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8th Pay Commission की किस बात से परेशान हैं 69 लाख पेंशनर? राज्यसभा में पूछे गए सवाल ने क्यों बढ़ाई चिंता

8th Pay Commission को लेकर पेंशनर्स की बेचैनी बढ़ गई है. राज्यसभा में लिस्टेड सवालों से ये चर्चा तेज हुई है कि क्या नए वेतन आयोग के ToR में पेंशन संशोधन शामिल नहीं है?

8th Pay Commission को लेकर पेंशनर्स की बेचैनी बढ़ गई है. राज्यसभा में लिस्टेड सवालों से ये चर्चा तेज हुई है कि क्या नए वेतन आयोग के ToR में पेंशन संशोधन शामिल नहीं है?

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FE Hindi Desk
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8th Pay Commission ToR Pension Revision Rajya Sabha Question, 8th Pay Commission को लेकर चिंतित पेंशनर और राज्यसभा में सवाल

8th Pay Commission के ToR पर उठ रहे सवाल, पेंशनरों में बढ़ी चिंता. (AI Generated Image)

8th Pay Commission ToR Pension Revision: केंद्र सरकार के करीब 69 लाख पेंशनर इन दिनों काफी चिंता में हैं. वजह है 8वें वेतन आयोग (8th CPC) को लेकर उठ रहा एक सवाल. दरअसल यह सवाल 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference) यानी ToR को लेकर उठ रहा है. आशंका ये है कि क्या 8वें वेतन आयोग को पेंशन में संशोधन का काम नहीं दिया गया है? जबकि इससे पहले वेतन आयोग यह काम करते रहे हैं. राज्यसभा में लिस्टेड सवाल की वजह से ऐसी चिंताओं में और इजाफा हुआ है. अगर यह आशंका सच साबित हुई, तो दशकों से चली आ रही पेंशन रिविजन की व्यवस्था बदल सकती है.

राज्यसभा में लिस्टेड सवाल से क्यों बढ़ी बेचैनी

दरअसल, संसद का अगला शीतकालीन सत्र सोमवार 1 दिसंबर 2025 को शुरू होने जा रहा है. उससे पहले राज्यसभा में सांसद जावेद अली खान और रामजी लाल सुमन की तरफ से 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर लिस्ट किए गए सवाल की चर्चा तेज हो गई है. इन दोनों सांसदों ने सरकार से पूछा है कि क्या सरकार ने 8वें वेतन आयोग के ToR से पेंशन में संशोधन को बाहर कर दिया है?

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यह सवाल इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले तमाम वेतन आयोगों के ToR  में वेतन के साथ ही साथ पेंशन में संशोधन भी शामिल रहा है. लेकिन इस बार जारी नोटिफिकेशन में इसे लेकर या स्पष्टता नहीं है. यही अस्पष्टता लाखों पेंशनरों के मन में यह डर पैदा कर रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि इस बार नए वेतन आयोग को पेंशन पर फैसला लेने का अधिकार दिया ही नहीं गया है.

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ToR से बढ़ी कर्मचारी यूनियनों की चिंता

8th Pay Commission के ToR नोटिफाई होने के बाद कर्मचारी संगठनों और पेंशनर यूनियनों ने कुछ अहम कमियों की ओर ध्यान दिलाया है. कई यूनियनों का कहना है कि इस बार ToR में पेंशन संशोधन को लेकर स्पष्टता नहीं है. इतना ही नहीं, वेतन संशोधन, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS), डीए एरियर (DA Arrear) और ट्रेड यूनियनों के अधिकारों पर भी स्पष्ट दिशा नहीं दी गई है. जबकि इससे पहले के आयोगों में इन बातों पर तस्वीर साफ रहती थी.

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DA-DR मर्जर पर मिलेगी राहत?

सांसदों ने सरकार से यह भी जानना चाहा है कि क्या सरकार महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) यानी DA और महंगाई राहत (Dearness Relief) यानी DR को बेसिक पे में तुरंत मिलाने पर भी कोई फैसला लेगी? चूंकि DA अब 50% के ऊपर पहुंच चुका है, कर्मचारी संगठन लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि DA-DR मर्जर होने से वेतन और पेंशन दोनों में राहत मिल सकती है. अब सबकी नजरें सरकार के उत्तर पर टिकी हैं, क्योंकि मंत्रालय का जवाब यह बताएगा कि यह राहत अभी दी जाएगी या 2027 में आने वाली अंतिम रिपोर्ट तक टाल दी जाएगी.

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पेंशनर क्यों परेशान हैं

केंद्र सरकार के लगभग 69 लाख पेंशनर हर वेतन आयोग में होने वाले पेंशन संशोधन पर निर्भर रहते हैं, ताकि उनकी पेंशन बहुत पीछे न रह जाए. अगर 8th CPC पेंशन पर विचार नहीं करेगा, तो यह परंपरा टूट जाएगी. इससे नए और पुराने पेंशनरों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है. पेंशनर्स को संगठनों का यह भी कहना है कि ToR में 'unfunded cost of non-contributory pension schemes' जैसे शब्दों का इस्तेमाल बताता है कि सरकार का झुकाव आर्थिक बोझ कम करने की ओर ज्यादा है, न कि सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने की ओर. उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते अगर वित्त मंत्रालय ने संसद में पूछे गए सवालों के जवाब दिए, तो इनमें से कुछ मुद्दों पर स्थिति साफ हो जाएगी.

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