
  • आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा.
  • इसे फिल करके आप आसानी से पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे.
  • लॉगिन करने के बाद स्क्रीन पर एक लिस्ट खुलकर सामने आ जाएगी.
  • यहां से आप अपनी आईडी की जानकारी देकर आसानी से पता कर सकते हैं आपकी आईडी पर कौन-कौन से मोबाइल नंबर एक्टिवेट हैं. 

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ऐसे ब्लॉक करें सिम कार्ड 

अगर आपको यहां कोई ऐसा नंबर मिलता है जिसके बारे में आपको नहीं पता है तो आप उसकी TAFCOP पोर्टल के जरिए रिपोर्ट कर सकते हैं. फिर सरकार द्वारा इसकी जांच की जाएगी. जांच पूरी होने पर नंबर को ब्लॉक कर दिया जाएगा.

कितने दिनों का मिलता है समय

दूरसंचार विभाग (Telecom Department) द्वारा जारी आदेश के मुताबिक जिन कनेक्शंस को चिन्हित किया जाएगा, उनकी डेटा सर्विसेज समेत आउटगोइंग फैसिलिटीज को 30 दिनों के भीतर सस्पेंड कर दिया जाएगा और इनकमिंग सेवाओं को 45 दिनों के भीतर सस्पेंड किया जाएगा. यह अवधि ऐसे समय में मिलेगी जब सब्सक्राइबर ने वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू किया है और सरेंडर या डिसकनेक्ट का विकल्प चुना है.

  • अगर किसी चिन्हिंत नंबर के लिए फिर से वेरिफिकेशन नहीं होता है तो इस नंबर को 60 दिनों के भीतर बंद कर दिया जाएगा.
  • अगर कोई सब्सक्राइबर इंटरनेशनल रोमिंग में है या शारीरिक रूप से अस्वस्थ है या अस्पताल में भर्ती है तो उसे 30 दिनों का अतिरिक्त समय दिया जाएगा.
  • अगर कोई नंबर को किसी लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी या वित्तीय संस्थान ने चिन्हित किया है या पेस्की कॉलर के रूप में चिन्हित है तो आउटगोइंग फैसिलिटीज को 5 दिनों के भीतर, इनकमिंग कॉल को 10 दिनों के भीतर ही बंद कर दिया जाएगा. 
  • इसके बाद अगर कोई वेरिफिकेशन के लिए सामने नहीं आता है तो 15 दिनों के भीतर ऐसे नंबर स्थाई रूप से बंद कर दिए जाएंगे.

लोग अपने मोबाइल का IMEI नंबर आसानी से चेक कर सकते हैं. इसके लिए वे संचार साथी पोर्टल ceir.sancharsaathi.gov.in पर जा सकते हैं या संचार साथी मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं, जहां फोन का ब्रांड, मॉडल और कंपनी का नाम भी दिख जाता है. सरकार ने संचार साथी नाम की यह सुविधा इसलिए शुरू की है ताकि हर नागरिक अपने मोबाइल कनेक्शन को खुद ही जांच सके और उसे सुरक्षित रख सके. टेलीकॉम सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने सख्त निगरानी और नियम लागू किए हैं. इन नियमों का पालन करने से लोग टेलीकॉम धोखाधड़ी से बच सकते हैं और देश में सभी के लिए एक सुरक्षित मोबाइल नेटवर्क बना रहता है.

Telecom Telecom Department