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8th Pay Commission पर कर्मचारी संगठनों ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी. (Image : Freepik)
8th Pay Commission Update : 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के संगठन लगातार अपनी मांगें सरकार तक पहुंचा रहे हैं. वित्त मंत्रालय द्वारा इस महीने 8th CPC के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference -ToR) को मंजूरी दिए जाने के बाद उम्मीदें तो बढ़ीं, लेकिन कई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा ToR में कई अहम मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है. इसी कड़ी में अब कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लाईज एंड वर्कर्स (Confederation of Central Govt Employees & Workers) ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर संशोधन की मांग की है.
8वें वेतन आयोग का दायरा बढ़े
130 विभागों में काम करने वाले लगभग 8 लाख केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) के प्रतिनिधित्व का दावा करने वाले इस संगठन का कहना है कि 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के दायरे में पेंशन रिवीजन, फैमिली पेंशन, पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली और कर्मचारियों के लिए अंतरिम राहत जैसे मुद्दे भी शामिल किए जाने चाहिए. साथ ही, ऑटोनॉमस और स्टैच्यूटरी बॉडीज़ के कर्मचारियों को भी 8th CPC का फायदा मिलना चाहिए.
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8th CPC के लागू होने की तारीख ToR में शामिल हो
कर्मचारी संगठनों ने अपनी चिट्ठी में 4th से 7th CPC तक की इम्प्लिमेंटेशन डेट्स का हवाला देते हुए कहा है कि पिछले तमाम पे कमीशनों की सिफारिशें 10-10 साल के अंतर पर लागू हुई हैं. मसलन -
4th CPC - 01.01.1986
5th CPC - 01.01.1996
6th CPC - 01.01.2006
7th CPC - 01.01.2016
चिट्ठी में कहा गया है कि इस हिसाब से 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशें भी स्वाभाविक तौर पर 1 जनवरी 2026 (01.01.2026) से लागू होनी हैं. संगठन ने PM मोदी से ToR में साफ तौर पर इसका जिक्र किए जाने की अपील की है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स में कोई कनफ्यूजन न रहे.
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पेंशन रिवीजन को लेकर पेंशनर्स की चिंताएं
चिट्ठी में कहा गया है कि देश में 69 लाख पेंशनर्स हैं, जिनमें पुराने पेंशन सिस्टम (OPS), यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और NPS वाले पेंशनर शामिल हैं. लेकिन मौजूदा ToR में इनके पेंशन रिवीजन, पेंशन पैरिटी और कॉम्यूटेशन बहाली जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का जिक्र नहीं है.
संगठन का कहना है कि ToR में ‘अन-फंडेड कॉस्ट ऑफ नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम’ (unfunded cost of non-contributory pension schemes) जैसी शब्दावली का इस्तेमाल पेंशनर्स के अधिकारों को कमजोर करके दिखाता है. इससे लगता है कि पेंशन को एक बोझ की तरह पेश किया जा रहा है, जबकि यह एक संवैधानिक और ज्यूडिशियल तौर पर सुरक्षित अधिकार है. इसलिए इन शब्दों को ToR से हटाया जाना चाहिए.
पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली की मांग
कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) यानी OPS को बहाल करने की मांग दोहराई है. उनका कहना है कि 1 अप्रैल 2004 के बाद भर्ती हुए 26 लाख कर्मचारी NPS और UPS की वजह से असुरक्षा महसूस करते हैं. वे चाहते हैं कि सीसीएस पेंशन रूल्स (CCS Pension Rules) के आधार पर OPS को वापस लागू किया जाए.
ऑटोनॉमस, स्टैच्यूटरी बॉडीज को 8th CPC का लाभ
कई केंद्रीय फंडेड ऑटोनॉमस और स्टैच्यूटरी संस्थानों के कर्मचारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर वेतन लाभ मिलें. कनफेडरेशन ने पीएम के नाम अपने पत्र में कहा है कि इन संस्थानों के कर्मचारियों और विशेष रूप से ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) को 8th CPC के लाभ में शामिल किया जाना चाहिए.
20% अंतरिम राहत देने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) को लिखी चिट्ठी में कहा है कि 8 वें वेतन आयोग के गठन में देरी से कर्मचारियों को लगातार नुकसान हो रहा है. महंगाई बढ़ने से उनकी तनख्वाह का वास्तविक मूल्य घट रहा है. इसलिए सरकार को चाहिए कि 20% अंतरिम राहत तुरंत दे, ताकि कर्मचारियों का मनोबल बना रहे और महंगाई का असर थोड़ा कम हो सके.
CGHS की स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
कर्मचारी संगठन ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी बड़ा सुझाव दिया है. उनका कहना है कि सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (Central Government Health Scheme) यानी CGHS की सुविधाएं सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ऑटोनॉमस और स्टैच्यूटरी बॉडीज़ के कर्मचारियों तक भी पहुंचनी चाहिए. साथ ही, कनफेडरेशन ने देश के जिलों में और CGHS वेलनेस सेंटर खोलने की मांग भी की है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस और बिना झंझट के इलाज की सुविधा मिल सके.
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