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ओडिशा सरकार ने राज्य के वन और पर्यावरण विभाग के फील्ड स्टाफ के लिए खरीदी गई महिंद्रा थार गाड़ियों को लेकर सामने आए कथित घोटाले की स्पेशल ऑडिट कराने के आदेश दिए हैं.
देश के एक हिस्से में सरकारी विभाग द्वारा 7 करोड़ में खरीदी गईं थार और अलग से इक्विपमेंट्स जोड़ने पर खर्च हो गए 5 करोड़! जिसके बाद सरकार ने जांच बैठा दी है. मामला झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल से घिरे राज्य ओडिशा का है. राज्य में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार है.
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली ओडिशा सरकार ने वन और पर्यावरण विभाग के फील्ड स्टाफ के लिए खरीदी गई महिंद्रा थार गाड़ियों से जुड़े कथित घोटाले की स्पेशल ऑडिट कराने के आदेश दिए हैं. यह मामला गाड़ियों की खरीद से ज्यादा उनके कस्टमाइजेशन पर किए गए भारी खर्च को लेकर उठे सवालों के बाद सामने आया है.
जानकारी के मुताबिक, वन विभाग ने नवंबर 2024 में 51 ऑल-टेरेन व्हीकल (ATV) करीब 7.1 करोड़ रुपये में खरीदे थे, लेकिन इन गाड़ियों को खास जरूरतों के मुताबिक तैयार कराने यानी कस्टमाइजेशन पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं.
इस पूरे मामले की जांच अकाउंटेंट जनरल, ओडिशा की स्पेशल ऑडिट टीम करेगी. यह ऑडिट PCCF (वन्यजीव) कार्यालय से जुड़ी फाइलों पर केंद्रित होगा. इस संबंध में आदेश राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया द्वारा हस्ताक्षरित नोटशीट में दर्ज है. मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि अगर अनियमितता की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो मामले की पूरी जांच कराई जाएगी.
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ऑडिट के दौरान यह देखा जाएगा कि गाड़ियों के कस्टमाइजेशन के लिए मंजूरी की प्रक्रिया सही थी या नहीं. इस खर्च के लिए वित्त विभाग की सहमति ली गई थी या नहीं. लगाए गए उपकरणों की वास्तविक जरूरत थी या नहीं और क्या इसमें किसी बाहरी एजेंसी को शामिल किया गया था.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, हर गाड़ी में करीब 21 अलग-अलग उपकरण लगाए गए थे. अधिकारियों का दावा है कि यह खर्च गश्त को तेज करने, निगरानी बेहतर करने, अवैध गतिविधियों पर नजर रखने और जंगल की आग से निपटने के लिए किया गया. ओडिशा में जंगलों में आग एक बड़ी समस्या रही है, ऐसे में गाड़ियों को फायरफाइटिंग के हिसाब से भी तैयार किया गया.
एक अधिकारी ने बताया कि इन गाड़ियों को जंगलों के कठिन और दुर्गम इलाकों में चलने लायक बनाने के लिए कस्टमाइज किया गया था, ताकि गहन गश्त संभव हो सके. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर ऑडिट में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
बताया जा रहा है कि ये 51 ऑल-टेरेन व्हीकल राज्य के 22 वन्यजीव डिवीजनों में तैनात किए गए हैं. इनमें सबसे ज्यादा 9 गाड़ियां सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में लगाई गई हैं, जहां शिकार की घटनाएं अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.
गौरतलब है कि ओडिशा में संरक्षित वन क्षेत्र करीब 8,869 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का करीब 5.69% है. इसमें राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व, 19 वन्यजीव अभयारण्य और कंजर्वेशन रिजर्व शामिल हैं.
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