scorecardresearch

Sahyog website: क्या है सहयोग पोर्टल और आम लोगों के लिए क्यों है अहम?

Sahyog पोर्टल से एक साल में WhatsApp, Facebook, YouTube समेत 19 प्लेटफॉर्म्स के डिजिटल कंटेंट पर हर रोज 6 ब्लॉक ऑर्डर आए. ऐसे में आइए जानते हैं क्या है और लोगों के लिए क्यों है अहम?

Sahyog पोर्टल से एक साल में WhatsApp, Facebook, YouTube समेत 19 प्लेटफॉर्म्स के डिजिटल कंटेंट पर हर रोज 6 ब्लॉक ऑर्डर आए. ऐसे में आइए जानते हैं क्या है और लोगों के लिए क्यों है अहम?

author-image
FE Hindi Desk
New Update
Sahyog Portal 2

डिजिटल दुनिया की निगरानी से लेकर विवादों के केंद्र तक: क्या है ‘सहयोग’ पोर्टल और आम लोगों के लिए क्यों है अहम. (Screenshots : sahyog.mha.gov.in)

What Is the Sahyog Portal : भारत में बढ़ते साइबर क्राइम और इलीगल डिजिटल कंटेंट पर नकेल कसने के लिए शुरू किया गया ‘सहयोग’ पोर्टल बीते कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में है. मार्च 2025 में यह पोर्टल तब बड़े विवाद में आया, जब एलन मस्क की कंपनी X (पूर्व में ट्विटर) ने भारत सरकार के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया. अब, पोर्टल के एक साल के कामकाज को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट ने एक बार फिर इसे चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सहयोग पोर्टल के जरिए एक साल में WhatsApp, Facebook, YouTube समेत 19 ऑनलाइन इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को औसतन हर दिन 6 डिजिटल कंटेंट ब्लॉक करने के आदेश दिए गए. रिपोर्ट में सबसे ज्यादा ब्लॉकिंग WhatsApp पर इस पोर्टल के जरिए ब्लॉक ऑर्डर आए. ऐसे में सवाल उठता है कि सहयोग पोर्टल आखिर है क्या, और यह आम लोगों के लिए कितना फायदेमंद है?

Advertisment

Also read : Sahyog पोर्टल से WhatsApp, Facebook समेत डिजिटल कंटेंट पर निगरानी तेज, एक साल में रोज औसतन 6 ब्लॉक ऑर्डर

क्या है सहयोग पोर्टल (What Is the Sahyog Portal?)

सहयोग पोर्टल सरकारी एजेंसियों और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच एक साझा डिजिटल मंच है. इसका उद्देश्य ऑनलाइन गैरकानूनी कंटेंट की रिपोर्टिंग, उसे हटाने और जांच से जुड़े डेटा अनुरोधों को आसान बनाना है. केंद्र और राज्य सरकारों की अधिकृत एजेंसियां इस पोर्टल के जरिए सीधे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेज सकती हैं.

कैसे करता है काम और क्यों है जरूरी?

पहले किसी अवैध पोस्ट या अकाउंट को हटाने के लिए जांच अधिकारियों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स से संपर्क करना पड़ता था, जिससे कार्रवाई में देरी होती थी. ‘सहयोग’ पोर्टल ने इस प्रक्रिया को एक जगह केंद्रीकृत कर दिया है.
आईटी एक्ट, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत बने इस सिस्टम में नोडल अधिकारी अवैध कंटेंट की जांच कर सीधे संबंधित प्लेटफॉर्म को नोटिस भेजते हैं. नोटिस मिलने के बाद इंटरमीडियरी जैसे WhatsApp, Facebook, YouTube को 36 घंटे के भीतर उस कंटेंट को हटाना होता है, वरना कानूनी जिम्मेदारी तय की जा सकती है.

Also read : Aadhaar App : घर में काम करने वाली मेड हो या फिर डिलीवरी बॉय, आधार ऐप से लोगों की सही पहचान करना है आसान

आम लोगों को क्या फायदा?

इस व्यवस्था का सीधा असर आम इंटरनेट यूजर्स पर पड़ता है. फर्जी निवेश विज्ञापनों और धोखाधड़ी वाले ऐप्स पर तेजी से कार्रवाई होती है, बच्चों से जुड़े संवेदनशील कंटेंट को तुरंत हटाया जाता है और डीपफेक व अफवाहों पर लगाम लगती है. साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय होती है और भारत की डिजिटल संप्रभुता मजबूत होती है.

गृह मंत्रालय के एक आंकड़ें के अनुसार, 21 अक्टूबर 2024 से शुरू हुए सहयोग पोर्टल के जरिए करीब 11 महीनों में 68 हजार से अधिक अवैध कंटेंट हटाए जा चुके हैं, और सफलता दर 99 फीसदी से ज्यादा रही है. पोर्टल की वैधता को चुनौती देने वाली X की याचिका को कर्नाटक हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए साफ कहा कि सहयोग पोर्टल एक वैध और संवैधानिक व्यवस्था है, और सोशल मीडिया कंपनियां भारत में बिना निगरानी के काम नहीं कर सकतीं.

Also read : Aadhaar My Contact Card : आधार ऐप में माय कॉन्टैक्ट कार्ड क्या है? कहां और कैसे कर सकेंगे इस्तेमाल

हालांकि सहयोग पोर्टल सीधे अधिकारियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बीच काम करता है, लेकिन आम नागरिक की भूमिका भी उतनी ही जरूरी है. साइबर अपराध का शिकार होने पर 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराना और संदिग्ध या गैरकानूनी कंटेंट को रिपोर्ट करना इस पूरी व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी है

Cyber And Space Home Ministry Cyber Crime