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Gold Investment : ऐसे ETF चुनें जो भरोसेमंद और अनुभवी फंड हाउस द्वारा चलाए जा रहे हों. जिनका फंड मैनेजमेंट का रिकॉर्ड अच्छा हो (Image : Freepik)
Gold ETF Buying Guide : आज एमसीएक्स पर गोल्ड प्राइस फिर से बढ़कर 1,25,106 रुपये के पार निकल गया है. गोल्ड में इस साल 57 से 58 फीसदी के बीच तेजी आ चुका है. एक्सपर्ट सलाह दे रहे हैं कि अभी सोना में निवेश करना है तो एक साथ पैसे लगाने की बजाय एसआईपी कर सकते हैं. आगे सोना सस्ता होगा तो इसका फायदा भी मिलेगा. इसके लिए गोल्ड ईटीएफ सबसे बेहतर विकल्प है. अब सवाल है कि एक मजबूत गोल्ड ईटीएफ का चुनाव कैसे करें.
एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio)
एक्सपेंस रेश्यो म्यूचुअल फंड या ईटीएफ में वह सालाना फीस है, जो फंड हाउस आपके निवेश को मैनेज करने के लिए लेता है. जितना कम एक्सपेंस रेश्यो होगा, उतना ज्यादा रिटर्न आपकी जेब में रहेगा. अलग-अलग फंड हाउस की फीस जरूर तुलना करें, क्योंकि कुछ की फीस काफी कम होती है.
ट्रैकिंग एरर (Tracking Error)
इससे पता चलता है कि ETF का रिटर्न फिजिकल गोल्ड की कीमत को कितनी सही तरह से फॉलो करता है. ट्रैकिंग एरर जितनी कम होगी, आपका निवेश सोने की वास्तविक कीमत के उतना ही करीब दिखेगा.
लिक्विडिटी (Liquidity / Trading Volume)
ज्यादा लिक्विडिटी का मतलब है कि ETF में खरीद-फरोख्त आसानी से हो सकती है. अगर ट्रेडिंग वॉल्यूम ज्यादा है, तो आप बिना ज्यादा प्राइस बदलवाए (कम "इंपैक्ट कॉस्ट" के साथ) आसानी से खरीद या बेच सकते हैं. कम वॉल्यूम वाले ETFs को बेच पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM)
ज्यादा AUM आमतौर पर इस बात का संकेत है कि निवेशक उस फंड पर भरोसा करते हैं. बड़े फंड में लिक्विडिटी बेहतर होती है और अक्सर एक्सपेंस रेश्यो भी कम होता है.
फंड हाउस का ट्रैक रिकॉर्ड
ऐसे ETF चुनें जो भरोसेमंद और अनुभवी फंड हाउस द्वारा चलाए जा रहे हों. जिनका फंड मैनेजमेंट का रिकॉर्ड अच्छा हो और जिन्होंने समय के साथ विश्वसनीय प्रदर्शन दिया हो.
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निवेश के बाद निगरानी करें
निवेश करने के बाद ETF के प्रदर्शन, वॉल्यूम और खर्चों पर नियमित रूप से नजर रखें, क्योंकि ये समय के साथ बदल सकते हैं.
ETF में टैक्स के नियम
गोल्ड ETF को अब नॉन-इक्विटी कैपिटल एसेट माना जाता है. अगर आप गोल्ड ETF को 12 महीने से ज्यादा रखते हैं, तो मुनाफा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाएगा और इस पर 12.5% की एकसमान टैक्स दर लगेगा, बिना इंडेक्सेशन. अगर इसे 12 महीने या उससे कम समय तक रखते हैं, तो मुनाफा शॉर्ट-टर्म गेन (STCG) माना जाएगा और आपकी इनकम के हिसाब से स्लैब रेट पर टैक्स देना होगा, जो हाई इनकम वालों के लिए 30% तक हो सकता है.
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Gold ETF क्या होते हैं?
गोल्ड ईटीएफ दरअसल ओपन-एंडेड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Exchange Traded Fund) होते हैं, जो सोने और उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं. यहां ध्यान देने वाली बात है कि गोल्ड फंड, गोल्ड ईटीएफ में निवेश (Invest in Gold ETF) करते हैं और गोल्ड ईटीएफ फिजिकल गोल्ड में. गोल्ड ईटीएफ की यूनिट्स की कीमतें, फिजिकल गोल्ड के भाव के आधार पर बढ़ती-घटती रहती हैं. यही वजह है कि गोल्ड ईटीएफ में किए गए निवेश के रिटर्न आम तौर पर फिजिकल गोल्ड में निवेश से मिलने वाले रिटर्न के काफी करीब होते हैं.
गोल्ड ETF को भी बाकी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट किया जाता है और इनवेस्टर अपने ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए इन्हें खरीद और बेच सकते हैं. रिस्कोमीटर पर ज्यादातर गोल्ड ईटीएफ को हाई रिस्क (High Risk) रेटिंग मिली हुई है, क्योंकि इसके रिटर्न पर गोल्ड की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है.
(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है, किसी स्कीम में निवेश की सिफारिश करना नहीं है. निवेश का कोई भी फैसला पूरी जानकारी हासिल करने और अपने निवेश सलाहकार की राय लेने के बाद ही करें.)
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