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क्या 8वां वेतन आयोग लागू होने तक DA बढ़ना बंद हो जाएगा? पूरी डिटेल यहां देखें. (Image: X/@IndiaPostOffice)
दिसंबर 2025 महीने की पहली तारीख से संसद का शीतकालीन सत्र यानी विंटर सेशन शुरू हो रहा है, और इसी के साथ केंद्र सरकार के कर्मचारी सबसे ज्यादा इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर 8वें वेतन आयोग की "टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस" यानी कामकाज की रूपरेखा पर सरकार क्या साफ करेगी. इसी महीने की शुरूआत इसकी अधिसूचना जारी हुई थी, लेकिन कई बिंदुओं पर अस्पष्टता बनी हुई है.
कर्मचारियों की दूसरी बड़ी चिंता यह है कि क्या जनवरी 2026 वाले साइकिल में महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में सामान्य तरीके से बढ़ोतरी होगी या नहीं. यह पूरा मामला इसलिए उलझा हुआ है, क्योंकि 7वें वेतन आयोग का 10 साल का साइकिल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है. यानी उसके बाद होने वाली DA/DR बढ़ोतरी मौजूदा वेतन आयोग व्यवस्था से बाहर पहली संशोधन होगी. इसी बीच 8वें वेतन आयोग का काम चल रहा है, और आयोग अपनी सिफारिशें वेतन और पेंशन संशोधन के लिए अगले 18 महीनों के भीतर सौंपेगा.
इधर 8वें वेतन आयोग की टर्म्स ऑफ रेफरेंस में बताए जा रहे कथित गड़बड़ियां, सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर लगातार बनी चुप्पी, और पहले के वेतन आयोगों में देखे गए बिल्कुल अलग रुझान. इन सबने मिलकर करीब 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच भारी भ्रम पैदा कर दिया है. आइए, पूरी तस्वीर समझते हैं.
8वें वेतन आयोग की रूपरेखा को लेकर कर्मचारियों में क्यों है नाराजगी
जैसे ही सरकार ने 8वें वेतन आयोग की टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस जारी कीं, राष्ट्रीय परिषद (NC-JCM) के कर्मचारी पक्ष — जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों की ओर से सरकार के साथ औपचारिक बातचीत करता है — और कई कर्मचारी यूनियनों ने दस्तावेज़ में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं के गायब होने पर आपत्ति जताई.
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी कई अहम मांगों को दरकिनार कर दिया गया है, जबकि उन्होंने पहले ही सरकार को विस्तृत माँगपत्र सौंपा था. सबसे बड़ी नाराज़गी इस बात को लेकर है कि जारी किए गए दस्तावेज़ में वर्तमान पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की पेंशन संशोधन से जुड़ा कोई प्रावधान शामिल नहीं किया गया है. इससे देशभर के पेंशनरों में भारी निराशा फैल गई है.
यूनियनों का आरोप है कि वेतन निर्धारण, पेंशन, न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फार्मूले से जुड़ी कई पुरानी विसंगतियाँ वर्षों से लंबित हैं और इन्हें फिर नजरअंदाज कर दिया गया है. कर्मचारी चाहते हैं कि 1 जनवरी 2026 से 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता या महंगाई राहत को मूल वेतन या पेंशन में जोड़ा जाए और इसके साथ ही 20 प्रतिशत अंतरिम राहत दी जाए.
इसके अलावा यूनियनें पुरानी पेंशन योजना की बहाली और NPS तथा UPS को खत्म करने की मांग कर रही हैं. वे कोविड-19 के दौरान रुके हुए 18 महीने के DA/DR एरियर तुरंत जारी करने और अनुकंपा नियुक्ति पर लगी 5 प्रतिशत की सीमा हटाने की भी मांग उठा रही हैं.
कर्मचारियों की नाराज़गी इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि अब तक सरकार ने ToR से जुड़ी आपत्तियों पर कोई जवाब नहीं दिया है. हालांकि कुछ सांसदों ने इन मुद्दों को सरकार के सामने उठाया है, यही वजह है कि कर्मचारियों को उम्मीद है कि 1 दिसंबर से संसद का सत्र शुरू होते ही केंद्र सरकार इन सवालों पर स्पष्ट स्थिति पेश करेगी.
भ्रम की वजह, क्या 31 दिसंबर 2025 के बाद मिलेगा जवाब?
7वें वेतन आयोग का चक्र 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है. 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने तक का समय दिया गया है. रिपोर्ट मिलने के बाद भी वेतन और पेंशन संशोधन लागू होने में कम से कम 6 महीने लगेंगे, क्योंकि इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी अनिवार्य होती है.
पिछले वेतन आयोगों के अनुभव बताते हैं कि रिपोर्ट जमा होने के बाद इसे लागू करने में आमतौर पर 6 से 12 महीने लगते हैं. इसी पैटर्न को देखें तो 8वां वेतन आयोग पूरी तरह लागू होते–होते 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक जा सकता है.
इसी वजह से कर्मचारियों और पेंशनरों में दो बड़े सवाल उभर रहे हैं, जिनसे चिंता बढ़ी है:
क्या वेतन और पेंशन का संशोधन 1 जनवरी 2026 से पिछली तारीख (retrospective) से लागू माना जाएगा?
क्या दिसंबर 2025 के बाद DA में बढ़ोतरी बंद हो जाएगी, क्योंकि 7वें वेतन आयोग का चक्र समाप्त हो रहा है?
आइए दोनों सवालों को एक-एक करके समझते हैं.
क्या 8वां वेतन आयोग पिछली तारीख से लागू होगा?
इतिहास कहता है कि हां, ऐसा ही होना चाहिए
कर्मचारियों की चिंता यह है कि चूंकि ToR में लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं है, इसलिए हो सकता है कि सरकार नई वेतन संरचना को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी न माने.
लेकिन पिछले वेतन आयोगों के उदाहरण इस चिंता को काफ़ी हद तक दूर करते हैं.
7वां वेतन आयोग
• कैबिनेट की मंजूरी जून 2016 में
• लागू पिछली तारीख से, 1 जनवरी 2016 से
6वां वेतन आयोग
• कैबिनेट मंजूरी अगस्त 2008 में
• लागू पिछली तारीख से, 1 जनवरी 2006 से
यानी मंजूरी देर से मिली, लेकिन दोनों ही मामलों में सरकार ने 10 साल के चक्र को बरकरार रखा और कर्मचारियों को बकाया (arrears) भी देकर संशोधन को पिछली तारीख से लागू माना.
इसी आधार पर यह उम्मीद मजबूत होती है कि 8वां वेतन आयोग भी अपनी रिपोर्ट चाहे जब दे, लेकिन प्रभावी तारीख 1 जनवरी 2026 ही मानी जाएगी.
क्या 8वें वेतन आयोग के लागू होने तक DA बढ़ोतरी रोक दी जाएगी?
यही वह सबसे बड़ा सवाल है जो इस समय कर्मचारियों में चिंता का कारण बना हुआ है.
अगला DA चक्र जनवरी 2026 से शुरू होगा. चूंकि जनवरी–जून का महंगाई भत्ता हर साल मार्च के आसपास घोषित होता है, इसलिए यह बढ़ोतरी ठीक उसी समय देय होगी जब 7वें वेतन आयोग की अवधि समाप्त होगी.
लेकिन समझने वाली बात यह है कि किसी भी वेतन आयोग के चक्र के खत्म होने पर DA रोकने की न तो कोई नीति है और न ही ऐसा पहले कभी हुआ है.
पिछले रिकॉर्ड क्या बताते हैं?
हर वेतन आयोग के बाद
• DA बिना रुके जारी रहा
• अगले वेतन आयोग की रिपोर्ट आने तक साल में दो बार DA बढ़ता रहा
• नई वेतन संरचना लागू होने पर उस समय तक का जमा हुआ DA मूल वेतन में जोड़ दिया गया और DA फिर से शून्य से शुरू हुआ
ऐसा बदलाव 5वें से 6वें वेतन आयोग और 6वें से 7वें वेतन आयोग में भी इसी तरह हुआ था.
इस बार क्या होगा?
सभी संकेत बताते हैं कि
• 2026 और 2027 में भी DA साल में दो बार बढ़ता रहेगा, जनवरी और जुलाई में
• यह बढ़ोतरी मौजूदा 7वें वेतन आयोग के मूल वेतन पर ही आधारित होगी
• 8वां वेतन आयोग लागू होने पर जमा हुआ DA नई मूल वेतन संरचना में समाहित कर दिया जाएगा और DA की गणना फिर से शून्य से शुरू होगी
इसलिए यह कहना कि DA रोक दिया जाएगा, किसी भी आधार पर सही नहीं है. जब तक सरकार कोई नया आदेश न जारी करे, और इसकी संभावना बेहद कम है, DA सामान्य रूप से मिलता रहेगा.
अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों का DA बढ़कर 58 प्रतिशत हो चुका है, जिसमें पिछली बार 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी.
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