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Delhi Blast Network : कौन हैं फैसल इशफाक भट और डॉ उकाशा ? दिल्ली रेड फोर्ट धमाके की जांच में सामने आया विदेशी हैंडलर्स का बड़ा नेटवर्क

Delhi Red Fort Blast Foreign Network : दिल्ली रेड फोर्ट धमाके में अधिकारियों ने 3 “विदेशी हैंडलर्स” की पहचान की है. जिनके नाम फैसल इशफाक भट, डॉ उकाशा और हाशिम बताए जा रहे हैं.

Delhi Red Fort Blast Foreign Network : दिल्ली रेड फोर्ट धमाके में अधिकारियों ने 3 “विदेशी हैंडलर्स” की पहचान की है. जिनके नाम फैसल इशफाक भट, डॉ उकाशा और हाशिम बताए जा रहे हैं.

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Sakshi Kuchroo
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Delhi Bomb Blast Jasir Bilal Wani Accused

- Delhi Blast Case Foreign Network : रेड फोर्ट के पास कार बम धमाके के मुख्य आरोपी जसिर बिलाल वानी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया. Photograph: (PTI)

 Delhi Blast Case: दिल्ली रेड फोर्ट धमाके और उससे जुड़े जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल की जांच कर रही एजेंसियों ने एक बड़े नेटवर्क का पता लगाया है इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह नेटवर्क  “विदेशी हैंडलर्स” से जुड़ा हुआ है जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान-आधारित कश्मीर से लेकर भारत में लोकल ऑपरेटिव तक फैला हुआ है. मुख्य आरोपी उमर नबी इसी नेटवर्क का हिस्सा था, लेकिन जांच में यह भी सामने आया है कि इसमें और भी लोग शामिल थे.

कौन हैं ये विदेशी हैंडलर्स?

दिल्ली रेड फोर्ट धमाके और जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल से जुड़े मामले में जांच अधिकारियों ने कम से कम दो प्रमुख “विदेशी हैंडलर्स” की पहचान की है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ये हैंडलर्स फैसल इश्फाक भट और डॉ. उक़ाशा हैं. माना जा रहा है कि ये पाकिस्तान-आधारित कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान में रहते हैं.

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जांच में एक तीसरे व्यक्ति, हाशिम की पहचान भी हुई है. इंडियन एक्सप्रेस को जांचकर्ताओं ने बताया कि हाशिम गिरफ्तार क्लेरिक मौलवी इरफान अहमद वागे और मॉड्यूल के अन्य सदस्यों के साथ टेलीग्राम के माध्यम से संपर्क में था. जांच एजेंसियां अबफोन कॉल्स, टेलीग्राम चैट्स और सभी फंड रूट्स का पता लगा रही हैं. इसके तहत संदिग्धों के बैंक खाते भी जांच के दायरे में आए हैं, जिनमें करीब 2 लाख रुपये फ्रीज किए गए हैं.

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पहला सुराग कैसे सामने आया?

जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पिछले महीने “विदेशी हैंडलर्स” और “लोकल ऑपरेटिव्स” के बीच संबंध के संकेत मिले थे. उन्हें यह सुराग तब मिला जब उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सिंबल वाले धमकी भरे पोस्टर की जांच शुरू की. ये पोस्टर अचानक 19 अक्टूबर को दुकानों और सड़कों के किनारे दिखाई दिए थे.

पोस्टर मामले में तीन गिरफ्तार, जिम्मेदारी कबूली

20 अक्टूबर को पुलिस ने नौगाम से यासिर-उल-अशरफ, आरिफ निसार और मकसूद अहमद दार नाम के तीन पुरुषों को गिरफ्तार किया. पूछताछ में इन तीनों ने बताया कि उन्होंने धमकी भरे पोस्टर बनाए और चिपकाए थे. जांचकर्ताओं के अनुसार यासिर ने संदेश लिखा था, आरिफ ने अपने फोन पर उर्दू-फॉन्ट ऐप का इस्तेमाल कर डिज़ाइन तैयार किया और मकसूद ने इसे घर पर प्रिंट किया था. 

पुलिस ने पाया कि आरिफ निसार कथित रूप से पाकिस्तान स्थित JeM-से जुड़े हैंडलर द्वारा चलाए जा रहे टेलीग्राम ग्रुप में सक्रिय था. इन हैंडलर के नाम हंजुल्ला और  उमर बिन खत्ताब बताए गए हैं. इसके अलावा तीनों  गिरफ्तार व्यक्तियों का क्लेरिक मौलवी इरफान अहमद वागे से साझा संपर्क था. 

मौलवी इरफान अहमद वागे को 27 अक्टूबर को शोपियां के नादीगाम से गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों के अनुसार इरफ़ान अहमद से की गई पूछताछ ने पूरा मामला ही बदल दिया. पहले जो घटना केवल एक छोटे पैमाने का प्रचार अभियान लग रही थी, वह अब राज्यों में फैले बड़े आतंकवादी नेटवर्क की पहली परत के रूप में सामने आई.

जांचकर्ताओं के अनुसार, मौलवी इरफान अहमद वागे ने स्वीकार किया कि वह यासिर, आरिफ और मकसूद को जानता था. उसने जाचकर्ताओं को यह भी बताया कि एक बार उसने इनमें से किसी एक को पिस्तौल और ग्रेनेड दिया था. ये हथियार उसने चनापोरा के अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद के मिलिटेंट मुश्ताक अहमद भट से लिए थे. बाद में वागे ने ये हथियार वापस ले लिए थे.

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कश्मीर से बाहर फैला नेटवर्क

मौलवी इरफान अहमद वागे ने जांचकर्ताओं को बताया कि दो साल पहले फरीदाबाद के एक अस्पताल में उनकी एक अप्रत्याशित मुलाकात हुई. वह एक रिश्तेदार के इलाज के लिए अस्पताल गए थे. इस दौरान उनकी मुलाकात कश्मीरी डॉक्टर डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई से हुई. जांच में जैसे ही गनई का नाम सामने आया, मामले की जांच काफ़ी व्यापक हो गई. पता चला कि नेटवर्क नौगाम से फरीदाबाद, सहारनपुर और नूह तक फैल चुका था. जहाँ किराए के एक अपार्टमेंट और कॉलेज हॉस्टल्स में कथित तौर पर डॉक्टरों का एक समूह हमले की तैयारी कर रहा था. 

मौलवी इरफान अहमद वागे के बयान के बाद पुलिस ने गांदरबल  से ज़मीर अहमद जिसे मुतलशा के नाम से भी जाना जाता है,को 27 अक्टूबर को गिरफ्तार किया. यह गिरफ़्तारी धमाके से लगभग दो हफ्ते पहले हुई थी. जांच में पता चला कि ज़मीर “फ़रज़ंदान-ए-दारुल उलूम देवबंद” और “क़ाफ़िला-ए-ग़ुरबा” जैसे टेलीग्राम ग्रुप्स में सक्रिय था और कथित तौर पर हैंडलर्स हाशिम, इश्फाक और डॉ. उक़ाशा से सीधे संपर्क में था जिनके अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान या पाक-अधिकारित कश्मीर (PoK) में होने का अनुमान है. पुलिस के अनुसार, ज़मीर ने पैसे की डिलीवरी, हथियार सप्लाई और अन्य मदद वागे के साथ मिलकर करने की बात स्वीकार की.

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ज़मीर अहमद और मौलवी इरफान वागे से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने 29 अक्टूबर को अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई को गिरफ्तार किया. जांच में पता चला कि उसके फ़ोन में मुसाइब, अरशद, जुगनू और मुजतबा नाम से कई टेलीग्राम आईडीज़ थीं जिनका इस्तेमाल वह दूसरों से संपर्क करने के लिए कर रहे थे. इन लोगों में डॉ.अदील अहमद रठार, जिन्हें बाद में सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया और डॉ. उमर नबी जिसने बाद में रेड फोर्ट धमाका किया शामिल थे.

जांचकर्ताओं का कहना है कि गनई ने इस बात की भी पुष्टि की कि यह समूह हैंडलर्स हाशिम, इश्फाक और डॉ. उक़ाशा के संपर्क में था. उसने  आगे यह भी बताया कि यह समूह विभिन्न चैनलों के माध्यम से बड़ी मात्रा में पैसे जुटाता था.

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Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

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