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8th Pay Commission Update : सरकार ने DA को मूल वेतन में मर्ज करने से जुड़े सवाल पर संसद में साफ -साफ जवाब दिया है. (Image : Freepik)
8th Pay Commission DA merger latest update: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर पिछले कुछ हफ्तों से चर्चा तेज है. एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या इस बार सरकार महंगाई भत्ता (DA) को मूल वेतन (Basic Pay) में जोड़ेगी? या फिर पहले की तरह ही हर 6 महीने में इंफ्लेशन के हिसाब डीए अपडेट होता रहेगा? संसद में सरकार ने इस पर अपना रुख साफ कर दिया है, साथ ही 8वें वेतन आयोग पर भी आधिकारिक अपडेट दिया है.
DA को बेसिक पे में जोड़ने का प्रस्ताव नहीं : सरकार
शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) के पहले ही दिन लोकसभा (Lok Sabha) में सांसद आनंद भदौरिया ने सरकार से दो सीधे सवाल पूछे. पहला, क्या 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को आधिकारिक तौर पर नोटिफाई कर दिया गया है? और दूसरा सवाल ये कि क्या बढ़ती महंगाई को देखते हुए केंद्र सरकार महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मिलाने पर विचार कर रही है?
सरकार की ओर से दिए गए लिखित जवाब में वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) की तरफ से जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि 3 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना के तहत 8वें वेतन आयोग का गठन कर दिया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि आयोग में जस्टिस रंजन प्रभा देसाई चेयरपर्सन, प्रो. पुलक घोष पार्ट-टाइम मेंबर और पंकज जैन मेंबर-सेक्रेटरी होंगे.
लेकिन महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) यानी DA को बेसिक पे में मर्ज करने के सवाल पर मंत्री ने साफ कहा कि “फिलहाल मौजूदा महंगाई भत्ते को बेसिक पे में मिलाने का कोई प्रस्ताव सरकार के सामने विचाराधीन नहीं है....डीए, डीआर के रेट हर 6 महीने पर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के आधार पर संशोधित किए जाते हैं.” उनका यह बयान साफ करता है कि फिलहाल AICPI-IW के आधार पर हर 6 महीने में DA और महंगाई राहत (Dearness Relief) यानी DR में संशोधन की मौजूदा व्यवस्था अभी जारी रहेगी.
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ToR को लेकर क्यों नाराज हैं कर्मचारी यूनियन
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference) यानी ToR सामने आने के बाद से कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स अपनी नाराजगी जता रहे हैं. उनकी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि इस बार वेतन आयोग के ToR में पेंशनर्स का साफ तौर पर जिक्र नहीं किया गया है. जबकि पिछले वेतन आयोग (7th Pay Commission or 7th CPC) की ToR में पेंशनर्स को साफ तौर पर शामिल किया गया था.
इतना ही नहीं, यूनियनों की शिकायत यह भी है कि नए वेतनमान के लागू होने की तारीख भी 8वें वेतन आयोग के नोटिफिकेशन में दर्ज नहीं है. नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ साइड का आरोप है कि सरकार ने उनके सुझावों को शामिल नहीं किया, जबकि उन्होंने मिनिमम वेतन तय करने के फॉर्मूले, वेतन संरचना (Salary Structure) में सुधार और पे-कम्प्रेशन दूर करने जैसे मुद्दे उठाए थे. उनकी राय में 8th CPC की भाषा पहले की तुलना में अधिक सीमित है, जो आयोग के दायरे को तंग कर सकती है और इसका असर भत्तों से लेकर पेंशन तक पर पड़ सकता है.
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सरकारी अधिसूचना में क्या शामिल है?
सरकार की अधिसूचना में आयोग को एक व्यापक जिम्मेदारी दी गई है, जिसमें केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, सुरक्षा बलों, अखिल भारतीय सेवाओं, केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों और न्यायपालिका के लिए वेतन और भत्तों की समीक्षा शामिल है. आयोग को वेतन संरचना सुझाने, बोनस और परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव देखने और NPS व गैर-NPS कर्मचारियों के ग्रेच्युटी व पेंशन सिस्टम की समीक्षा करने (Examining gratuity and pension for both NPS and non-NPS employees) का काम दिया गया है.
आयोग के पास अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय है. जरूरत पड़ने पर वह अंतरिम सिफारिशें भी दे सकता है.
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DA को बेसिक पे में मर्ज करने का महत्व क्या है?
कई कर्मचारी संगठन लगातार DA मर्जर की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि साल में दो बार DA बढ़ाने से महंगाई के पूरे असर की भरपाई नहीं होती और कर्मचारियों की परचेजिंग पावर पर इसका सीधा असर पड़ता है. अगर DA को मूल वेतन में शामिल किया जाता है, तो न केवल बेसिक पे बढ़ता है बल्कि HRA, TA और अन्य भत्तों का कैलकुलेशन भी उसी आधार पर होता है. जिससे कुल मिलाकर वेतन बढ़ जाते हैं.
लेकिन सरकार ने अब साफ कर दिया है कि “ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं हो रहा है”, जिससे कर्मचारियों को इस तरह की राहत मिलने की संभावना बहुत कम रह गई है.
आगे क्या होने वाला है?
अब 8th Pay Commission औपचारिक तौर पर अपना काम शुरू करेगा. मंत्रालयों से आंकड़े लिये जाएंगे, विचार-सुझाव मांगे जाएंगे और कर्मचारी संगठनों से भी सुझाव लिए जाएंगे. लेकिन ToR से जुड़ी नाखुशी को देखते हुए आने वाले महीनों में कर्मचारी यूनियनें इस मामले में अपनी तरफ से दबाव डालने की कोशिश कर सकती हैं.
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