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8th Pay Commission Update: 1 जनवरी 2026 से लागू होगा या नहीं, कैसा रहा 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल? (Image : Freepik)
8th Pay Commission Latest Update, 7th Pay Commission Highlights : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए वेतन आयोग हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है. अब जब 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर को अपना 10 साल का कार्यकाल पूरा कर रहा है, तो जाहिर है सबकी नजरें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू हो जाएगा. इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि 7वें वेतन आयोग ने पिछले 10 सालों में क्या बड़े बदलाव किए और कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन पर उसका क्या असर पड़ा.
7वें वेतन आयोग की शुरुआत और लागू होने की तारीख
7वें केंद्रीय वेतन आयोग (7th Pay Commission) की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थीं. इसके बाद केंद्र सरकार के कर्मचारियों (Central Government Employees) और पेंशनर्स के सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव देखने को मिले. इस आयोग का मकसद वेतन को ज्यादा पारदर्शी और भत्तों को आसान बनाना था.
मिनिमम और मैक्सिमम सैलरी में क्या बदला
7वें वेतन आयोग में तय फॉर्मूले के आधार पर मिनिमम वेतन 18,000 रुपये प्रति माह तय किया गया. यह उस समय एक बड़ा बदलाव माना गया, क्योंकि इससे लाखों कर्मचारियों की बेसिक सैलरी सीधे बढ़ गई. वहीं, मैक्सिमम वेतन की सीमा भी काफी ऊंची रखी गई. एपेक्स स्केल के तहत मैक्सिमम वेतन 2,25,000 रुपये प्रति माह तय हुआ, जबकि कैबिनेट सचिव और समान पदों के लिए यह सीमा 2,50,000 रुपये प्रति माह रखी गई.
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नया पे मैट्रिक्स और फिटमेंट फैक्टर
7वें वेतन आयोग का सबसे बड़ा बदलाव नया पे मैट्रिक्स रहा. पुराने पे बैंड और ग्रेड पे सिस्टम को खत्म कर दिया गया और उसकी जगह लेवल आधारित पे मैट्रिक्स लाया गया. इसके तहत कर्मचारी की स्थिति ग्रेड पे से नहीं, बल्कि पे मैट्रिक्स के लेवल से तय होने लगी. इसके साथ ही सभी कर्मचारियों पर एक समान फिटमेंट फैक्टर 2.57 लागू किया गया. इससे सैलरी कैलकुलेशन का तरीका आसान हुआ और भेदभाव की शिकायतें भी काफी हद तक कम हुईं.
सालाना बढ़ोतरी और MACP में बदलाव
सालाना इंक्रीमेंट की दर 3 प्रतिशत ही रखी गई, लेकिन MACP यानी मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम में कुछ सख्ती आई. प्रदर्शन का मानक “गुड” से बढ़ाकर “वेरी गुड” कर दिया गया. अगर कोई कर्मचारी तय मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो पहले 20 साल में MACP या नियमित प्रमोशन के तहत मिलने वाली सालाना बढ़ोतरी भी रोक दी जाती थी. हालांकि, MACP के ओरिजनल स्ट्रक्चर में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया.
भत्तों, HRA और एडवांस में बड़े फैसले
7वें वेतन आयोग के तहत 52 भत्ते पूरी तरह खत्म कर दिए गए और 36 भत्तों को मौजूदा या नए भत्तों में मिला दिया गया. जोखिम और कठिनाई भत्तों को एक नौ-सेल मैट्रिक्स से जोड़ा गया. हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA को शहरों की कैटेगरी के हिसाब से 24 प्रतिशत, 16 प्रतिशत और 8 प्रतिशत किया गया. जैसे-जैसे महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत और 100 प्रतिशत के पार जाता है, HRA में भी बदलाव का प्रावधान रखा गया. HRA का दायरा डिफेंस, CAPF और कोस्ट गार्ड के PBOR तक बढ़ाया गया.
एडवांस की बात करें तो बिना ब्याज वाले लगभग सभी एडवांस खत्म कर दिए गए. सिर्फ पर्सनल कंप्यूटर एडवांस और हाउस बिल्डिंग एडवांस को बरकरार रखा गया. HBA की सीमा 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई.
पेंशन, ग्रेच्युटी और मेडिकल सुविधाएं
पेंशन के मोर्चे पर 1 जनवरी 2016 से पहले रिटायर हुए सिविल, CAPF और डिफेंस कर्मियों के लिए कैलकुलेशन का नया तरीका लागू किया गया. ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई. इसके साथ ही यह प्रावधान भी रखा गया कि जब महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) 50 प्रतिशत बढ़ेगा, तो ग्रेच्युटी की सीमा 25 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकेगी.
मेडिकल सुविधाओं में भी सुधार हुआ. हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम की शुरुआत की गई और CGHS कवरेज को CGHS क्षेत्र से बाहर रहने वाले पेंशनर्स और पोस्टल पेंशनर्स तक बढ़ाया गया.
अब सवाल 8वें वेतन आयोग का
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू हो जाएगा. इस पर 8 दिसंबर 2025 को केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने साफ किया कि सरकार ने अभी इसकी तारीख तय नहीं की है. उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2026 से लागू होने को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है. आमतौर पर आयोग के नोटिफिकेशन के बाद रिपोर्ट आने में करीब 18 महीने लग सकते हैं. ऐसे में फैसला रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा.
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