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पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद जिन मतदाताओं का नाम 2002 की वोटर लिस्ट से जुड़ नहीं पाएगा, उन्हें हियरिंग के लिए बुलाया जा सकता है. (Image : IE File)
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का पहला चरण पूरा हो चुका है. अब चुनाव आयोग 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा. इसके बाद जिन मतदाताओं का नाम 2002 की मतदाता सूची से लिंक नहीं हो पाएगा, उन्हें सुनवाई (हियरिंग) के लिए बुलाया जा सकता है.
ड्राफ्ट लिस्ट में नाम न होने पर देने होंगे ये डाक्यूमेंट
अगर ड्राफ्ट मतदाता सूची में आपका नाम नहीं है, तो भारतीय नागरिकता और वोटर होने की पात्रता साबित करने के लिए नीचे दिए गए 11 में से कोई एक या एक से अधिक दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:
- राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारी का पहचान पत्र या पेंशनर आईडी
- 1987 से पहले जारी किए गए दस्तावेज – पोस्ट ऑफिस, बैंक, LIC या किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- पासपोर्ट
- माध्यमिक (10वीं) या अन्य शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र
- राज्य सरकार के किसी विभाग/संस्था द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र
- वन अधिकार प्रमाण पत्र (Forest Right Certificate)
- जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) – केवल असम के लिए मान्य
- स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी पारिवारिक रजिस्टर
- सरकार द्वारा जारी जमीन या मकान आवंटन प्रमाण पत्र
ध्यान रहे सिर्फ आधार कार्ड को पहचान या नागरिकता के एकमात्र प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है और आपको सुनवाई के लिए भी नहीं बुलाया गया है, तो ऐसी स्थिति में आपको फॉर्म-6 के तहत Annexure-IV भरकर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराना होगा.
अगर आपका नाम 2002 की मतदाता सूची में है, तब भी सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है या नहीं—यह स्थानीय इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के विवेक पर निर्भर करेगा, ऐसा चुनाव आयोग ने साफ किया है.
फर्जी दस्तावेज देने वालों के लिए सख्त चेतावनी भी दी गई है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 337 के तहत नकली कागजात बनाने या जमा करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.
चुनाव आयोग के मुताबिक, हर आवेदन की सॉफ्टवेयर के जरिए बारीकी से जांच होगी और दी गई जानकारी के आधार पर तय किया जाएगा कि किसी व्यक्ति को सुनवाई के लिए बुलाया जाए या नहीं. पहले एक विधानसभा क्षेत्र में दिन में 50 सुनवाई तय की गई थीं, लेकिन अब आयोग जरूरत पड़ने पर इसे 100 से ज्यादा करने पर भी विचार कर रहा है, ताकि तय समय में पूरी प्रक्रिया पूरी की जा सके.
सवाल जवाब के जरिए समझिए जरूरी बात
अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं है और सुनवाई के लिए भी नहीं बुलाया गया, तो क्या करें?
चुनाव आयोग के मुताबिक, ऐसी स्थिति में आपको फॉर्म-6 के तहत Annexure-IV भरकर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराना होगा.
अगर आपका नाम 2002 की मतदाता सूची (SIR) में है, तो क्या फिर भी सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है?
हां, चुनाव आयोग के अनुसार यह फैसला इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के विवेक पर निर्भर करता है.
अगर कोई फर्जी दस्तावेज जमा करता है, तो क्या सजा होगी?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 337 के तहत फर्जी दस्तावेज बनाने या जमा करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.
यह कैसे तय होगा कि किसी को सुनवाई के लिए बुलाया जाए या नहीं?
चुनाव आयोग के मुताबिक, हर आवेदन को सॉफ्टवेयर के जरिए बारीकी से जांचा जाएगा. मतदाता द्वारा दी गई सभी जानकारियों का विश्लेषण किया जाएगा और उसी आधार पर सुनवाई का फैसला लिया जाएगा.
हर रोज कितनी सुनवाई होंगी?
जवाब: पहले एक विधानसभा क्षेत्र में दिन में 50 सुनवाई तय थीं, लेकिन अब चुनाव आयोग जरूरत पड़ने पर इसे 100 से ज्यादा करने पर भी विचार कर रहा है, ताकि तय समय में पूरी प्रक्रिया पूरी हो सके.
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