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Maduro in US Custody: वेनेजुएला पर हमले के बाद अमेरिका की सेना राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पड़कर न्यूयॉर्क ले आई है. मादुरो की ये तस्वीर राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शेयर की है. (Photo: Truth Social/Donald Trump)
Trump’s strike on Venezuela explained: वेनेजुएला एक ऐसा देश है, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. अनुमान है कि वहां करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार मौजूद है, यानी दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा. यही वजह है कि वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ( Nicolas Maduro) को पकड़कर अमेरिका लाए जाने को सिर्फ एक राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा. कई जानकारों का मानना है कि वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा करने का इरादा ही इस कार्रवाई का असली मकसद है.
यह तेल और ट्रंप की दबंग बनने की चाहत का मामला : कमला हैरिस
अमेरिका की पूर्व उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस ने ट्रंप की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, “वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप ने जो किया, उससे अमेरिका ज़्यादा सुरक्षित, ज़्यादा मज़बूत या ज़्यादा अफोर्डेबल नहीं बन जाएगा. मादुरो एक क्रूर, अवैधानिक तानाशाह है. लेकिन इससे यह सच नहीं बदल जाता कि यह कार्रवाई गैर-कानूनी और नासमझी भरी थी. हमने यह फिल्म पहले भी देखी है. सत्ता बदलने या तेल के लिए युद्ध, जिन्हें पहले ताकत के तौर पर पेश किया जाता है, लेकिन आगे चलकर इससे अराजकता पैदा होती है. जिसकी कीमत अमेरिकी परिवारों को चुकानी पड़ती है. अमेरिकी लोग यह नहीं चाहते, और वे झूठ सुन-सुनकर थक गए हैं."
कमला हैरिस ने अपने ट्वीट में साफ तौर पर लिखा है, "यह ड्रग्स या लोकतंत्र के बारे में नहीं है. यह तेल और डोनाल्ड ट्रंप की क्षेत्रीय दबंग बनने की चाहत का मामला है. अगर उन्हें इनमें से किसी की भी परवाह होती, तो वे किसी दोषी ड्रग तस्कर को माफ़ नहीं करते या मादुरो के क्रोनीज के साथ डील करते समय वेनेजुएला के असली विपक्ष को नज़रअंदाज़ नहीं करते."
हैरिस ने ट्रंप के हमले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "राष्ट्रपति अमेरिकी सैनिकों को खतरे में डाल रहे हैं, अरबों खर्च कर रहे हैं, एक इलाके को अस्थिर कर रहे हैं, जिसमें कोई कानूनी अधिकार, कोई एग्जिट प्लान और देश का कोई फायदा दिखाई नहीं दे रहा है.”
Donald Trump’s actions in Venezuela do not make America safer, stronger, or more affordable.
— Kamala Harris (@KamalaHarris) January 4, 2026
That Maduro is a brutal, illegitimate dictator does not change the fact that this action was both unlawful and unwise. We’ve seen this movie before. Wars for regime change or oil that…
अमेरिका की कार्रवाई के बाद क्यों बढ़ी तेल की चर्चा?
वेनेजुएला की राजधानी कराकस पर शनिवार को हुए हवाई हमलों के बाद अमेरिकी सेना द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका लाए जाने से दुनिया का ध्यान फिर से वेनेजुएला के तेल पर टिक गया है. इस ऑपरेशन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब वेनेजुएला को अमेरिका “चलाएगा”, जब तक कि वहां “सुरक्षित, सही और समझदारी भरा बदलाव” सुनिश्चित नहीं हो जाता.
हालांकि ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि अमेरिका अब वेनेजुएला को किस तरह से और किस रूप में “चलाएगा”,लेकिन अमेरिका जिस तरह किसी संप्रभु देश पर हमला करके रातोंरात उसके राष्ट्रपति को जबरन उठाकर ले आया, उससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने कुछ अहम नैतिक सवाल जरूर खड़े हो गए हैं.
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (US Defense Secretary Pete Hegseth) ने CBS न्यूज़ से कहा कि निकोलस मादुरो को पकड़ने से अमेरिकियों को फ़ायदा होगा. उन्होंने इस हमले के बाद वेनेज़ुएला की दौलत और संसाधनों तक अमेरिका की पहुंच का ज़िक्र करते हुए कहा, "हम यह पक्का कर सकते हैं कि हमें और ज़्यादा दौलत और संसाधन मिलें, जिससे अमेरिकी खून बहाए बिना उनका इस्तेमाल किया जा सके."
वेनेजुएला के पास 17.3 खबर डॉलर का तेल
यूएस एनर्जी इनफॉर्मेशन ए़डमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. अगर मौजूदा कीमत लगभग 57 डॉलर प्रति बैरल मानी जाए, तो उसके 303 अरब बैरल तेल की कुल कीमत करीब 17.3 ट्रिलियन डॉलर बैठती है. यह रकम अमेरिका और चीन को छोड़कर बाकी सभी देशों की साझा GDP से भी ज्यादा है.
यानी इस तेल पर कब्जा रखने वाला देश सिर्फ एनर्जी मार्केट ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी काफी असर डाल सकता है. इसी वजह से वेनेजुएला पर ट्रंप के हमले और उसके पास मौजूद तेल भंडार को आपस में जोड़कर देखा जा रहा है.
यह ऑयल और मिनरल हथियाने की लड़ाई है?
भारत के पूर्व विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी राय जाहिर करते हुए साफ-साफ कहा, “मेरी नजर में इस हमले की वजह लोकतंत्र या डेवलपमेंट से नहीं जुड़ी है. यह मिनरल्स और ऑयल से जुड़ा मामला है. कई बार लोग यह नहीं समझते कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. ट्रंप प्रशासन और राष्ट्रपति ट्रंप वेनेजुएला पर कंट्रोल करना चाहते हैं.”
वेनेजुएला की सरकार ने भी आरोप लगाया है कि अमेरिकी हमले का मकसद देश के तेल और खनिज संसाधनों पर कब्जा करना है. इस सोच को और मजबूती तब मिली जब हमले के बाद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका वेनेजुएला की ऑयल इंडस्ट्री में “बहुत मजबूती से शामिल” रहेगा.
अमेरिका के लिए वेनेजुएला का तेल इतना जरूरी क्यों?
रणनीतिक तौर पर वेनेजुएला का क्रूड ऑयल अमेरिका के लिए काफी अहम है. अमेरिका में निकलने वाला ज्यादातर क्रूड ऑयल तेल हल्का होता है, जो पेट्रोल के लिए बेहतर है, लेकिन डीजल, एस्फॉल्ट (asphalt) और हैवी इंडस्ट्रियल फ्यूल के तौर पर उतना उपयोगी नहीं है.
वेनेजुएला का क्रूड ऑयल भारी (heavy crude) होता है, जो इस गैप को भरने में कारगर है. अमेरिका की कई रिफाइनरीज़ भी खास तौर पर इसी तेल को रिफाइन करने के लिए डिजाइन की गई हैं. सीनियर मार्केट एनालिस्ट फिल फ्लिन ने CNN से कहा कि, “अमेरिका की कई रिफाइनरीज़ वेनेजुएला के क्रूड ऑयल को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं और उसे प्रॉसेस करने का काम ज्यादा बेहतर तरीके से करती हैं.”
क्या तेल के गणित में फंस गए मादुरो ?
फिल फ्लिन का मानना है कि अगर हालात इसी तरह आगे बढ़ते हैं और अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला की ऑयल इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाने का मौका मिलता है, तो इसका असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ सकता है. उनका कहना है कि “अगर यह प्रॉसेस ऐसे ही आगे बढ़ती रही और अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला में अपने पांव जमाने की छूट मिल गई, तो यह अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है.”
वहीं UBS के स्ट्रैटजिस्ट जियोवानी स्टाउनोवो(Giovanni Staunovo)का कहना है, “अभी असर का पूरा आकलन करना जल्दबाजी होगी, लेकिन अमेरिका द्वारा तेल टैंकरों को रोकने के बाद से वेनेजुएला का ऑयल प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट लगातार गिरता रहा है.”
इंटरनेशनल ऑयल मार्केट का बड़ा खिलाड़ी रहा है वेनेजुएला
1970 के दशक में वेनेजुएला का तेल उत्पादन करीब 35 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जो उस समय अंतरराष्ट्रीय उत्पादन का 7 प्रतिशत से ज्यादा था. लेकिन राष्ट्रपति मादुरो के शासन में हालात तेजी से बदले.
पिछले साल वेनेजुएला का उत्पादन घटकर करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो अंतरराष्ट्रीय सप्लाई का एक प्रतिशत से भी कम है. मादुरो के 2013 में सत्ता संभालने के समय मौजूद उत्पादन की तुलना में भी यह आधे से कम है.
उत्पादन में इस गिरावट की बड़ी वजह वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी पाबंदी रही है. इसके अलावा निवेश की कमी, खराब मैनेजमेंट, बुनियादी ढांचे की बदहाली और भ्रष्टाचार जैसे आरोप भी लगते रहे हैं. इन हालात में वेनेजुएला की रिफाइनरीज की हालत खस्ता हो गई.
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर बड़ा असर क्यों नहीं
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में ज्यादा घबराहट नहीं दिखी. वजह साफ है. मौजूदा स्थिति में वेनेजुएला इतना तेल पैदा ही नहीं करता कि उसकी सप्लाई रुकने से कीमतों में बड़ा उछाल आ जाए. यही कारण है कि अमेरिकी हमले जैसी बड़ी घटना के बावजूद बाजार तुलनात्मक रूप से शांत बना हुआ है.
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