/financial-express-hindi/media/media_files/2026/01/02/bob-report-on-investment-fy26-2026-01-02-17-59-40.jpg)
BoB Report : FY26 के 9 महीनों में करीब 80% निवेश का एलान सिर्फ 5 सेक्टर्स में हुआ है, जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर और केमिकल अहम हैं. (AI Generated Image)
Bank of Baroda Economic Research Report : वित्त वर्ष 2026 में भारत में निवेश की रफ्तार जरूर तेज हुई है, लेकिन इसका ज्यादातर हिस्सा सिर्फ 5 सेक्टर्स में आया है. यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की हाल में आई एक रिसर्च रिपोर्ट में कही गई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में हो रहा ज्यादातर निवेश आम कंज्यूमर्स से जुड़े सेक्टर्स में नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर और हेवी इंडस्ट्री तक सीमित है.
बैंक ऑफ बड़ौदा इकनॉमिक रिसर्च की इस रिपोर्ट (Bank of Baroda Economic Research Report) के मुताबिक, FY26 के पहले 9 महीनों में निवेश के नए एलान (New Investment Announcements) बढ़कर 26.62 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए. पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 23.88 लाख करोड़ रुपये था. इससे साफ है कि मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान निवेश बढ़ा है. लेकिन सवाल यह है कि यह निवेश किन सेक्टर्स में जा रहा है.
इन 5 सेक्टर्स में मिले 80% निवेश प्रस्ताव
रिपोर्ट के अनुसार कुल निवेश प्रस्तावों का करीब 80% हिस्सा सिर्फ पांच सेक्टर्स के लिए आया है. इनमें बिजली (Power), केमिकल्स (Chemicals), मेटल्स (Metals), आईटी (IT) और ट्रांसपोर्ट सर्विसेज (Transport Services) शामिल हैं. अकेले इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टर्स की हिस्सेदारी लगभग 48% रही, जबकि केमिकल सेक्टर का हिस्सा करीब 22% रहा. इसके उलट, कंज्यूमर आधारित उद्योगों की हिस्सेदारी 3% से भी कम रही.
पावर सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश
निवेश के मामले में पावर सेक्टर सबसे आगे रहा, जिसकी हिस्सेदारी 22.6% रही. इसका बड़ा कारण रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) प्रोजेक्ट्स हैं. सरकार के कैपिटल एक्सपेंडीचर (Capex) को बढ़ावा देने और एनर्जी ट्रांजिशन के लक्ष्य (energy transition goals) ने इस सेक्टर में निवेश को मजबूती दी है. वहीं, मेटल और मेटल प्रोडक्ट्स सेक्टर में 17.3% निवेश देखा गया, जो सड़क, हाउसिंग, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक विकास के लिए जरूरी कच्चे माल (core inputs) की डिमांड की अहमियत को दिखाता है.
Also read : PPF interest rate from January 2026 : पीपीएफ का लेटेस्ट रेट जारी, कितने साल में बनेगा 1 करोड़
कमजोर डिमांड के बीच सरकारी नीतियों का असर
रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों का कहना है कि निवेश का यह झुकाव बाजार में मजबूत कंज्यूमर डिमांड की वजह से नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों के कारण है. इनकम टैक्स में राहत, जीएसटी सुधार, सार्वजनिक पूंजीगत खर्च (Public Capital Expenditure) में बढ़ोतरी और ब्याज दरों में नरमी ने लंबे समय वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को आकर्षक बनाया है. हालांकि, घरेलू खपत (household consumption) अभी भी सुस्त बनी हुई है.
Also read : ITR Deadline Missed : 31 दिसंबर की डेडलाइन चूक गए? अब भी मिल सकता है इनकम टैक्स रिफंड, ये है तरीका
आगे के लिए क्या हैं संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक जब तक उद्योगों की स्थापित क्षमता के उपयोग (capacity utilisation) में सुधार नहीं होता, तब तक प्राइवेट कंजम्पशन पर आधारित निवेश में तेजी आना मुश्किल है. इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लंबे समय में रोजगार और आमदनी बढ़ा सकते हैं, जिससे आगे चलकर कंज्यूमर डिमांड भी मजबूत होगी. फिलहाल, भारत का इनवेस्टमेंट साइकल काफी हद तक कैपेक्स पर टिका हुआ है.
/financial-express-hindi/media/agency_attachments/PJD59wtzyQ2B4fdzFqpn.png)
Follow Us